ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप में पाकिस्तानी को दोषी ठहराया गया

एक पाकिस्तानी व्यक्ति को ईरान के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है।
अमेरिका में आरोपी पाकिस्तानी नागरिक
ट्रंप की हत्या की साजिश के आरोप में पाकिस्तानी को दोषी ठहराया गया IANS
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पाकिस्तान के एक व्यक्ति को ईरान के साथ मिलकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान युद्ध की स्थिति में आमने-सामने हैं।

एक संघीय जूरी ने शुक्रवार को आसिफ मर्चेंट को दोषी ठहराया। उस पर आरोप था कि उसने ट्रंप और संभवतः अन्य नेताओं की हत्या के लिए सुपारी किलर रखने की कोशिश की। अभियोजन के अनुसार वह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स के निर्देश पर काम कर रहा था।

47 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक को सजा सुनाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। यह साजिश 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान अंजाम दी जानी थी, लेकिन इसे इसलिए नाकाम कर दिया गया क्योंकि जिस पाकिस्तानी व्यक्ति से उसने मदद मांगी, वह वास्तव में एफबीआई का मुखबिर था।

फैसले के बाद एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने कहा, “एफबीआई और हमारे साझेदारों ने उस घातक साजिश को रोक दिया।” यह पहली बार नहीं था जब ईरान ने अमेरिकी जमीन पर हमारे नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की हो, उसकी अन्य कोशिशें भी असफल रही हैं।

मर्चेंट को जुलाई 2024 में तब गिरफ्तार किया गया था जब वह अमेरिका (America) से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था और अगले महीने उस पर इस मामले में आरोप तय किए गए। अमेरिका के युद्ध सचिव पेटे ने कहा कि अमेरिका ने इस साजिश के ईरानी मास्टरमाइंड को मार गिराया है। हालांकि उन्होंने उसका नाम नहीं बताया।

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन की संघीय अदालत में पिछले सप्ताह शुरू हुए इस मुकदमे की तारीखें ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष से काफी पहले तय हो चुकी थीं। मुकदमे की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश एरिक कोमिटी ने इस संयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा, “यह मुकदमा दिलचस्प समय में हो रहा है।”

सुनवाई के दौरान मर्चेंट ने साजिश में शामिल होने की बात स्वीकार की लेकिन दावा किया कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि ईरान में उसके परिवार को धमकियां दी गई थीं।

उसने बताया कि उसे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स से जासूसी प्रशिक्षण मिला था और संभावित हमलों के लिए ट्रंप के अलावा दो और नाम जो बिडेन और निक्की हेले के दिए गए थे।

मर्चेंट की दो पत्नियां थीं-एक पाकिस्तान में और दूसरी ईरान में। वह अक्सर ईरान जाता था और वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स ने उसे भर्ती किया था।

अभियोजन के अनुसार उसने 2022 या 2023 में पाकिस्तान (Pakistani) में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड काप्स के लिए काम शुरू किया और 2023 के अंत में उसे अमेरिका भेजा गया ताकि वह उसके लिए नए लोगों की भर्ती कर सके।

इस मामले की अभियोजक नीना गुप्ता ने अदालत को बताया कि मर्चेंट ने अपने ऑपरेशन के लिए कपड़ों के व्यापार को आड़ के रूप में इस्तेमाल किया। उसका लक्ष्य उन लोगों पर हमला करना था जिन्हें वह “पाकिस्तान और मुस्लिम दुनिया के खिलाफ” मानता था।

उसने अदालत को बताया कि अगले वर्ष उसका मिशन बदल दिया गया और उसे फिर अमेरिका भेजा गया ताकि वह “माफिया” के लोगों को पैसे देकर दस्तावेज चोरी करवाने, विरोध प्रदर्शन आयोजित कराने और तीन लक्षित नेताओं में से किसी एक की हत्या की व्यवस्था कर सके।

अभियोजन के अनुसार उसने न्यूयॉर्क में अपने एक परिचित नदीम अली से संपर्क किया। अली एफबीआई का मुखबिर था, उसने एजेंसी को इसकी जानकारी दे दी। इसके बाद अंडरकवर अधिकारी सुपारी किलर बनकर इस ऑपरेशन में शामिल हो गए।

मर्चेंट ने हत्या को अंजाम देने के लिए अंडरकवर अधिकारियों को 5,000 डॉलर अग्रिम भुगतान भी दिया और न्यूयॉर्क के एक होटल के कमरे में नैपकिन पर साजिश का खाका बनाते हुए रिकॉर्ड किया गया।

अदालत (c) में चलाए गए एक गुप्त रिकॉर्डिंग में मर्चेंट ने एजेंटों से कहा, “शायद आप किसी को मार सकते हैं।” शायद वह कोई राजनीतिक व्यक्ति हो। अभियोजन ने बताया कि उसने इंटरनेट पर उन जगहों की भी तलाश की जहां ट्रंप रैलियां कर रहे थे।

एक अन्य संयोग में, जो मर्चेंट की साजिश से पूरी तरह अलग था, उसकी गिरफ्तारी के एक दिन बाद ट्रंप की पेन्सिलवेनिया में एक रैली के दौरान एक व्यक्ति ने उन पर गोली चलाने की कोशिश की थी। गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई थी।

[PY]

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