

टीवी की दुनिया में कई कलाकार आए और गए, लेकिन कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने अपने किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में भी उसी रूप में देखने लगे। 1987 में प्रसारित हुई 'रामायण' (Ramayana) के सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से इतिहास रच दिया था। इन्हीं में से एक थे अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi), जिन्होंने रावण (Ravana) का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी अलग पहचान बनाई। दिलचस्प बात यह है कि रामायण की शूटिंग के दौरान वे अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कई बार घंटों तक भूखे रहते थे और पूरी तरह अपने रोल में डूब जाते थे। आइए जानते हैं अरविंद त्रिवेदी की जिंदगी और उनकी अभिनय यात्रा से जुड़ी कुछ बेहद रोचक बातें।
अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi) भारतीय टीवी और फिल्म जगत के मशहूर अभिनेता थे। उनका जन्म 8 नवंबर 1938 को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन में हुआ था। हालांकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुजराती फिल्मों से की थी, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता रामानंद सागर (Ramananda Sagar) की 'रामायण' में रावण का किरदार निभाने से मिली।
अभिनय की दुनिया में उन्होंने 1970 के दशक में कदम रखा और गुजराती सिनेमा की 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और शानदार संवाद अदायगी ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। रामायण के प्रसारण के समय उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि लोग उन्हें असली रावण समझकर नफरत भी करते थे और कई जगह उनके साथ फोटो खिंचवाने से कतराते थे। लेकिन यही उनके शानदार अभिनय की सबसे बड़ी सफलता थी। रामायण के अलावा उन्होंने 'विक्रम और बेताल', 'लव कुश' और कई गुजराती फिल्मों में भी यादगार भूमिकाएं निभाईं। बाद में वे राजनीति में भी सक्रिय हुए और सांसद बने। 6 अक्टूबर 2021 को उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी जब रामायण का नाम लिया जाता है तो अरविंद त्रिवेदी का रावण लोगों के जेहन में जिंदा हो उठता है।
रामानंद सागर (Ramananda Sagar) की रामायण में रावण का किरदार मिलने के बाद अरविंद त्रिवेदी ने इस भूमिका को जीवंत बनाने के लिए धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने रावण के व्यक्तित्व, उसके ज्ञान, अहंकार, शक्ति और भावनाओं को गहराई से समझने का प्रयास किया। शूटिंग के दौरान वे अपने किरदार में इतने डूब जाते थे कि कई बार घंटों तक भोजन नहीं करते थे, ताकि चेहरे पर वही गंभीरता, तेज और तपस्या दिखाई दे जो रावण के चरित्र की पहचान थी। वे अपने संवादों का लगातार अभ्यास करते रहते थे और हर दृश्य को पूरी निष्ठा के साथ निभाते थे।
दिलचस्प बात यह है कि पर्दे पर भगवान राम के सबसे बड़े विरोधी रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी वास्तविक जीवन में भगवान राम के परम भक्त थे। वे अपने सह-कलाकार अरुण गोविल, जिन्होंने राम की भूमिका निभाई थी, का बेहद सम्मान करते थे। कहा जाता है कि उन्होंने अरुण गोविल को केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि भगवान राम का स्वरूप मान लिया था। कई अवसरों पर वे उनके चरण स्पर्श करते थे और उनके प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त करते थे। यही कारण था कि पर्दे पर रावण की भूमिका निभाने के बावजूद, उनके मन में भगवान राम और उनके आदर्शों के प्रति अटूट आस्था और सम्मान बना रहा। [SP]