क्यों किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत? जाने इस से जुड़ी कुछ खास बातें

अहोई अष्टमी पर इस बार स्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है ऐसी मान्यता है कि शुभ योग में व्रत करने से महिलाओं को व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है
अहोई अष्टमी की तस्वीर
अहोई अष्टमी:- 5 नवंबर 2023 को अहोई अष्टमी का शुभ पर्व मनाया जा रहा है। [Wikimedia Commons]
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5 नवंबर 2023 को अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) का शुभ पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन अहोई माता की पूजा अर्चना की जाती है। खासकर इस व्रत को करने से संतान के अच्छे जीवन सुरक्षा लंबी उम्र और आरोग्य के लिए कामना की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन 10 तरह के कार्य करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। तो चलिए अहोई अष्टमी से जुड़ी कुछ खास बातें आपको बताते हैं और जानते हैं कि इस व्रत को करने के नियम क्या है।

क्यों किया जाता है अहोई अष्टमी का व्रत

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) कार्तिक मास की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है। करवा चौथ पर पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखने वाली महिलाएं अहोई अष्टमी को संतान की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। और अहोई माता की पूजा की जाती है। अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद रखा जाता है इसलिए 5 नवंबर को माताएं इस व्रत को करेंगी और तारों का उदय होने के बाद उन्हें अर्घ देकर व्रत तोड़ेंगी। दीपावली की पूजा से 8 दिन पड़ने वाला यह व्रत उत्तर भारत की महिलाएं सबसे ज्यादा करती हैं।

चित्र में अहोई अष्टमी को चित्रों के माध्यम से समझाया गया है।
5 नवंबर को माताएं इस व्रत को करेंगी और तारों का उदय होने के बाद उन्हें अर्घ देकर व्रत तोड़ेंगी। [Wikimedia Commons]

इस दिन बच्चों की अच्छी सेहत, सुंदर भविष्य, और दीर्घायु के लिए माताएं निर्जला उपवास करती हैं।अहोई अष्टमी पर इस बार स्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है ऐसी मान्यता है कि शुभ योग में व्रत करने से महिलाओं को व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है और उनके बच्चे सदैव सुखी संपन्न और दीर्घायु होते हैं बच्चों की सभी इच्छाएं अहोई माता पूर्ण करती हैं और उन्हें एक सफल करियर की प्राप्ति होती है।

कुछ बातों का रखें खयाल

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता से पहले गणेश भगवान की पूजा जरूर करें क्योंकि गणेश भगवान प्रथम पूजनीय है। अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला व्रत होता है निर्जला व्रत रखने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है और उसे समृद्धि प्राप्त होती है। अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखे बिना तारों को अर्घ दिए बिना जल का या भोजन का सेवन न करें। ऐसा कहा जाता है कि अहोई अष्टमी के दिन व्रत कथा सुनते समय साथ तरह के अनाज अपने हाथों में रखे जाते हैं पूजा के बाद समाज को किसी गाय को खिलाया जाता है ऐसा करने से अहोई माता काफी प्रसन्न होते हैं।

एक महिला अहोई अष्टमी की पूजा करती हुई
अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला व्रत होता है निर्जला व्रत रखने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है[Wikimedia Commons]

अहोई अष्टमी के दिन ऐसी सिफारिश की जाती है कि जिन बच्चों के लिए माताएं यह व्रत रखते हैं उन बच्चों को अपने पास ही बिठा कर रखें अहोई माता को भोग लगाने के बाद वह प्रसाद अपने बच्चों को जरूर खिलाएं। अहोई अष्टमी के दिन पूजन के बाद किसी ब्राह्मण या गाय को खाना खिलाना शुभ माना जाता है क्योंकि उनका आशीर्वाद आपके और आपके परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी को हाथ नहीं लगना चाहिए ना ही कोई पौधा या फिर खुरपी का काम किया जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन किसी निर्धन व्यक्ति को दान देने से उस व्रत के पूर्ण फल जरुर मिलते हैं।

अहोई अष्टमी की तस्वीर
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