

हरियाणा की तरफ जाने वाले रोहतक रोड पर मुण्डका मेट्रो स्टेशन है। मेट्रो स्टेशन के ठीक बाहर का भयावह दृश्य लोगों के आवागमन में बाधा बनकर खड़ा हुआ है। सड़कों पर जलभराव की समस्या ने लोगों के जीवन को प्रभावित कर रखा है। लोगों के पास शिकायतों का अम्बार है पर समस्या यह है कि आम जनता अपने निज़ी परेशानियों में तो व्यस्त है, साथ में इस तरीके की समस्या को झेल पाना उनके लिए कितना कठिन है।
बता दें कि मुण्डका मेट्रो स्टेशन (Mundka Metro Station) के दोनों तरफ़ गेट है। दोनों गेट के बाहर आसपास जलभराव और गड्ढे की वजह से आम यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आने -जाने के क्रम में लोगों को गड्ढे में गिरने का डर बना हुआ है। मेट्रो के आसपास के इलाके में नाले का काम चल रहा है। काम की वजह से यह परेशानी खड़ी हो रही है। स्थानीय लोगों से पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि नाला अभी निर्माणाधीन है, परन्तु इस कार्य में बहुत लापरवाही हो रही है और लापरवाही की वजह से इतनी सारी समस्याओं ने जन्म ले रखा है। इन समस्याओं पर नियंत्रण पाने के लिए कार्य कर रही एजेंसियां काफ़ी सुस्त हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मुण्डका मेट्रो स्टेशन (Mundka Metro Station) पर यात्रियों की भीड़ ज़्यादा बनी रहती है। साथ में आस -पास के कालोनियों के लोगों को भी आने-जाने में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन परेशानियों को लेकर दिल्ली सरकार कितनी गंभीर है,ये इसी बात से पता चलता है कि यमुना को साफ़ करने के नाम पर बनी सरकारें 10 -10 साल का समय मांग रही हैं। वो सरकार अभी की भाजपा सरकार हो या फिर आम आदमी पार्टी की सरकार हो। अगर सरकारें व्यवस्था को लेकर इतनी ही गम्भीर हैं तो जनता को इतनी सारी समस्याओं का सामना क्यों करना पड़ता है। ये सिर्फ़ एक समस्या नहीं सरकारों के नाकामियों की निशानी है।
इस समस्या को लेकर आस-पास की कालोनियों में रहने वाले लोगों को इस समस्या ने निज़ात पाने का इंतज़ार है। जनता पूछ रही है कि कब सरकार निर्माणाधीन कार्यों में तेज़ी लाएगी। इन गड्ढों के होने से बहुत सारी दुर्घटनाएं होने की संभावनाएं हैं। कुछ ही दिन बीते हैं, नोएडा (NOIDA) क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना घटित हो चुकी है और प्रशासन अभी भी सवालों के घेरे में है।
हाल ही में नोएडा 150 के पास हुए हादसे में युवराज मेहता नाम के युवक की जान चली गई। ऐसे में सवाल यह कि क्या दिल्ली सरकार भी नोएडा जैसे हादसे होने का इन्तजार कर रही है। वहां से सबक लेते हुए स्थानीय प्रशासन और दिल्ली सरकार को जिम्मेदारी पूर्वक निर्माणाधीन कार्यों में तेज़ी लाना होगा और जनता के जीवन की सुरक्षा को लेकर सचेत होना होगा। ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।
बीते वर्ष दिल्ली (Delhi) में दर्ज़ सड़क हादसों की बात की जाए तो लगभग 5,689 सड़क हादसे दिल्ली में हुए। जिनमें से 1,617 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगभग 15 % दुर्घटनाएं सिर्फ़ इसलिए होती हैं कि सड़कों का बुरा हाल है। कहीं गड्ढे हैं तो कहीं निर्माणाधीन कार्यों में लापरवाही हो रही है। प्रशासन की तरफ से जिस तरीके की सक्रियता दिखनी चाहिए वो मौके पर नज़र नहीं आती है।
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