

हिंदी सिनेमा की सबसे ग्लैमरस और बोल्ड अदाकारा में से एक मानी जाने वाली परवीन बॉबी का चेहरा आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने 70 और 80 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई। उस दौर में जब ज्यादातर एक्ट्रेस पारंपरिक अंदाज में नजर आती थीं, तब परवीन अपने मॉडर्न और स्टाइलिश लुक से अलग दिखती थीं। उनका फिल्मी सफर कॉलेज के दिनों में उस वक्त शुरू हुआ, जब एक डायरेक्टर की नजर उन पर पड़ी और उनकी किस्मत बदल गई।
परवीन बॉबी का जन्म 4 अप्रैल 1954 को गुजरात के जूनागढ़ में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं और परवीन का जन्म उनकी शादी के 14 साल बाद हुआ था। उन्होंने अहमदाबाद से अपनी पढ़ाई पूरी की और अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा और आगे बढ़ने की ठानी।
एक दिन जब उन्हें पता चला कि कॉलेज के पास एक फिल्म की शूटिंग चल रही है, तो परवीन वहां पहुंची। इस दौरान फिल्म डायरेक्टर बी. आर. इशारा की नजर उन पर पड़ी। परवीन ने मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी और सेट के बाहर खड़ी होकर सिगरेट पी रही थी। उन्हें देख बी.आर. इशारा ने अपने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीर खींचने के लिए कहा, जब डायरेक्टर ने परवीन बॉबी की तस्वीरें देखी तो उन्हें बुलाकर फिल्म का ऑफर दे दिया।
साल 1973 में परवीन ने फिल्म 'चरित्र' से बॉलीवुड में डेब्यू किया। यह फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन उनकी पर्सनैलिटी और स्क्रीन प्रेजेंस ने सबका ध्यान खींचा। इसके बाद 1974 में आई फिल्म 'मजदूर' में उन्हें पहली बड़ी पहचान मिली, जिसमें उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई सुपरहिट फिल्में दीं।
1975 में आई 'दीवार' ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद 'अमर अकबर एंथनी', 'शान', 'नमक हलाल', 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस बना दिया। खास बात यह थी कि उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ कई सफल फिल्में कीं और उनकी जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उस दौर में परवीन बॉबी सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं।
सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि फैशन और स्टाइल में भी परवीन सबसे आगे थीं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में वेस्टर्न लुक को लोकप्रिय बनाया। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1976 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मैगजीन 'टाइम' के कवर पेज पर जगह मिली, जो उस समय किसी भारतीय अभिनेत्री के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।
हालांकि, उनकी निजी जिंदगी उतनी आसान नहीं रही। उनका नाम महेश भट्ट, कबीर बेदी और डैनी डेन्जोंगपा जैसे लोगों के साथ जुड़ा। लेकिन, रिश्तों में उन्हें स्थिरता नहीं मिल सकी। इसी बीच उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी और उन्हें पैरानॉइड सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी हो गई, जिससे उनकी सोच और व्यवहार पर असर पड़ा।
साल 1983 में उन्होंने अचानक फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और विदेश चली गईं। कई साल बाद वह वापस लौटीं, लेकिन तब तक सब कुछ बदल चुका था। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को दुनिया से अलग कर लिया और अकेले रहने लगीं। मुंबई के फ्लैट में 22 जनवरी 2005 को उनका शव मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने कई दिनों से खाना नहीं खाया था और उनकी मौत भूख व बीमारी की वजह से हुई।
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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)