जीवनभर लिव इन रहे थे राम मनोहर लोहिया, समाजवादी नेता की दिलचस्प लव स्टोरी

एक कहानी से हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं, जो राजनीति से जुड़ी है। ये कहानी एक समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) की है जिनकी लव स्टोरी काफी दिलचस्प है।
बाईं ओर समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया, दूसरी ओर उनके साथ बैठीं रमा मित्रा जो साड़ी में दिखाई दे रही हैं।
राम मनोहर लोहिया एक समाजवादी नेता थे लेकिन उनकी अपनी लव लाइफ भी थी जहाँ वो रमा मित्रा के साथं पूरी ज़िन्दगी लिव इन रहे थे X
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Summary
  • राम मनोहर लोहिया आजीवन अविवाहित रहे, लेकिन रोमा मित्रा के साथ बिना विवाह के जीवनभर साथ रहे, उस दौर में यह एक साहसिक और असामान्य संबंध माना जाता था।

  • यूरोप प्रवास के दौरान मुलाकात के बाद रोमा मित्रा स्वतंत्रता आंदोलन और लोहिया के राजनीतिक जीवन में उनके साथ रहीं; दोनों के बीच वैचारिक समानता और गहरा बौद्धिक संबंध था।

  • रोमा दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन करती रहीं, दोनों पत्रों के जरिए संवाद करते थे; 1967 में लोहिया के निधन के बाद रोमा ने उनके पत्रों का संग्रह प्रकाशित किया और 1985 में उनका निधन हुआ।

प्रसिद्ध कवि डॉ कुमार विश्वास की एक प्रेम पर एक कविता है, "मैं अपने गीत-ग़ज़लों से उसे पैग़ाम करता हूँ,उसी की दी हुई दौलत, उसी के नाम करता हूँ।" प्रेम एक ऐसी चीज है, जो युगों-युगों की कहानी है। राधा-कृष्ण, राम-सीता से लेकर लैला मजनू तक के प्रेम के चर्चे दुनिया में प्रसिद्ध हैं। हालांकि, कई ऐसी प्रेम कहानियां भी हैं, जो इतिहास के पन्नों में दफन हो जाती हैं लेकिन उन्हें याद करने वाला कोई नहीं होता।

ऐसी ही एक कहानी से हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं, जो राजनीति से जुड़ी है। ये कहानी एक समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) की है जिनकी लव स्टोरी काफी दिलचस्प है।

लोहिया ने लिव इन में बिताया जीवन

समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) आजीवन अविवाहित रहे लेकिन उन्होंने अपनी महिला मित्र रमा मित्रा से अटूट प्यार किया। प्यार ऐसा कि बिना शादी के ही वो उनके साथ जीवन भर लिव इन में रहे। ये घटना हम 90 या 80 के दशक की नहीं बता रहे हैं बल्कि ये 50 और 60 के दशक की घटना है। वो भी ऐसे दौर में जब कोई लिव इन रिलेशनशिप के बारे में सोच भी नहीं सकता था। ये वो दौर था जब बिना शादी किये साथ में रहना आपत्तिजनक माना जाता था।

बता दें कि राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) का मानना था कि स्त्री पुरुष के रिश्तों में सब जायज है, लेकिन सब सहमति से होनी चाहिए। इसमें धोखा नहीं होना चाहिए। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता हैं, लीडर वसंत साठे, उन्होंने लोहिया को याद करते हुए कहा था कि उन्हें कई बार अन्य महिलाओं के साथ देखा गया था और वो उनके प्रति ईमानदार थे।

अपने संबंधों को लेकर लोहिया ने कभी झूठ नहीं बोला। यही कारण रहा कि उनका जीवन कभी विवादों में नहीं रहा। वहीं, रमा को भी लोहिया के अन्य महिलाओं से दोस्ती रखने से कभी कोई आपत्ति नहीं हुई थी। वो खुद प्रखर और बौद्धिक थीं।

कैसे हुई रोमा से मुलाकात?

इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) और रमा मित्रा की मुलाकात कैसे हुई थी लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों यूरोप प्रवास के दौरान मिले थे। रमा बंगाल के ऐसे परिवार से ताल्लुकात रखती थीं, जो वामपंथ को सपोर्ट करता था। उनके बड़े भाई खुद एक वामपंथी नेता थे।

लोहिया 30 के दशक में जर्मनी के हमबोल्ट विश्वविद्यालय से मास्टर्स और पीएचडी करने गए थे, वहीं, वो रोमा से मिले। फिर 1933 में लोहिया भारत लौटे तो गांधीजी के साथ आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। इस दौरान रमा भी उनके साथ थीं। यही वो क्षण था, जब दोनों करीब आए। 1942 में जब 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन के तहत लोहिया की गिरफ्तारी हुई, तब रोमा भी उनके साथ थी।

सांसद आवास में साथ रहती थीं रोमा

राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) पहली बार 1963 में लोकसभा के सदस्य बने थे। उन्हें गुरुद्वारा रकाबगंज के पास सांसदों का सरकारी आवास मिला था और खास बात यह थी कि रमा भी उसी आवास में उनके साथ रहती थीं। लोहिया पूरी ज़िंदगी रोमा के साथ रहे, उनके पति की तरह। डॉ लोहिया के कई किस्से भी चलते थे कि उनके अन्य महिलाओं के साथ सम्बन्ध थे लेकिन रमा ने कभी इसकी परवाह तक नहीं की।

बता दें कि रमा उस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज मिरांडा हाउस में लेक्चरर थीं। उन्होंने करीब 1949 से 1979 तक यूनिवर्सिटी में इतिहास पढ़ाया। रमा छात्राओं के बीच काफी लोकप्रिय भी थी। हालांकि, राजनीतिक और समाजितक जीवन के चलते लोहिया अक्सर रमा मित्रा से दूर भी रहते थे और इस दौरान दोनों खतों के जरिये एक दूसरे से संवाद करते थे। लोहिया खत में रमा को इला, इलू और इलुरानी लिखा करते थे।

कैसे हुआ दोनों का निधन?

राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) का जन्म 23 मार्च 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था जबकि निधन 12 अक्टूबर 1967 को नई दिल्ली में हुआ मृत्यु के समय उनकी आयु मात्र 57 वर्ष थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोहिया को प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) के बढ़ जाने की समस्या थी।

30 सितंबर 1967 को दिल्ली के विलिंगडन अस्पताल (जो अब राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल है) में उनका ऑपरेशन भी हुआ था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान एक टांका ठीक से नहीं लगाया था, जिससे खून का आंतरिक रिसाव बढ़ गया था। साथ ही उन्हें शुगर की भी बीमारी थी। कहा जाता है कि दवा का ठीक से असर ना होने के कारण उनकी मृत्यु हुई।

वहीं, राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia) के निधन के 18 साल के बाद रमा मित्रा ने दुनिया को अलविदा कहा। अपनी मृत्यु से दो साल पहले, 1983 में उन्होंने डॉ. लोहिया द्वारा उन्हें लिखे गए खतों का एक संग्रह 'Lohia through Letters' शीर्षक से प्रकाशित किया था। रमा मित्रा का निधन 1985 में हुआ था।

बाईं ओर समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया, दूसरी ओर उनके साथ बैठीं रमा मित्रा जो साड़ी में दिखाई दे रही हैं।
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