

दिल्ली की गर्मी 45 डिग्री भी पार कर चुकी है। इस तिलतिलाते गर्मी में हर किसी को चाहिए कुछ ऐसा, जो सिर्फ शरीर ही नहीं बल्कि दिल को भी ठंडक दे दे। पुरानी दिल्ली की गलियों में छिपे कुछ खास ठिकाने आज भी अपने अनोखे “मोहब्बत के शरबत” के लिए मशहूर हैं। यहां मिलने वाले शरबत सिर्फ पेय नहीं, बल्कि एक एहसास हैं जो सालों पुरानी परंपरा, स्वाद और प्यार को साथ लेकर आते हैं। इन दुकानों पर आपको भीड़ जरूर मिलेगी, लेकिन एक घूंट लेते ही समझ आ जाएगा कि लोग क्यों गर्मी में बार-बार यहां खिंचे चले आते हैं। अगर आप भी इस भीषण गर्मी में कुछ हटकर और दिल को सुकून देने वाला ट्राई करना चाहते हैं, तो दिल्ली की ये 4 जगहें (Delhi's 4 Famous Juice Shop) आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं हैं।
पुरानी दिल्ली के दिल चांदनी चौक (Chandani Chowk) की भीड़भाड़ वाली गलियों में बसी यह दुकान सिर्फ एक शरबत की दुकान नहीं, बल्कि एक जीती-जागती विरासत है। करीब 150 साल पुरानी मानी जाने वाली इस दुकान की शुरुआत प्यारेलाल जी (Pyarelal) ने की थी। खास बात यह है कि यहां आज भी शरबत बनाने का तरीका लगभग वही पारंपरिक है हाथ से तैयार किए गए मसाले, ताज़े फल और देसी अंदाज़, जो हर गिलास में पुरानी दिल्ली की खुशबू भर देता है। यहां का सबसे चर्चित “मोहब्बत का शरबत” (“Mohabbat ka Sharabat”) देखने में जितना खूबसूरत होता है, स्वाद में उतना ही लाजवाब भी। गुलाब की खुशबू, तरबूज की मिठास और ठंडे दूध का क्रीमीपन मिलकर ऐसा कॉम्बिनेशन बनाते हैं, जो एक ही घूंट में गर्मी को गायब कर देता है। गर्मियों में यहां बड़े-बड़े मटकों में तैयार शरबत को बर्फ के साथ परोसा जाता है, और ऊपर से डाले गए तरबूज के टुकड़े इसे और भी खास बना देते हैं।
कीमत की बात करें तो वह आज भी बेहद किफायती है। ₹40 से ₹80 में आपको ऐसा स्वाद मिलता है, जो बड़े-बड़े कैफे में भी मुश्किल से मिले। इसके अलावा यहां की खट्टी-मीठी शिकंजी, मसाला लेमन और सोडा ड्रिंक्स भी काफी पॉपुलर हैं, खासकर उन लोगों के बीच जो हल्का और ताज़गी भरा स्वाद पसंद करते हैं।
यहां पहुंचना भी आसान है। मेट्रो से चांदनी चौक स्टेशन (Chandani Chowk Metro Station) उतरिए और कुछ मिनट पैदल चलते ही यह दुकान दिख जाएगी। लेकिन ध्यान रहे, गर्मियों में यहां लंबी लाइन लगना आम बात है। ग्राहकों की मानें तो “यहां का शरबत सिर्फ ठंडक नहीं देता, यादें ताज़ा कर देता है।” कई लोग तो सालों से यहां आते आ रहे हैं और हर बार वही पुराना स्वाद पाकर खुश हो जाते हैं। अगर आप दिल्ली की गर्मी में सच में “दिल से ठंडा” महसूस करना चाहते हैं, तो इस दुकान का एक गिलास शरबत आपकी पूरी थकान और गर्मी को पल भर में दूर कर देगा।
1906 में हाफ़िज़ अब्दुल मजीद (Hafiz Abdul Majeed) द्वारा शुरू की गई हमदर्द आज सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक भरोसे का नाम बन चुकी है। इसका सबसे मशहूर प्रोडक्ट “रूह अफ़ज़ा” ("Rooh Afza") पिछले एक सदी से भी ज्यादा समय से भारतीय घरों में गर्मी का सबसे पसंदीदा शरबत रहा है। “रूह अफ़ज़ा” का मतलब ही होता है रूह को सुकून देने वाला, और सच में इसका हर घूंट शरीर के साथ-साथ दिल को भी ठंडक देता है। इस शरबत की खासियत इसकी यूनानी रेसिपी है, जिसमें गुलाब, केवड़ा, संतरे के अर्क, खरबूजे के बीज और कई तरह की ठंडी तासीर वाली जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं। यही वजह है कि यह सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने का काम भी करता है। पुराने समय में इसे गर्मी से बचाने के लिए एक तरह की “हर्बल ड्रिंक” के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता था।
दिल्ली की गलियों में, खासकर जामा मस्जिद और पुरानी दिल्ली के आसपास, आपको सड़क किनारे ठेलों से लेकर छोटी-छोटी दुकानों तक हर जगह रूह अफ़ज़ा के अलग-अलग अंदाज़ मिल जाएंगे। कहीं इसे ठंडे दूध के साथ गाढ़ा बनाकर दिया जाता है, तो कहीं पानी और बर्फ के साथ हल्का और ताज़गी भरा। कुछ जगहों पर इसमें तुलसी के बीज (सब्जा) या नींबू मिलाकर इसका स्वाद और भी मजेदार बना दिया जाता है।
कीमत भी जेब पर भारी नहीं पड़ती ₹30 से ₹100 में एक गिलास आसानी से मिल जाता है। रमजान के समय तो इसकी डिमांड और भी बढ़ जाती है, जब इफ्तार में यह एक जरूरी हिस्सा बन जाता है। ग्राहकों का कहना है “रूह अफ़ज़ा सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बचपन की याद है।” कई लोग बताते हैं कि दादी-नानी के समय से ही यह घर में बनता आ रहा है, और आज भी वही पुराना स्वाद बरकरार है। अगर आप दिल्ली की गर्मी में कुछ ऐसा चाहते हैं, जो स्वाद के साथ परंपरा और सेहत का भी एहसास दिलाए, तो एक गिलास ठंडा रूह अफ़ज़ा आपके दिन को सच में खास बना सकता है।
1947 में गुरचरण सिंह (Gurcharan Singh) द्वारा शुरू की गई यह दुकान आज चांदनी चौक की पहचान बन चुकी है। शुरुआत एक छोटे से ठेले से हुई थी, लेकिन अपने अनोखे स्वाद और क्वालिटी की वजह से यह जगह धीरे-धीरे दिल्ली की सबसे मशहूर मिठाई और डेजर्ट शॉप्स में गिनी जाने लगी। यहां का रबड़ी फालूदा शरबत सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक पूरा डेजर्ट एक्सपीरियंस है। इसमें ठंडी, गाढ़ी रबड़ी, मुलायम फालूदा सेव, मीठा शरबत और ऊपर से ड्राई फ्रूट्स का टॉपिंग सब मिलकर ऐसा रिच स्वाद देते हैं कि हर चम्मच के साथ मजा बढ़ता जाता है। खास बात यह है कि यहां की रबड़ी रोज ताज़ा बनाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और भी खास हो जाता है।
गर्मियों के दिनों में यहां की रौनक देखने लायक होती है। दुकान के बाहर खड़े लोग, हाथ में ठंडा फालूदा और चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान। कीमत ₹80–₹150 के बीच है, लेकिन जो क्वालिटी और क्वांटिटी मिलती है, वह पूरी तरह वर्थ इट लगती है। इसके अलावा यहां कुल्फी फालूदा, राजभोग फालूदा, काजू पिस्ता शेक, बादाम मिल्क और कई तरह के रिच, क्रीमी डेजर्ट ड्रिंक्स भी मिलते हैं। खासकर कुल्फी फालूदा यहां का ऑल-टाइम फेवरेट है, जिसे लोग बार-बार ऑर्डर करते हैं। यहां पहुंचना आसान है मेट्रो से चांदनी चौक स्टेशन उतरकर कुछ मिनट पैदल चलने पर ही यह दुकान मिल जाती है। शाम के समय यहां भीड़ ज्यादा होती है, लेकिन सर्विस काफी तेज है, इसलिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता।
ग्राहकों का कहना है “यहां का फालूदा खाने के बाद किसी और जगह का स्वाद फीका लगने लगता है।” कई लोग इसे अपनी फैमिली ट्रडिशन की तरह मानते हैं। दिल्ली आए और ज्ञानी दी हट्टी (Giani Di Hatti) नहीं गए, तो कुछ मिस कर दिया। अगर आप मीठा पसंद करते हैं और गर्मी में कुछ रिच, ठंडा और यादगार ट्राई करना चाहते हैं, तो यह जगह आपको निराश नहीं करेगी यह सच में एक “रॉयल ट्रीट” है, जो हर बाइट में महसूस होती है।
पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार की तंग गलियों में छिपी यह दुकान एक सदी से भी ज्यादा पुरानी विरासत को आज भी जिंदा रखे हुए है। इसकी शुरुआत हकीम छोटेलाल (Hakim Chhote Lal) जी ने 1861 में की थी, जो यूनानी इलाज के जाने-माने विशेषज्ञ माने जाते थे। खास बात यह है कि यहां आज भी कई शरबत पारंपरिक नुस्खों से ही तैयार किए जाते हैं। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। यहां मिलने वाले हर्बल शरबत सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने और गर्मी से होने वाली दिक्कतों जैसे लू, थकान और डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए भी जाने जाते हैं। खस, गुलाब, सौंफ, बेल और केवड़ा जैसे प्राकृतिक तत्वों से बने ये शरबत हल्के, खुशबूदार और बेहद ताज़गी देने वाले होते हैं।
दुकान का माहौल भी बेहद देसी और पुराना है। कांच की बोतलों में सजे रंग-बिरंगे शरबत, पुराने जमाने की लकड़ी की शेल्फ और वही सादगी भरा अंदाज, जो आपको समय में पीछे ले जाता है। यहां के शरबत बड़े स्टील या कांच के गिलास में बर्फ डालकर परोसे जाते हैं, जिससे हर घूंट में ठंडक का अलग ही एहसास होता है। कीमत ₹30–₹70 के बीच है, जो इसे हर किसी के लिए अफोर्डेबल बनाती है। खासकर गर्मियों में यहां लोकल लोगों के साथ-साथ टूरिस्ट्स की भी अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है।
यहां पहुंचने के लिए आप मेट्रो से चावड़ी बाजार स्टेशन उतर सकते हैं, वहां से यह दुकान कुछ ही दूरी पर है। भीड़भाड़ वाली गलियों के बीच यह जगह थोड़ी छिपी हुई जरूर है, लेकिन एक बार पहुंच गए तो अनुभव यादगार बन जाता है। ग्राहकों का कहना है “यहां का शरबत पीकर लगता है जैसे शरीर को अंदर से ठंडक मिल गई हो।” कई लोग इसे दवा और स्वाद का परफेक्ट कॉम्बिनेशन मानते हैं। अगर आप सिर्फ ठंडा नहीं, बल्कि हेल्दी और देसी अंदाज़ में ठंडक चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए एकदम परफेक्ट है जहां हर गिलास में छिपा है पुरानी दिल्ली का असली स्वाद और सेहत का राज। [SP]