

असम के बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) में स्थित तामुलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। भाजपा उम्मीदवार बिस्वजीत दैमारी ने यूपीपीएल के प्रत्याशी को 26,743 वोटों से हराया है। उन्हें कुल 89,308 मत प्राप्त हुए।
बता दें कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित यह सीट न केवल स्थानीय राजनीति का अहम केंद्र रही है, बल्कि यहां का चुनावी इतिहास भी बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित रहा है। 1978 में अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2021 का उपचुनाव भी शामिल है।
तामुलपुर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि यहां मतदाताओं ने किसी एक दल को स्थायी समर्थन नहीं दिया। स्वतंत्र उम्मीदवारों ने यहां सबसे अधिक पांच बार जीत दर्ज की है, जो इस बात का संकेत है कि यहां के मतदाता दल से अधिक उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और स्थानीय पकड़ को महत्व देते हैं। बोडोलैंड की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने वाली पार्टियां बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने भी दो-दो बार जीत हासिल की है। वहीं राष्ट्रीय दलों की उपस्थिति यहां सीमित रही है। जनता पार्टी ने 1978 में और कांग्रेस ने 1983 में जीत दर्ज की थी। इस सीट पर भाजपा ने 2026 में पहली बार जीत दर्ज की है।
बीते दशक में बीपीएफ के नेता इमैनुएल मोशाहारी का प्रभाव देखने को मिला, जिन्होंने 2011 और 2016 में लगातार जीत हासिल की। 2011 में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को 4,608 वोटों से हराया, जबकि 2016 में जीत का अंतर बढ़कर लगभग 20 हजार तक पहुंच गया। लेकिन 2021 में राजनीतिक समीकरण बदल गए, जब यूपीपीएल केलेहो राम बोरो ने बीपीएफ उम्मीदवार को 32,183 वोटों से हराकर सीट पर कब्जा जमाया। हालांकि, कोविड-19 के दौरान उनके निधन के कारण उपचुनाव हुआ, जिसमें यूपीपीएल की जोलेन डाइमरी ने भारी मतों से जीत दर्ज की।
लोकसभा चुनावों में भी तामुलपुर का मतदान पैटर्न अलग रहा है। यहां मतदाता पार्टी की बजाय स्थानीय नेताओं पर अधिक भरोसा करते दिखे हैं। 2014 और 2019 में निर्दलीय उम्मीदवार नबा कुमार सरानिया ने प्रमुख दलों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की, जबकि 2024 में भाजपा ने अपनी उपस्थिति मजबूत करते हुए बीपीएफ पर बढ़त बनाई।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या में मामूली गिरावट देखी गई है। 2026 में कुल 2,13,846 मतदाता पंजीकृत हैं, जो 2024 के आंकड़े से थोड़ा कम है। इसके बावजूद मतदान प्रतिशत लगातार मजबूत बना हुआ है, जो 2011 में 76.86 प्रतिशत से लेकर 2024 में 77.41 प्रतिशत तक रहा।
जनसांख्यिकीय दृष्टि से बात की जाए तो यहां अनुसूचित जनजातियों का वर्चस्व रहा है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 28.60 प्रतिशत हैं। अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 12.06 प्रतिशत है। यह सीट पूरी तरह ग्रामीण है, जहां शहरी मतदाताओं की अनुपस्थिति है। कृषि यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसमें धान प्रमुख फसल है। इसके अलावा जूट, सब्जियां और मधुमक्खी पालन भी स्थानीय आजीविका के प्रमुख स्रोत हैं। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)