राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, महासचिव चंपत राय पर पुलिस का कड़ा शिकंजा!

अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) में रामलला के चरणों में अर्पित किए जाने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय धांधली के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
महासचिव चंपत राय (Champat Rai)
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अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) में रामलला के चरणों में अर्पित किए जाने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय धांधली के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) की कानूनी अड़चनें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों और पुलिस ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है।

जांच से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यदि चंपत राय (Champat Rai) इस मामले में पुलिस का पूर्ण सहयोग करते हुए सरकारी गवाह (State Witness) बनने को तैयार नहीं होते, तो पुलिस उन्हें इस वित्तीय घोटाले में आपराधिक लापरवाही, निगरानी में विफलता और साक्ष्य छिपाने के आरोप में सह-आरोपी (Co-accused) बनाने से भी पीछे नहीं हटेगी।

क्या है चढ़ावा चोरी का मामला और कैसे हुआ खुलासा?

अयोध्या के राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) में चढ़ावा चोरी का मामला तब गरमाया जब जून 2026 की शुरुआत में गिनती में वित्तीय अनियमितता, कर्मचारियों द्वारा जेब-मोजों में कैश छिपाने और सीसीटीवी से छेड़छाड़ के आरोप लगे। सार्वजनिक आक्रोश के बाद यूपी सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT (विशेष जांच टीम) ने जब जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

SIT की जांच और रिपोर्ट
SIT की जांच और रिपोर्टX

SIT की जांच और रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से 40 दिनों के भीतर लगभग 70 बार चोरी के मामले सामने आए। इस मामले में मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला (Avinash Shukla) सहित कई कर्मचारियों (जैसे अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा आदि) की भूमिका तय की गई। SIT ने छापेमारी के दौरान लाखों रुपये कैश, ज्वेलरी और संदिग्ध निवेश पत्र बरामद किए तथा 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

SIT की रिपोर्ट में प्रशासनिक और निगरानी स्तर पर भारी लापरवाही पाई गई। भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद, बिना वेरिफिकेशन और योग्यता के आउटसोर्स्ड स्टाफ की तैनाती, और सीसीटीवी कैमरों की कमजोर मॉनिटरिंग को इसका मुख्य कारण माना गया। हालांकि, जांच में मुख्य आपराधिक संलिप्तता निचले स्तर के काउंटिंग स्टाफ तक ही सीमित मिली, लेकिन ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय (General Secretary Champat Rai) समेत शीर्ष प्रबंधन को प्रशासनिक नाकामी और ढिलाई के लिए जिम्मेदार ठहराया गया, जिसके चलते दो अधिकारियों का इस्तीफा भी हुआ। अंततः SIT ने बिना पॉकेट वाली पोशाक अनिवार्य करने, पेशेवर संस्थाओं से स्टाफ रखने और मेटल डिटेक्टर-सीसीटीवी सुरक्षा को कड़ा करने जैसे व्यापक सुधारों की सिफारिश की।

कौन हैं चंपत राय और ट्रस्ट में क्या है उनकी भूमिका?

चंपत राय (Champat Rai)
चंपत राय (Champat Rai) X

चंपत राय (Champat Rai) भारत के एक सामाजिक-धार्मिक नेता हैं, जो वर्तमान में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव (General Secretary) का पद संभाल रहे थें। इसके अलावा वे 1980 और 1990 के दशक से ही अयोध्या आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान कानूनी, प्रशासनिक, लॉजिस्टिक्स और मैदानी रणनीतियों को संभालने में उनकी केंद्रीय भूमिका रही है। साथ ही चंपत राय (Champat Rai) लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के समर्पित प्रचारक रहे हैं और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। आपको बता दें कि वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार द्वारा गठित 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' में उन्हें महासचिव नियुक्त किया गया था। मंदिर निर्माण के फैसलों, वित्तीय प्रबंधन, प्राप्त दान राशि के आवंटन और मंदिर की दैनिक प्रशासनिक व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है।

ट्रस्ट की प्रशासनिक लापरवाही और पुलिस का अल्टीमेटम

जांच अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि जिस मंदिर परिसर में बहुस्तरीय सुरक्षा बल तैनात हैं और हर कोने पर अत्याधुनिक कैमरे लगे हैं, वहां इतने बड़े पैमाने पर चढ़ावे की चोरी बिना प्रशासनिक ढिलाई, कमजोर मॉनिटरिंग और शीर्ष स्तर की अनदेखी के संभव नहीं हो सकती।

कानूनी विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रस्ट के मुख्य प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते चंपत राय की सीधी जवाबदेही बनती है। यदि वे जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत होकर गवाही देते हैं और इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधारों को बेनकाब करने में मदद करते हैं, तो उन्हें कानूनी राहत (सरकारी गवाह) दी जा सकती है। लेकिन, यदि वे पूछताछ में टालमटोल का रवैया अपनाते हैं या जानकारी छिपाते हैं, तो पुलिस उनके खिलाफ आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) और दोषियों को संरक्षण देने की धाराओं के तहत प्राथमिकी में सह-आरोपी के रूप में नाम दर्ज करेगी। [SP]

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