जापान की रणनीति: 2031 तक ताइवान के निकट द्वीप को बनाएगा मिसाइल बेस, चीन से तनाव बढ़ना तय

शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि जमीन-से-हवा में वार करने वाली मिसाइलें, जो एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम हैं, मार्च 2031 तक योनागुनी (जापान के सबसे पश्चिमी आइलैंड) पर तैनात कर दी जाएंगी।
जापान के नेता  शिंजिरो कोइज़ुमी
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जापानी रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका देश पांच साल के अंदर ताइवान के पास एक छोटे से द्वीप पर मिसाइलें तैनात कर देगा। इस कदम से चीन के साथ तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। जापानी न्यूज एजेंसी क्योदो ने बताया कि शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि जमीन-से-हवा में वार करने वाली मिसाइलें, जो एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम हैं, मार्च 2031 तक योनागुनी (जापान के सबसे पश्चिमी आइलैंड) पर तैनात कर दी जाएंगी।

कोइज़ुमी ने रिपोर्टर्स से कहा, "यह कार्य की प्रगति पर निर्भर करता है, लेकिन हम साल 2030 के लिए योजना बना रहे हैं," और उन्होंने पहली बार तैनाती के शेड्यूल पर विस्तृत जानकारी दी। कोइज़ुमी ने यह ऐलान जापान की प्रधानमंत्री, साने ताकाइची, के ताइवान की सिक्योरिटी को लेकर टोक्यो (Tokyo) और बीजिंग के बीच लगभग ठप पड़े राजनियक रिश्तों के बीच किया है। ताकाइची ने पिछले साल सांसदों से कहा था कि अगर ताइवान को लेकर संघर्ष जापान के लिए खतरा बनता है, तो ताइवान पर चीन के हमले में उनका देश अपनी रक्षा के वास्ते ठोस कदम उठाएगा। इसके बाद चीन ने काफी सख्त रवैया अपनाया था। उन्होंने ताकाइची से अपने स्टैंड से पलटने की सिफारिश की थी। लेकिन जापानी पीएम अपनी बात पर अड़ी रहीं। इस वजह से चीन ने अपने नागरिकों से जापान न जाने की अपील की। साथ ही, जापान की कंपनियों के "डुअल यूज" एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी।

बीजिंग (Beijing) ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उस पर किसी भी तरह के बयान को चीन विरोधी बताता रहा है। जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री ने 2022 में दूर के पश्चिमी द्वीपों पर सुरक्षा को मजबूत करने के प्लान की घोषणा की थी। साथ ही, उसने अपना फोकस उत्तर में रूस से खतरों से हटाकर ईस्ट चाइना सी में चीनी सैन्य गतिविधियों का मुकाबला करने पर कर दिया है।

योनागुनी, जहां पहले से ही एक एसडीएफ (जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्सेस) फैसिलिटी है, ताइवान से 100 किमी दूर है, और वहां के लोगों को डर है कि वे जल्द ही सैन्य टकराव में फंस सकते हैं। कोइज़ुमी नवंबर में द्वीप पर गए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि मंत्रालय अगले हफ्ते योनागुनी के 1,500 लोगों को तैनाती के बारे में बताएगा।

2015 में यहां के लोगों ने 445 के मुकाबले 632 वोटों से एसडीएफ बेस बनाने के पक्ष में वोट किया था। करीब 160 लोग एक पहाड़ की चोटी पर लगी रडार साइट्स के जरिए चौबीसों घंटे चीनी नेवी की हरकतों पर नजर रखते हैं। योनागुनी को अपने छोटे घोड़ों और हैमरहेड शार्क के लिए जाना जाता है।

क्योदो न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एसडीएफ बेस 2016 में खुला था। टोक्यो और बीजिंग सेनकाकू आइलैंड के आसपास जापानी पानी में चीनी जहाजों के बार-बार घुसने को लेकर भी उलझते रहे हैं। योनागुनी से करीब 150 किमी दूर इस खाली द्वीप पर जापान का दखल है, लेकिन चीन भी इस पर अपना दावा करता; बीजिंग इन्हें दियाओयू के नाम से जानता है।

[PY]

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