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उड़ीसा में आवासीय विद्यालयों में दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने निकलकर आ रही हैं। 14 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न हुआ और वह इसे वह सहन नहीं कर सकी। बच्ची ने डिप्रेसन में हाथ की नस काट लिया। यह मामला जबसे प्रकाश में आया है पूरे सूबे में खलबली मच गई है।
उड़ीसा में साल 2024 में नई सरकार बनी। भाजपा की सरकार बने लगभग दो साल पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन सूबे में सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला मयूरभंज का है। यहाँ पर एक सरकारी आवासीय विद्यालय है। इस विद्यालय में जो खाना बच्चों को दिया जाता है उसको लेकर सवाल तब खड़े हो गए जब एक छात्रा की मौत हो गई। रात में जब बच्चियों को खाना दिया गया तो उसे खाने के बाद बच्चियों के पेट में दर्द उठा और उल्टी होने लगी। आनन फानन में उनको अस्पताल ले जाने की कोशिश हुई, इसी बीच एक बच्ची ने दम तोड़ दिया और उसकी मौत हो गई।
दूसरी घटना ओडिसा राज्य के गुम्मा ब्लॉक (Gumma Block) की है। एक घटना ने सबका दिल दहला दिया। दरअसल, 5 साल की एक बच्ची दाल के बर्तन में गिर गई। खौलते दाल में गिरने से बच्ची का पूरा शरीर जल गया था और अंत में उसकी मौत हो गई।
वहीं एक मामला गजपति जिले का है जहां पर एक सरकारी स्कूल की छात्रा का यौन शोषण हुआ। वह इस शोषण के खिलाफ आवाज न उठा सकी और मजबूरन उसने अपने हाथ के नस को काट डाला। मौके पर लड़की को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्ची की जान तो बच गई लेकिन इस घटना पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया।
सरकारी आंकड़ों में इस तरीके की घटनाओं के सामने आने से व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्य सरकार ऐसे सवालों के जवाब देने से अक्सर कतराती है। आम जनता और सरकार के बीच बढ़ते जा रहे फासले राजनीति को बेहद खतरनाक दिशा की ओर ले जा रहे हैं।
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जून 2024 में बीजेपी की सरकार उड़ीसा में बनी। सरकार बनने के बाद लोगों को लगने लगा था कि नई सरकार व्यवस्था को सटीक तरीके से संचालित करेगी। समय बीतने के साथ सरकार की लापरवाही सामने आने लगी है। उड़ीसा में लगभग 5 वर्षों में 882 मासूमों ने किसी न किसी कारण से दम तोड़ दिया और जान चली गई। ये सारी घटनाएं यह दिखती हैं कि सरकार आवासीय विद्यालयों को लेकर गंभीर नहीं है। शायद आला अधिकारी कहीं और ही व्यस्त हैं इसलिए इस तरीके की घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं से उड़ीसा सरकार की कानून व्यवस्था सवालों के कटघरे में खड़ी है। NCRB के आंकड़ों पर नजर डालने पर यह सामने निकलकर आता है कि 2024-26 के बीच लड़कियों के मरने की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषकर 14-18 वर्ष की लड़कियों के आत्महत्या के मामलों में 5-7 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। उड़ीसा में यौन उत्पीड़न के मामले जिस तरीके से बढ़ते जा रहे हैं, वह बेहद चिंतनीय है।
ये हाल केवल उड़ीसा में ही नहीं है बल्कि अन्य राज्यों में भी हालत खराब है। बिहार जैसे राज्य में बीजेपी लगभग 20 सालों से सत्ता में है। यहाँ के विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों का अनुपात सही नहीं है। महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल लगातार खड़े होते रहे हैं। NCRB के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में सबसे ज्यादा महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान भी इस मामले में पीछे नहीं है। इन राज्यों में स्त्रियों की सुरक्षा सवालों के कटघरे में खड़ा है। सिक्किम, केरल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में 18 साल से कम की बालिकाओं से छेड़खानी के मामले बहुत अधिक सामने आ रहे हैं। मणिपुर जैसे राज्य में एक महिला को नग्न अवस्था में 4 मई 2023 को सार्वजनिक रूप से घुमाया जाना यह साबित करता है कि देश के भीतर लड़कयों और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। सरकारी तंत्र पूरी तरीके से जागा नहीं है।
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