

चीन की कानून व्यवस्था और नाबालिगों को मिलने वाली सजाओं पर अक्सर वैश्विक चर्चा होती रहती है। हाल ही में चीन की एक अदालत ने 14 वर्षीय बालक को उम्रकैद की सजा सुनाकर एक मिसाल कायम की है। यह मामला पिछले वर्ष तब चर्चा में आया था, जब इस नाबालिग लड़के ने अपनी ही 15 वर्षीय सहपाठी के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की और बाद में उसकी हत्या कर दी।
दरअसल, यह घटना चीन के युन्नान प्रांत के क्विजिंग शहर के लुओपिंग काउंटी (Luoping County) की है। यहाँ 14 साल के एक लड़के (जियांग) ने अपनी सहपाठी (फेंग) के साथ इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे।
घटना जुलाई 2025 की है, जब लड़की किसी काम से बाहर निकली थी और घर पहुँचने में उसे शाम हो गई थी। आरोपी जियांग स्कूल के समय से ही फेंग का पीछा कर रहा था। काफी समय से वह फेंग से बात करना चाहता था और उसके मन में पहले से ही कुछ अलग चल रहा था। रास्ते में एक सुनसान जगह देखकर जियांग ने उसे रोक लिया। आरोपी ने लड़की के साथ जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश की और जब उसे लगा कि वह पकड़ा जाएगा, तो सबूत मिटाने के लिए उसने लड़की का गला दबाकर उसे जान से मार डाला।
घटना के कुछ ही समय बाद स्थानीय पुलिस ने जियांग को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले की सुनवाई क्विजिंग इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट में चल रही थी। लगभग एक साल तक चले अदालती कार्यवाही और तमाम बहसबाजी के बाद, कोर्ट ने जियांग को दोषी पाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि चीन जैसे देश में कानून व्यवस्था बहुत सख्त माना जाता है, ऐसे में रेप जैसी घटना का प्रकाश में आना वहां के सख्त कानून पर सवाल खड़ा करता है।
चीनी कानून के मुताबिक, 18 साल से कम उम्र के अपराधी को मौत की सजा नहीं सुनाई जा सकती है। सामान्य तौर पर चीन में हत्या और रेप जैसे जघन्य मामलों में 'मृत्युदंड' (Capital Punishment) का प्रावधान है, लेकिन यहाँ आरोपी नाबालिग था, इसलिए उसे उम्रकैद की सजा दी गई। चीन में यह प्रावधान स्पष्ट है कि यदि अपराधी बालिग (18+) होता, तो कोर्ट उसे मौत की सजा सुना सकती थी।
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भारत में रेप से जुड़े मामलों पर पहले कानून उतना सख्त नहीं था। रेप से जुड़े मामलों पर भारतीय कानून में सबसे बड़ा बदलाव 2012 के निर्भया कांड के बाद आया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 'जस्टिस वर्मा कमेटी' का गठन किया गया, जिसकी सिफारिशों पर 2013 में कानून को और सख्त बनाया गया। निर्भया मामले के चारों बालिग दोषियों को 20 मार्च 2020 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई। निर्भया केस में एक आरोपी नाबालिग (18 वर्ष से कम) था, जिसे तत्कालीन कानून के अनुसार अधिकतम 3 साल की सजा मिली। इसके बाद भारत में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (2015) में संशोधन किया गया। फिलहाल कानून के अनुसार, यदि 16 से 18 वर्ष का किशोर कोई रेप जैसी घटना को अंजाम देता है, तो उस पर वयस्क (Adult) की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है।
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