

हिंदी सिनेमा की ट्रैजेडी क्वीन कही जाने वाली मीना कुमारी (Meena Kumari) की जिंदगी जितनी शानदार दिखती थी, उतनी ही रहस्यमयी घटनाओं से भरी भी थी। 56 साल पहले उनके साथ एक ऐसा हादसा हुआ था, जिसने पूरे बॉलीवुड को हिला दिया था। फिल्म की शूटिंग के दौरान चंबल के डाकुओं ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया था। खबर फैलते ही फिल्म इंडस्ट्री में डर और अफरा-तफरी मच गई थी। हर कोई यही जानना चाहता था कि आखिर डाकू मीना कुमारी को क्यों ले गए और उन्हें छोड़ने के बदले क्या मांग रखी गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि डाकुओं ने पैसों से ज्यादा एक ऐसी अजीब शर्त रखी थी, जिसे सुनकर लोग भी दंग रह गए थे। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के सबसे चर्चित घटनाओं में गिना जाता है। तो आइए जानतें है इस दिलचस्प किस्से के बारे में।
दरअसल, यह घटना उस समय की है जब मीना कुमारी चंबल के बीहड़ों में पाकीज़ा (Pakeezah) फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। शूटिंग के दौरान अचानक हथियारबंद डाकुओं का एक गिरोह वहां पहुंच गया। बताया जाता है कि डाकुओं ने पहले यूनिट के लोगों को डराया-धमकाया और फिर मीना कुमारी (Meena Kumari) को अपने साथ ले जाने की कोशिश की। उस दौर में चंबल के डाकुओं का नाम सुनते ही लोगों के दिल कांप जाते थे, इसलिए पूरी यूनिट सहम गई थी। खबर फैलते ही पुलिस और प्रशासन भी हरकत में आ गया था।
कहा जाता है कि डाकुओं की सबसे बड़ी शर्त यह थी कि कोई भी पुलिस कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने साफ कह दिया था कि अगर पुलिस बीहड़ों में दाखिल हुई, तो हालात बिगड़ सकते हैं। इसके अलावा डाकुओं ने यह भी चाहा था कि उनकी कहानी और परेशानियों को दुनिया के सामने दिखाया जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि डाकू चाहते थे कि फिल्मों में उन्हें सिर्फ खूंखार अपराधी की तरह नहीं, बल्कि मजबूर इंसानों की तरह भी दिखाया जाए। यही वजह थी कि उन्होंने मीना कुमारी के साथ बुरा व्यवहार नहीं किया और उन्हें सम्मान के साथ रखा।
डाकुओं ने एक अजीब शर्त रखी थी। दरअसल डाकुओं ने मीना कुमारी (Meena Kumari) से उनके हाथों खाना बनवाने और उनके साथ बैठकर बात करने की इच्छा जताई थी। वे उनके बहुत बड़े फैन थे और उन्हें करीब से देखना चाहते थे। उस दौर में मीना कुमारी की लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि बीहड़ों में रहने वाले डाकू भी उनकी फिल्मों के दीवाने थे। कई किस्सों में यह भी कहा जाता है कि डाकुओं ने उनसे गाने सुनाने और फिल्मी डायलॉग बोलने की फरमाइश की थी। हालांकि, कुछ घंटों बाद मामला शांत हो गया और मीना कुमारी को सुरक्षित छोड़ दिया गया। इस घटना ने उस समय अखबारों और फिल्मी गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी थीं। बाद में यह किस्सा बॉलीवुड की उन कहानियों में शामिल हो गया, जिन्हें लोग आज भी बड़े दिलचस्प तरीके से याद करते हैं।
'पाकीज़ा' फिल्म 4 फरवरी 1972 को रिलीज़ हुई थी। इस सदाबहार क्लासिक फिल्म का निर्देशन कमाल अमरोही ने किया था और इसमें मुख्य कलाकार मीना कुमारी (साहिबजान/नरगिस), राज कुमार (सलीम अहमद खान) और अशोक कुमार (शहाबुद्दीन) थे। आपको बता दें कि बॉलीवुड में यह कैसे फिल्म है जिसे बनने में 16 साल लग गए थे। इस फिल्म की शूटिंग 1956 में शुरू हुई थी और 1972 में इस फिल्म को रिलीज किया गया। यह मीना कुमारी की सबसे यादगार फिल्मों में से एक है, जो उनकी मृत्यु के बाद एक बहुत बड़ी हिट साबित हुई।
'पाकीज़ा' (Pakeezah) 4 फरवरी 1972 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इस सदाबहार क्लासिक फिल्म का निर्देशन कमाल अमरोही (Kamal Amrohi) ने किया था। फिल्म में मीना कुमारी (Meena Kumari) ने साहिबजान/नरगिस, राज कुमार (Raaj Kumar) ने सलीम अहमद खान और अशोक कुमार (Ashok Kumar) ने शहाबुद्दीन का यादगार किरदार निभाया था। हिंदी सिनेमा की इस ऐतिहासिक फिल्म को बनने में पूरे 16 साल लगे थे। इसकी शूटिंग साल 1956 में शुरू हुई थी और लंबी प्रतीक्षा के बाद 1972 में यह दर्शकों के सामने आई।
मीना कुमारी (Meena Kumari) का जन्म 1 अगस्त 1933 को तत्कालीन बॉम्बे में हुआ था। उनका असली नाम महजबीं बानो था। बेहद कम उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली मीना कुमारी ने अपनी दमदार अदाकारी और भावनात्मक किरदारों से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई, जिसके कारण उन्हें “ट्रेजेडी क्वीन” (Tragedy Queen) के नाम से भी जाना गया।
उन्हें अपने शानदार फिल्मी करियर में कई बड़े सम्मान मिले। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार उन्होंने बैजू बावरा, परिणीता, साहिब बीबी और गुलाम और काजल जैसी फिल्मों के लिए जीते थे। मीना कुमारी का निधन 31 मार्च 1972 को मात्र 38 वर्ष की आयु में हुआ था। खास बात यह रही कि 'पाकीज़ा' उनकी मृत्यु के कुछ ही समय बाद एक बड़ी सुपरहिट साबित हुई और इस फिल्म ने उन्हें अमर बना दिया।
[SP]