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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पंद्रह साल से लगातार मुख्यमंत्री हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के शासन को चुनौती देने के लिए भाजपा में साम दाम दंड भेद की नीति अपनाई जा रही है। इसी बीच ममता की पार्टी से निकले एक मुस्लिम नेता ने ममता बनर्जी के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में हुमायूँ कबीर की पार्टी आम आदमी उन्नयन पार्टी' (एएयूपी) की चर्चा बहुत हो रही है। दिसंबर 2025 में हुमायूँ कबीर ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। उस समय बाबरी मस्जिद की स्थापना को लेकर कबीर सुर्खियों में बने रहे। उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई जिसका नाम आम आदमी उन्नयन पार्टी है। पश्चिम बंगाल में अभी तक ममता के राजनीतिक दुर्ग को कोई भेद नहीं पाया है। हुमायूँ कबीर ने जबसे नई पार्टी बनाई है लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि ममता को इस चुनाव में मुस्लिम मतदाता खुलकर समर्थन देने से कतराते हुए नजर आ सकते हैं।
हुमायूं कबीर ने चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए ओवैसी का समर्थन हासिल कर लिया है। बीजेपी बंगाल में ध्रुवीकरण का रास्ता ढूंढ रही है। यह कयास लगाए जा रहे हैं कि हुमायूँ कबीर बीजेपी के ध्रुवीकरण का आधार बन सकते हैं। हुमायूँ के साथ ओवैसी के बयान बीजेपी के लिए रास्ता साफ करते जाएंगे और ममता के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं।
दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने अल्पसंख्यकों के बीच विश्वास बरकरार रखने के लिए बंगाली अस्मिता और बीजेपी को बाहरी साबित करने के लिए हर तरीके से योजना बना दी है।
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तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि बीजेपी ने हुमायूं कबीर और आम आदमी उन्नयन पार्टी (एएयूपी) के साथ 1 हजार करोड़ रुपए की डील की है। इस डील का मकसद पश्चिम बंगाल की उन विधानसभा सीटों पर अल्पसंख्यक वोटों को बांटना है, जहां एएयूपी के उम्मीदवार विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं।
देश में 9 अप्रैल 2026 को असम सहित तीन राज्यों में मतदान पूर्ण हो चुका है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में नेताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। ममता बनाम मोदी के चुनाव में हुमायूँ कबीर बीजेपी को कितना फायदा पहुंचाएंगे यह चुनाव परिणाम के साथ साफ हो जाएगा।
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