असम चुनाव 2026: कांग्रेस की कमजोरी हुई उजागर, इस गलती के चलते कहीं गौरव गोगोई की मेहनत पर फिर ना जाए पानी

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती खुद हिमंत बिस्वा सरमा हैं, जो कभी कांग्रेस के हनुमान कहे जाते थे लेकिन 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। उनके जाने के बाद से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिरा है।
हिमंत बिस्वा सरमा और गौरव गोगोई
असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान में मुख्य मुकाबला भाजपा के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के गौरव गोगोई के बीच है। X
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असम में मतदान की तारीख 9 अप्रैल 2026 को तय हुआ है। चुनाव को लेकर सभी दलों ने अपने-अपने रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने की उम्मीद जताई जा रही है। 

एक तरफ भाजपा के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के पास पुनः सरकार बनाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ पिछले दस साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस के लिए यह चुनाव नाक का सवाल बना हुआ है। इसी बीच कांग्रेस की तरफ से कुछ ऐसे बयानबाजी हुए हैं जिनसे चुनाव में इसका प्रभाव देखने की उम्मीद जताई जा रही है।

हिमंत बनाम गोगोई की लड़ाई ! 

असम में भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूरी कमान संभाल रखी है। भाजपा के परंपरागत चुनाव प्रचार के अनुसार तीखी बयानबाजी हो रही है जिससे ध्रुवीकरण को अंजाम दिया जा सके।

कांग्रेस के तरफ से गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) ने कमान संभाल रखी है। गौरव गोगोई के पिता तरुण गोगोई लगातार 15 साल असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। गौरव गोगोई का प्रभाव असम के कुछ चिन्हित इलाकों पर बहुत जबरदस्त है। चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है। इसी बीच कांग्रेस शीर्ष आलाकमान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

टिकट बंटवारे में बहुत सारी खामियों को स्थानीय लोगों ने बताया है। ऐसा कहा जा रहा है कि बहुत सारे जमीनी नेताओं को टिकट नहीं मिला है इससे चुनावी प्रचार पर इसका असर देखने को मिल सकता है। 

डिब्रूगढ़ में कांग्रेस ने नहीं उतारा प्रत्याशी !

असम में कांग्रेस सभी सीटों पर अपने चुनावी रणनीति के मुताबिक काम कर रही है। इसी बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कांग्रेस ने डिब्रूगढ़ में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। एक समय था जब इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा होता था।

इस बार के चुनाव में कांग्रेस ने AJP के उम्मीदवार मैनाक पात्रा को अपना समर्थन दे दिया है। डिब्रूगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इसको लेकर थोड़ी नाराजगी भी देखी जा रही है। हालांकि की असम आलाकमान का कहना है कि सोच समझ कर रणनीति के तहत AJP के उम्मीदवार को समर्थन दिया गया है। 

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हिमंत से दूरी कांग्रेस को भरी पड़ा !

भाजपा के लिए ताबड़तोड़ चुनावी जनसभा कर रहे हिमंत एक समय कांग्रेस में थे। साल 2015 में कांग्रेस का साथ हेमंत ने छोड़ दिया। पिछले 15 साल से चुनाव में अव्वल रहने वाली कांग्रेस को इससे बहुत बड़ा झटका लगा था। इसके बाद असम राजनीति के कहानी में एक नया मोड़ आया और कांग्रेस को बुरी तरीके से 2016 में हार का सामना करना पड़ा।

साल 2016 में कांग्रेस को महज 29 सीट हासिल हुआ था। इसके बाद साल 2021 के चुनाव में 26 सीटों पर कांग्रेस सिमट चुकी थी। इस बार का चुनाव कांग्रेस गौरव गोगोई के भरोसे लड़ रही है। देखना यह है कि कभी कांग्रेस के हनुमान रहे हिमंत बिस्वा सरमा, जो अब भाजपा में हैं, के सामने गौरव गोगोई की रणनीति कांग्रेस को जीत दिलाने में सफल होती है या भाजपा का कमल असम की वादियों में फिर से खिलेगा। 

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