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भारत में घोटाला करना अब आम बात हो चुकी है। भारत की आज़ादी को 78 साल हो चुके हैं और तब से लेकर अब तक घोटालों का सिलसिला जारी है। 2G घोटाला, कोयला घोटाला, बोफोर्स घोटाला इत्यादि। लिस्ट निकालने जाएंगे, तो ये काफी लंबी हो जाएगी। अब इसी बीच एक खबर सामने आई है, जिसमे यह पता चला कि घोटाले की गाज अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार पर गिरी है। क्या है अरुणाचल का 1270 करोड़ का महाघोटाला, आइये जानते हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार यानी 6 अप्रैल 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अरुणाचल प्रदेश में सरकारी ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। यह मामला खासतौर पर उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े लोगों को ठेके दिए जाने की बात कही गई है।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया ने दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि सीबीआई दो हफ्तों के अंदर प्रारंभिक जांच दर्ज करे और कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करे।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 के बीच दिए गए सरकारी ठेकों, वर्क ऑर्डर और उनके क्रियान्वयन तक रहेगा। हालांकि, अगर जरूरत पड़ी तो सीबीआई इस समय सीमा के बाहर के लेन-देन को भी देख सकती है, खासकर यह समझने के लिए कि असली लाभार्थी कौन हैं, किन-किन लोगों के बीच संबंध हैं और पैसे का प्रवाह कैसे हुआ।
यह मामला दो गैर-सरकारी संगठनों सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के जरिए सामने आया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि करीब 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके ऐसे लोगों को दिए गए, जो मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े हैं।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि कई ठेके नियमों को दरकिनार करके दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में खुले टेंडर की प्रक्रिया को अपनाया ही नहीं गया, जो कि पारदर्शिता के खिलाफ है।
वहीं, कोर्ट ने CBI को यह भी निर्देश दिया है कि वह टेंडर प्रक्रिया, मंजूरी देने के तरीके, ओपन टेंडर से छूट देने के कारण और कानूनी नियमों के पालन की पूरी जांच करे। साथ ही भुगतान, वर्क ऑर्डर और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से जुड़े सभी दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI को 16 हफ्तों के भीतर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि क्या इस मामले में पूरी तरह से स्वतंत्र और विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं।
आपको बता दें कि कोर्ट ने इसमें राज्य सरकार को भी जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि एक हफ्ते के भीतर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए, जो सीबीआई के साथ समन्वय करेगा। साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज जैसे टेंडर पेपर, मंजूरी से जुड़े रिकॉर्ड, एग्रीमेंट, बिल और ई-प्रोक्योरमेंट डेटा चार हफ्तों के भीतर सीबीआई को सौंपने होंगे।
सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि इस मामले से जुड़े किसी भी तरह के दस्तावेज, चाहे वे कागजी हों या डिजिटल, उन्हें न तो नष्ट किया जाए और न ही उनमें कोई बदलाव किया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके ये निर्देश केवल यह तय करने के लिए हैं कि स्वतंत्र जांच की जरूरत है या नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने किसी भी आरोप को सही या गलत ठहरा दिया है और न ही यह भविष्य की कार्यवाही में किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करेगा।
विदित हो कि पिछले साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को सभी ठेकों पर विस्तृत हलफनामा देने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से रिपोर्ट भी मांगी थी। बाद में दिसंबर 2025 में जांच का दायरा बढ़ाकर पूरे राज्य तक कर दिया गया, यह मानते हुए कि मामला सिर्फ तवांग तक सीमित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले पर मुख्यमंत्री पेमा खांडू का बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कराई जा रही CBI जांच का स्वागत किया और कहा कि यह जांच 'साफगोई साबित करने' और प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगी। उन्होंने बयान में कहा, 'हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। सच्चाई सामने आएगी।'
वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस ने सीएम के इस्तीफे की मांग कर दी है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिराम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लेकर राज्य सरकार की निंदा की और आरोप लगाया कि 1270 करोड़ रुपए से अधिक के ठेकों में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और शक्ति का दुरुपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि यह जनता के विश्वास की घोर धोखाधड़ी और पारदर्शिता व जवाबदेही का स्पष्ट उल्लंघन है। जांच के परिणाम आने तक मुख्यमंत्री को पद छोड़ देना चाहिए।