

अक्सर जब दुनिया में हिंदू आबादी की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले भारत का नाम आता है। लेकिन यह जानकर कई लोगों को हैरानी होगी कि भारत के बाहर भी ऐसे कई देश हैं जहाँ लाखों नहीं बल्कि करोड़ों हिंदू रहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कुछ देश मुस्लिम बहुल हैं, फिर भी वहाँ हिंदू समुदाय सदियों से अपनी परंपराओं, मंदिरों और त्योहारों के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है।
दरअसल, इतिहास में भारत का कई देशों के साथ व्यापार, संस्कृति और धार्मिक संबंध रहे हैं। कभी प्राचीन हिंदू-बौद्ध साम्राज्यों का प्रभाव रहा, तो कभी भारत के विभाजन और बाद में हुए माइग्रेशन के कारण लोग दूसरे देशों में जाकर बस गए। यही वजह है कि आज नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देशों में बड़ी संख्या में हिंदू निवास करते हैं। कहीं उनकी आबादी करोड़ों में है, तो कहीं कुल जनसंख्या में उनका अच्छा-खासा प्रतिशत देखने को मिलता है। अब सवाल यह है कि इन देशों में हिंदुओं की संख्या कितनी है, उनका प्रतिशत कितना है और वे वहाँ कब और कैसे बसे। आइए एक एक कर इसका जवाब ढूंढ़ते हैं।
बांग्लादेश एक मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहाँ हिंदुओं की आबादी काफी बड़ी है। यहाँ लगभग 1.3 करोड़ से अधिक हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 7- 8% हैं। 1947 से पहले बांग्लादेश भारत का हिस्सा था और इसे पूर्वी बंगाल कहा जाता था। उस समय यहाँ बड़ी संख्या में हिंदू रहते थे। भारत के विभाजन के बाद यह क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा बना और 1971 में स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बना। विभाजन के समय कई हिंदू भारत आ गए, लेकिन लाखों हिंदू वहीं रह गए और आज भी उनकी बड़ी आबादी मौजूद है।
पाकिस्तान में भी हिंदुओं की आबादी लाखों में है। यहाँ लगभग 50 लाख के आसपास हिंदू रहते हैं और यह देश की कुल आबादी का लगभग 2% हैं। पाकिस्तान बनने से पहले सिंध और पंजाब के कई क्षेत्रों में हिंदू व्यापारी और किसान बड़ी संख्या में रहते थे। 1947 में भारत के विभाजन के बाद बहुत से हिंदू भारत आ गए, लेकिन सिंध प्रांत में आज भी बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। थारपारकर और उमरकोट जैसे क्षेत्रों में हिंदू आबादी विशेष रूप से अधिक पाई जाती है।
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है, फिर भी यहाँ लगभग 40- 45 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी का करीब 1- 2% हैं। इसका कारण प्राचीन इतिहास है। कई सदियों पहले यहाँ हिंदू-बौद्ध साम्राज्य थे और भारत से व्यापार तथा संस्कृति का गहरा प्रभाव पड़ा था। आज भी इंडोनेशिया के बाली द्वीप में अधिकांश लोग हिंदू धर्म को मानते हैं और वहाँ के मंदिर, त्योहार और रीति-रिवाज भारतीय संस्कृति से मिलते-जुलते हैं।
श्रीलंका में लगभग 30- 32 लाख हिंदू रहते हैं और यह देश की कुल आबादी का लगभग 14 - 15% हिस्सा हैं। यहाँ के अधिकतर हिंदू तमिल समुदाय से जुड़े हैं। सदियों से दक्षिण भारत और श्रीलंका के बीच व्यापार और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं, इसलिए कई तमिल परिवार वहाँ बस गए। इसके अलावा ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से तमिल मजदूरों को चाय के बागानों में काम करने के लिए श्रीलंका ले जाया गया, जिससे वहाँ हिंदू आबादी और बढ़ गई।
मलेशिया एक मुस्लिम-बहुल देश है, लेकिन यहाँ हिंदू धर्म मानने वाले लोगों की बड़ी आबादी रहती है। 2020 के आँकड़ों के अनुसार मलेशिया में लगभग 19–20 लाख हिंदू रहते हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 6% हैं। यहाँ के अधिकतर हिंदू भारतीय मूल (खासकर तमिल) के हैं। हिंदू लोगों का मलेशिया पहुँचना मुख्य रूप से ब्रिटिश उपनिवेश काल (19वीं–20वीं सदी) में हुआ। उस समय ब्रिटिश सरकार भारत के दक्षिणी राज्यों से मजदूरों को रबर बागानों, टिन खदानों और खेती में काम कराने के लिए मलाया (आज का मलेशिया) लेकर आई थी। कई मजदूर स्थायी रूप से वहीं बस गए और बाद में अपने परिवारों को भी बुला लिया।
आज मलेशिया के कई शहरों जैसे कुआलालंपुर, पेनांग और सेलांगोर में हिंदू मंदिर, सांस्कृतिक संस्थाएँ और भारतीय परंपराएँ देखने को मिलती हैं। इस तरह ऐतिहासिक प्रवासन और औपनिवेशिक मजदूरी व्यवस्था के कारण यहाँ एक बड़ा हिंदू समुदाय विकसित हुआ।
कतर भी एक मुस्लिम-बहुल खाड़ी देश है, लेकिन यहाँ बड़ी संख्या में विदेशी कामगार रहते हैं जिनमें हिंदू भी शामिल हैं। अनुमान के अनुसार कतर में लगभग 3–4 लाख हिंदू रहते हैं, जिनमें अधिकतर भारतीय और नेपाली प्रवासी मजदूर तथा पेशेवर कर्मचारी हैं। कतर में हिंदू समुदाय का विकास मुख्य रूप से 1970 के बाद तेल और गैस उद्योग के विस्तार के कारण हुआ। जब देश में निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़े, तब भारत, नेपाल और दक्षिण एशिया से लाखों लोग रोजगार के लिए यहाँ आए। इनमें इंजीनियर, आईटी पेशेवर, दुकानदार और निर्माण श्रमिक शामिल हैं।
आज कतर की कुल आबादी में बड़ी संख्या प्रवासी लोगों की है, इसलिए हिंदू समुदाय भी मुख्य रूप से कामकाजी प्रवासी समुदाय के रूप में मौजूद है। हालांकि यहाँ भारत की तरह बड़े मंदिर कम हैं, लेकिन भारतीय समुदाय घर या सामुदायिक सभाओं में पूजा-पाठ और त्योहार मनाता है, जैसे दीवाली और नवरात्रि।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक इस्लामी देश है, लेकिन यहाँ बड़ी संख्या में हिंदू रहते हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार यहाँ लगभग 11–12 लाख हिंदू हैं, जो देश की कुल आबादी का लगभग 6–15% तक हो सकते हैं।
यहाँ के अधिकांश हिंदू भारतीय और नेपाली प्रवासी हैं। उनका यहाँ पहुँचना मुख्य रूप से व्यापार और रोजगार के कारण हुआ। 20वीं सदी की शुरुआत में कुछ भारतीय व्यापारी खाड़ी के तटीय शहरों जैसे दुबई और शारजाह में व्यापार करने आए थे। बाद में 1970 के दशक के बाद तेल उद्योग के विकास और तेज आर्थिक वृद्धि के कारण लाखों भारतीय मजदूर, इंजीनियर, डॉक्टर और व्यापारी यहाँ काम करने के लिए आने लगे। आज दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में हिंदू मंदिर, सांस्कृतिक संगठन और भारतीय त्योहार जैसे दीवाली और होली भी मनाए जाते हैं। हाल के वर्षों में अबू धाबी में एक भव्य हिंदू मंदिर भी बनाया गया है, जो वहाँ के भारतीय समुदाय की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, यह साफ होता है कि हिंदू धर्म केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें दुनिया के कई देशों तक फैली हुई हैं। अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं, व्यापारिक संबंधों, सांस्कृतिक प्रभाव और लोगों के प्रवास की वजह से आज भी कई देशों में हिंदू समुदाय बड़ी संख्या में रहता है। खास बात यह है कि अलग देश और अलग परिस्थितियों के बावजूद ये लोग अपनी परंपराओं, त्योहारों और संस्कृति को आज भी पूरी श्रद्धा और गर्व के साथ निभा रहे हैं। यही कारण है कि हिंदू संस्कृति की झलक आज दुनिया के कई कोनों में देखने को मिलती है। [SP/MK]