

उषा राम को फिश सैंडविच, फ्राइज और ड्रिंक लेने के आरोप में चोरी बताकर नौकरी से निकाल दिया गया, जबकि उन्होंने खाना छिपाया भी नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया ने माना कि चोरी जानबूझकर नहीं की गई थी और उन्हें गलत तरीके से निकाला गया।
अदालत ने उषा राम को सैलरी के नुकसान और मानसिक पीड़ा के लिए कुल 46,000 डॉलर देने का आदेश दिया।
कहते हैं आप जीवन में कितनी भी ईमानदारी दिखा लीजिए लेकिन आपके दामन में लगा एक दाग आपकी सारी ईमानदारी को ध्वस्त करके रख देगा और इस दाग को साफ़ करने में आपकी पूरी उम्र भी कम पड़ सकती है, क्योंकि जीवन लीला समाप्त होने के बाद भी वो दाग आपके ऊपर रह ही जाएगा।
कुछ ऐसी ही कहानी है उषा राम की, जिन्होंने बर्गर किंग (Burger King) के अनेकों स्थान के आउटलेट (Outlet) पर 24 साल काम किया, लेकिन उनके करियर पर लगे एक दाग ने उन्हें अदालत की ओर जाने को मजबूर कर दिया। क्या है उषा राम (Usha Ram) के इंसाफ की कहानी, आइये समझते हैं।
भारतीय मूल की फिजी (Fiji) महिला उषा राम (Usha Ram) जो बाद में कनाडा शिफ्ट हो गई थीं। उन्होंने फास्ट फूड चेन में 24 साल तक काम किया था, जिनपर कंपनी ने चोरी का इल्जाम लगा दिया। चोरी भी कैसी? बस थोड़ा सा खाना। दरअसल, कहानी कुछ ऐसी है कि 27 दिसंबर 2013 को अपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद उषा राम को याद आया कि वो अपना पर्स घर ही भूल आई हैं।
इसके बाद उन्होंने अपने जनरल मैनेजर तैय्यबा सलमान से पूछा कि क्या वे थोड़ा खाना ले सकती हैं। फिर सलमान ने कथित रूप से अनुमति दे दी, तो राम ने एक फिश सैंडविच, जो मीडियम साइज (Medium Size) का होता है, उसके साथ फ्राइज और एक ड्रिंक ले ली। वो घर गईं लेकिन तीन दिन बाद काम पर लौटीं।
वापस आते ही उन्हें जनरल मैनेजर तैय्यबा सलमान और रेस्टोरेंट के सह-मालिक के साथ एक मीटिंग के लिए उन्हें बुलाया गया। मीटिंग में उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खाना चुराया है? उषा राम को कुछ समझ नहीं आया लेकिन बाद में उन्होंने पैसे देने की बात कही, पर उन्हें उस दिन घर जाने के लिए कह दिया गया।
इसके थोड़े समय बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उषा राम ने कड़ा कदम उठाते हुए अदालत में मुकदमा दायर किया कि उन्हें नौकरी से निकालने का कोई उचित कारण नहीं था और उन्होंने जनरल मैनेजर तैय्यबा सलमान और रेस्टोरेंट के सह-मालिक पर मानसिक तनाव पहुंचाने का आरोप लगाया।
मामला जब कोर्ट में पहुंचा, तो जनरल मैनेजर तैय्यबा सलमान और रेस्टोरेंट के सह-मालिक जनीफ मोहम्मद ने भी अपना पक्ष अदालत के सामने रखा। रेस्टोरेंट के सह-मालिक जनीफ मोहम्मद का कहना था कि वो उषा राम को नौकरी से निकालने के अपने अधिकार में थे क्योंकि उन्हें चोरी करते हुए पकड़ा गया था।
वहीं, तैय्यबा सलमान ने कोर्ट को बताया कि राम ने केवल सैंडविच के लिए पूछा था, फ्राइज और ड्रिंक के लिए नहीं। सलमान का कहना है कि वो उस समय ग्राहक के साथ व्यस्त थे। हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि उषा राम ने खाना लेते समय उसे छिपाने की कोई कोशिश नहीं की।
बता दें कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ ब्रिटिश कोलबिंया में चल रहा था। वहां के जज ने अपना फैसला उषा राम के पक्ष में सुनाया, जिन्हें लगभग पचास सेंट के खाने को घर ले जाने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया था। उन्हें नौकरी से निकालने के मुकदमे में 46,000 डॉलर दिए गए। इसमें 21,000 डॉलर सैलरी के नुकसान के लिए और गलत तरीके से नौकरी से निकालने के लिए 25,000 डॉलर अलग से देने का फैसला सुनाया।
जब उन्हें नौकरी से निकाला गया था, तब उषा उम्र 55 वर्ष थी। उषा वहां कुक के रूप में काफी कम वेतन पर काम कर रही थीं। जनवरी 2014 में जब उन्हें नौकरी से निकाला गया, उस समय वे सालाना 21,000 डॉलर कमा रही थीं और फुल-टाइम काम कर रही थीं जबकि उनके पति शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं। इसके साथ ही वो मानसिक रूप से दिव्यांग बेटी की भी देखभाल करती थीं। अपने घर में कमाने वाली वो अकेली सदस्य थीं। अदालत के कागजात के मुताबिक उनकी शिक्षा कम है और उन्हें अंग्रेजी बोलने में दिक्कत होती है।
सुप्रीम कोर्ट की जज लिसा वॉरेन को फैसले के दौरान यह भी आभाष हुआ कि बर्गर किंग में कर्मचारियों के लिए फिश सैंडविच की कीमत में छूट मिलती है, इसलिए जनीफ मोहम्मद को जो नुकसान हुआ, वो लगभग 50 सेंट के बराबर था। इन सारी बातों पर गौर करते हुए जज ने उषा राम के पक्ष में अपना फैसला सुनिया। इसके साथ ही इस बात के सबूत तक नहीं थे कि उन्होंने चोरी सोच समझकर की। जज वॉरेन ने यह भी कहा कि सिर्फ एक लिखित चेतावनी देकर रेस्टोरेंट की चोरी के खिलाफ सख्त नियम को कम कड़े कदमों से भी लागू किया जा सकता था।
अंत में जज वॉरेन ने उषा राम के फैसले में यह भी कहा कि उन्होंने रेस्टोरेंट से निकलते समय खाना छिपाया नहीं था और पहले कभी उन्होंने चोरी नहीं की थी।