

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) में सिविल सोसायटी (नागरिक समाज) के सदस्यों के साथ बातचीत की और ईरान में हाल के घटनाक्रमों में मारे गए ईरानी सर्वोच्च नेता और अन्य लोगों के लिए 'फातिहा' (मृतकों के लिए दुआ) अदा की। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, "पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर मुख्यमंत्री ने बुधवार को श्रीनगर में धार्मिक नेताओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों से बातचीत की।
उपस्थित लोगों ने स्थिति पर चिंता व्यक्त की और ईरान में हुई जानमाल की हानि पर शोक संवेदना व्यक्त की।" सीएम उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में शांति और सद्भाव बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही लोगों की भावनाओं का सम्मान करने और यह सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया कि शोक और मातम की अभिव्यक्ति शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से हो। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से कश्मीर में सिविल सोसायटी के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की यह पहली बातचीत है।
मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत में धार्मिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापार से जुड़े प्रतिनिधियों सहित नागरिक समाज के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया। सीएम ने ईरान पर हुए हमले की पहले ही निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि सत्ता परिवर्तन का अधिकार केवल ईरानी जनता के पास है, न कि बाहरी शक्तियों के पास। वह ईरान में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षित वापसी के संबंध में विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हैं। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि संघर्ष शुरू होने से पहले सीएम उमर अब्दुल्ला ने माता-पिता से अपील की थी कि वे विदेश मंत्रालय की सलाह को गंभीरता से लें और ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने से पहले अपने बच्चों को वापस बुला लें।
इस बीच घाटी में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीसरे दिन भी सख्त प्रतिबंध जारी रहे। सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय 7 मार्च तक बंद रहेंगे। इंटरनेट की गति कम कर दी गई है ताकि शरारती तत्व सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री अपलोड न कर सकें। पुलिस ने आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोप में सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद अजीम मट्टू सहित कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है।[SP]