RSS से धार्मिक आजादी को खतरा, भारत नहीं, इस देश में उठी बैन करने की मांग

अमेरिकी आयोग USCIRF ने अपनी 2026 की रिपोर्ट में भारत को कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि RSS जैसे संगठन धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खतरा हैं।
आरएसएस की रैली
अमेरिकी आयोग USCIRF ने अपनी 2026 की रिपोर्ट में भारत को कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि RSS जैसे संगठन धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खतरा हैं। AI Generated
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  • अमेरिकी आयोग USCIRF ने अपनी 2026 की रिपोर्ट में भारत को कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न (CPC) घोषित करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि RSS जैसे संगठन धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खतरा हैं।

  • भारत के विदेश मंत्रालय (प्रवक्ता रणधीर जायसवाल) ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि यह रिपोर्ट पक्षपाती है और पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को जानबूझकर धूमिल करने का प्रयास कर रही है।

  • रिपोर्ट के बीच संघ पर भारत में लगे पुराने प्रतिबंधों की भी चर्चा तेज हुई है। RSS पर अब तक तीन बार (1948 में गांधी जी की हत्या के बाद और राष्ट्र ध्वज विवाद के कारण, 1975 में आपातकाल के दौरान, और 1992 में बाबरी विध्वंस के समय) प्रतिबंध लग चुका है।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष ने पूरे भू-राजनीति विज्ञान के बहस को एक नई दिशा दे दी है। इसी बीच अमेरिका ने भारत में आरएसएस के ऊपर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अमेरिका में यह मांग यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम अर्थात यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। 

अमरीका में जब से यह मांग की गई है, भारत के राजनीतिक गलियारों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।

क्या कहा गया है रिपोर्ट में ?

अमेरिका के यूएससीआईआरएफ़ (USCIRF) द्वारा जारी रिपोर्ट में यह मांग की गई है कि आरएसएस की गतिविधि धार्मिक स्वतंत्रता के लिए सही नहीं है। यूएससीआईआरएफ़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ऐसे संगठन सांप्रदायिक सौहार्द को बिगड़ने की कोशिश में लगे रहते हैं। रिपोर्ट में यह मांग भी की गई है कि भारत को कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न (Country of Particular Concern) घोषित किया जाए।  क्योंकि भारत में हाल के समय में अल्पसंख्यकों को दबाने की कोशिश की गई है। कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न का मतलब होता है, ऐसे देश जहां पर धार्मिक आजादी को, अल्पसंख्यकों के अधिकारों को खतरे में डाला जाता है। ऐसी सूची में अफगानिस्तान, चीन, ईरान, पाकिस्तान, रूस इत्यादि देश शामिल हैं। 

आरएसएस पर प्रतिबंध का कारण 

दरअसल,  यूएससीआईआरएफ़ (USCIRF) प्रत्येक वर्ष अपनी रिपोर्ट जारी करती है। हर वर्ष की भांति इस साल 2026 की रिपोर्ट में बहुत सारी बातें निकलकर सामने आईं। इस बार की रिपोर्ट में आरएसएस जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ये संगठन धार्मिक स्वतंत्रता को बाधित करते हैं। अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संरक्षण में इन संगठनों के कट्टर विचार बाधा बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरएसएस जैसे संगठन के सांप्रदायिक कट्टरता वाली विचारधारा से सामाजिक सौहार्द को नुकसान होता है। 

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क्या है यूएससीआईआरएफ़ ?

यूएससीआईआरएफ़ (U.S. Commission on International Religious Freedom) एक धार्मिक स्वतंत्रता निगरानी आयोग है। इसकी स्थापना साल 1998 में अमेरिका में की गई थी। इस आयोग का मुख्य कार्य यही है कि विश्व के अन्य देशों में धार्मिक स्वतंत्रता को किस तरीके से बाधित किया जा रहा है, उसकी निगरानी करना।

सभी देशों के भीतर धार्मिक आजादी पर कैसे अंकुश लगाया जा रहा है, यह संगठन इसी बात की रिपोर्ट हर साल तैयार करके अमेरिका की सरकार को सलाह देती है कि ऐसे देशों के साथ किस तरीके से संबंध स्थापित किए जाएं ताकि धार्मिक आजादी बरकरार रहे। यूएससीआईआरएफ़ (USCIRF) द्वारा जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग अर्थात रॉ (RAW) को भी प्रतिबंधित किया जाए। 

हालांकि भारत (India) की तरफ से इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि रिपोर्ट में कई वर्षों से भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। भारत की छवि को पक्षपाती तरीके से दिखाने की कोशिश की जा रही है। जायसवाल ने कहा कि भारत इस रिपोर्ट को पूरी तरीके से खारिज करता है। 

आरएसएस पर तीन बार लग चुके हैं प्रतिबंध !

आरएसएस (RSS) को भारत में अभी तक तीन बार प्रतिबंधित किया जा चुका है। सबसे पहली बार सरदार पटेल (Sardar Patel) ने साल 1948 में आरएसएस पर पहली बार प्रतिबंध लगाया। सरकार का कहना था कि आरएसएस भारत के राष्ट्र ध्वज का सम्मान नहीं करता। ऐसे संगठन धार्मिक उन्माद फैलाने और राष्ट्र की अखंडता को चोट पहुंचाने की कोशिश करते हैं। 

दरअसल, आरएसएस आजादी के बाद, शुरू में भारत के तिरंगा झण्डा को राष्ट्र ध्वज के प्रतीक के रूप में स्वीकार नहीं करता था। उस समय आरएसएस की मुखपत्र आर्गनाइजर (Organiser) में तीन रंग के भारतीय राष्ट्र ध्वज को अशुभ बताया गया था। लेकिन बाद में आरएसएस ने सरकार की शर्त को माना और राष्ट्र ध्वज के सम्मान की बात को स्वीकार किया। साथ ही एक लिखित संविधान के तहत काम करने वाली शर्त को भी स्वीकारने का वादा किया तो 1949 में प्रतिबंध हटा लिया गया। 

इसी तरह से साल 1975 में इंदिरा गांधी के समय आरएसएस (RSS) पर प्रतिबंध लगाया गया। इसके अलावा साल 1992 में बाबरी विध्वंस के समय आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लेकिन अलग-अलग समयों पर अलग-अलग शर्तों के साथ प्रतिबंध हटा लिया गया है।

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