

पाकिस्तान की 2023 जनगणना के अनुसार हिन्दू लगभग 1.61–2.17% और ईसाई लगभग 1.37% रह गए हैं, जबकि 1947 के समय पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी कहीं अधिक बताई जाती है।
1947 के विभाजन के बाद अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए Nehru–Liaquat Pact (8 अप्रैल 1950, New Delhi) हुआ, जिसमें दोनों देशों ने अल्पसंख्यकों के अधिकार, पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का वादा किया।
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान में अल्पसंख्यक युवतियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के मामले सामने आते रहे हैं; 2014 की एक रिपोर्ट में हर साल लगभग 1000 मामलों का अनुमान और हाल के वर्षों में कुछ घटनाएँ सिंध व पंजाब प्रांतों में रिपोर्ट की गई हैं।
इस्लामिक देश पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की घटती संख्या फिर एक बार चर्चे में है। एक तरफ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में भेदभाव का आरोप लग रहा है और बलूचिस्तान के लोगों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार बलूच लोगों के अस्मिता का बिल्कुल ख्याल नहीं रख रही है। इस आधार पर पाकिस्तान से बलूचिस्तान के अलग होने की मांग वाली धार तेज होती जा रही है। उधर पाकिस्तान में दबाव डालकर धर्म परिवर्तन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के साथ भारत ने एक बहुत बड़ा हिस्सा, जिसे आज पाकिस्तान कहते हैं, उसे खो दिया। इसके बाद पाकिस्तान और भारत दोनों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेहरू-लियाकत समझौता हुआ। 8 अप्रैल 1950 को भारत की राजधानी नई दिल्ली में दोनों देशों के प्रमुखों ने समझौते पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए यह स्वीकार किया कि अपने-अपने मुल्क में अल्पसंख्यकों के भाषा, पहचान, संस्कृति इत्यादि का ध्यान रखा जाएगा। यह वादा किया गया कि जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मामलों पर कड़ा नियंत्रण रखा जाएगा और अल्पसंख्यकों से जुड़े शिकायतों के लिए अल्पसंख्यक शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की जाएगी।
भारत ने एक पंथनिरपेक्ष देश होने के नाते अपना पूरा धर्म निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन पाकिस्तान से समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने निकलकर आती हैं, जिससे पाकिस्तान के अंदर अल्पसंख्यकों के सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्न खड़ा हो जाता है।
पाकिस्तान की संघीय सरकार ने साल 2023 में पूरे पाकिस्तान की जनगणना का आधिकारिक डेटा प्रकाशित किया। इस आँकड़े में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी काफी कम बताई गई है। पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक हिन्दू अल्पसंख्यकों की आबादी मात्र 1.61–2.17% और ईसाई अल्पसंख्यकों की आबादी लगभग 1.37% बताई गई है।
बता दें कि पाकिस्तान जब भारत से अलग होकर एक देश बना था, उस समय पाकिस्तान के कुल आबादी की लगभग 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी थी। यह आंकड़ा धीरे-धीरे घटता चला गया। आज पाकिस्तान में हिन्दू और ईसाई अल्पसंख्यकों की आबादी बहुत कम हो गई है।
यह भी पढ़ें : अमेरिका रमजान के पावन मौके पर क्यों मुस्लिम देशों पर करता है हमला? जानें क्या है पूरा मामला
पाकिस्तान (Pakistan) में मूवमेंट फॉर सोलिडैरिटी एण्ड पीस (Movement for Solidarity and Peace) की रिपोर्ट साल 2014 में प्रकाशित की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में 1000 गैर मुस्लिम युवतियों का विवाह जबरदस्ती मुस्लिम युवकों से करा दिया गया।
इसी प्रकार सेंटर फॉर सोशल जस्टिस (Centre for Social Justice) की रिपोर्ट और ह्यूमन राइट ऑब्जर्वर (Human Rights Observer 2025) की रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, साल 2024 में लगभग 68 युवतियों का अपहरण करके उनके ऊपर दबाव डालकर उनका धर्म परिवर्तित किया गया।
साल 2025 में सिंध प्रांत में जिया (22 वर्ष), दिया (20 वर्ष), दिशा (16 वर्ष) और गणेश कुमार (14 वर्ष), को उनके घर से अगवा कर लिया गया और मात्र दो दिन के भीतर एक वीडियो में चारो बच्चे इस्लाम को कुबूल करते हुए दिखाई दिए।
वहीं पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ननकाना साहिब जिला में एक ईसाई युवती, जिसकी उम्र मात्र 16 वर्ष थी, उसका अपहरण 19 मई 2025 को हुआ और एक 28 वर्षीय मुस्लिम लड़के, मुहम्मद असीम से कर दिया गया।