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पश्विम बंगाल में विधानसभा के चुनाव (West Bengal Election 2026) होने वाले हैं। 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होगी जबकि 4 मई को इसका नतीजा भी आ जाएगा। कहते हैं, चुनाव और क्रिकेट एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। क्रिकेट के खेल में 15 सदस्यीय दल चुना जाता है, जिसमे से सिर्फ 11 खिलाड़ी ही खेल पाते हैं। जो नहीं खेल पाते हैं, वो दोबारा मेहनत करते हैं और फिर अपनी जगह पक्की करते हैं जबकि कुछ निराशा में आकर टीम ही बदल लेते हैं। जैसे किसी अन्य देश से जुड़ जाना।
ठीक राजनीति भी ऐसी ही दिखती है। अगर किसी नेता को टिकट ना मिले, तो वो सीधा पार्टी ही बदल लेता है। बंगाल चुनाव से पहले ऐसा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस TMC नेता के ऊपर संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं और इसपर चोरी, घातक हथियारों से दंगा कराने का भी आरोप है। कौन है ये नेता, आइये जानते हैं।
देश में चुनाव का मौसम चल रहा है और इसी बीच दल-बदल का खेल भी चल रहा है। अप्रैल में बंगाल में चुनाव है और वोटिंग से पहले ही ममता बनर्जी की TMC पार्टी को एक झटका भी लगा है। उत्तर 24 परगना जिले के बादुड़िया विधानसभा क्षेत्र से निवर्तमान विधायक काजी अब्दुर रहीम (Kazi Abdur Rahim) ने TMC का साथ छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया था, इसी वजह से वो नाराज भी चल रहे थे, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान कर दिया।
बता दें कि अब्दुर रहीम ने 2016 में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था और बादुरिया (Baduria) निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2020 में वो इसी क्षेत्र से TMC के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। वहीं, वो एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। बादुरिया में उनका विशाल जनाधार भी है।
काजी अब्दुर रहीम (Kazi Abdur Rahim) ने 29 मार्च 2026 को TMC से इस्तीफा दिया और 24 घंटे के भीतर ही 30 मार्च को कांग्रेस में शामिल हो गए। अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट में अब्दुर रहीम काजी ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता सहित पार्टी के सभी पदों से अपने इस्तीफे की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए, वह अब पार्टी के घोषित आदर्शों और उसकी वास्तविक हकीकत के बीच पैदा हुई गहरी खाई के साथ तालमेल नहीं बिठा सकते। इसी दिन रहीम ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के अपने फैसले को बेहद कठिन लेकिन सिद्धांतों पर आधारित बताया।
अपने लंबे राजनीतिक सफर पर विचार करते हुए रहीम ने आम लोगों के प्यार और आशीर्वाद को अपनी ताकत का एकमात्र जरिया बताया। पार्टी छोड़ने के अपने कारणों को समझाते हुए निवर्तमान विधायक ने संगठन के भीतर के माहौल को लेकर खुलकर अपनी निराशा व्यक्त की।
उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से वह तृणमूल कांग्रेस के भीतर व्याप्त विभिन्न "अन्यायों और अनुचित प्रथाओं" के खिलाफ बार-बार आवाज उठाते रहे हैं। फिर भी उनके प्रयासों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व कोई प्रभावी सुधारात्मक उपाय करने में विफल रहा। रहीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार हो रही इस उपेक्षा और अन्याय से उन्हें गहरा दुख हुआ है। रहीम ने यह वादा किया कि मैं लोगों के साथ खड़ा रहा हूं और भविष्य में भी उनके साथ खड़ा रहूंगा, यह मेरी पक्की प्रतिबद्धता है।"
आपको बता दें कि काजी अब्दुर रहीम (Kazi Abdur Rahim) पर संगीन आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार साल 2008 में उनके ऊपर एक मामला दर्ज किया गया था, जिसे Case No. 18 कहा जाता है, जो इस समय अदालत में लंबित है। इसमें दंगा (Rioting), चोरी (Theft) और गंभीर चोट पहुँचाने जैसी 10 अलग-अलग धाराएं (IPC 147, 379, 325 आदि) दर्ज हैं। हालांकि, अब तक उन्हें किसी भी मामले में सजा नहीं दी गई है। मामला कोर्ट में चल रहा है।