

मटुकनाथ चौधरी को अपनी छात्रा जूली से प्रेम हुआ और दोनों का रिश्ता पूरे देश में चर्चा का विषय बना।
पत्नी के विरोध और कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें पत्नी को गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया।
जूली के विदेश चले जाने के बाद दोनों अलग हो गए और प्रोफेसर अब अकेले जीवन बिता रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक के क्षेत्र में अगर आप पढ़ाई करेंगे, तो आपको एक चीज समझ आएगा कि इंसान का दिमाग हर पल प्यार ढूढंता है और वो चाहे स्त्री हो या पुरुष। प्यार एक ऐसी चीज है, जो उम्र नहीं देखती है, किसी से भी हो जाता है। क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर का ही उदहारण ले लीजिये, उनकी पत्नी अंजलि उनसे 6 साल बड़ी हैं। तो स्वाभाविक है, प्यार की कोई सीमा नहीं है।
आज हम आपको एक ऐसी ही लव स्टोरी का किस्सा बताएंगे, जो बिहार से जुड़ा है, जहाँ पटना यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर को अपनी 30 साल छोटी स्टूडेंट से प्रेम हो गया। दोनों ने कई पल साथ भी बताए लेकिन एक समय ऐसा आया, जब दोनों अलग हो गए। पटना यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तो अब तन्हाइयों में ज़िंदगी काट रहे हैं। क्या है पूरा मामला, आइये समझते हैं।
ये कहानी बिहार के पटना यूनिवर्सिटी की है, जहाँ हिंदी के एक प्रोफेसर थे, नाम है उनका मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary)। वो बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं। साल 2006 में हिंदी के प्रोफेसर को 30 साल छोटी स्टूडेंट जूली से प्यार हो गया था। दोनों 2007 से 2014 तक लिव इन रिलेशनशिप में रहे।
मीडिया से बात करते हुए मटुकनाथ ने एक बार कहा था कि उन्हें इस फैसले का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने हंसकर बताया कि ये सौभाग्य की बात है कि उनके और जूली के प्रेम के रिश्ते की बात दूर-दूर तक पहुँची।
साल 2004 का जिक्र करते हुए मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) ने बताया था कि पहली बार वो 2004 में जूली से मिले थे। वो काले कपड़ों में उनकी क्लास में करीब 7 मिनट की देरी से आइए थी। पहली नज़र में ही जूली उन्हें पसंद आ गई थी लेकिन उन्हें देर से आने वाले स्टूडेंट पसंद नहीं थे, तो उन्होंने जूली को डांटा और कहा कि अगर लेट आना है तो उनकी क्लास छोड़ दें।
हालांकि, क्लास के अन्य विद्यार्थियों की तुलना में जूली पढ़ाई में काफी होशियार और तेज थी, जिसके बाद दोनों की नजदीकियां बढ़नी शुरू हो गई। मटुकनाथ यह भी कहते हैं कि वो जूली के बोलने के तरीके की आलोचना बहुत करते थे क्योंकि उसकी भाषा 'उल जुलूल' थी।
वैसे, कहते हैं ना कि प्रेम छिपाए नहीं छिपता है, ये सबके सामने आ ही जाता है। मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) के साथ ही ऐसा हुआ। इस किस्से पर बात करते हुए हिंदी के प्रोफेसर ने बताया कि जब जूली से उनकी मुलाकात हुई, तो 6 महीने के भीतर ही महिला ने उन्हें प्रोपोज कर दिया। दोनों काफी मिलने लगे और जूली से बात करने के लिए ही उन्होंने अपना पहला मोबाइल फोन खरीदा।
मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) यह भी कहते हैं कि जब वो जूली से कॉलेज के बाहर मिलते थे, तो उन्हें बड़ा अजीब लगता था क्योंकि वो उम्रदराज थे और जूली युवा, जिससे उन्हें असहज महसूस होता था। पहली बार उन्हें यह एहसाह हुआ कि पटना में प्रेमियों के लिए एकांत की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके बाद जूली उनके घर भी आने लगी, जिससे उनके रिश्ते के बारे में पत्नी आभा और बेटे को उनकी करतूत के बारे में पता चला। पत्नी आभा का यह भी कहना है कि जूली से पहले भी उनके प्रेम संबंध रहे थे और विरोध करने पर वे गुस्से में हिंसक हो जाते थे।
हिंदी के प्रोफेसर का यह भी कहना है कि उनकी शादी भले ही 1978 में हुई हो, लेकिन 2 साल के बाद ही उन्हें जीवन में अधूरापन लगने लगा था। इसलिए उन्होंने फैसला किया था कि वो दूसरी स्त्री की ओर जाएंगे। मटुकनाथ ने कहा कहा कि जूली से पहले भी उन्हें 1981 में एक छात्रा से और फिर 1994 में एक महिला से प्रेम हुआ था। 1994 में जब उनका ब्रेकअप हुआ, तो वो मानसिक रूप से काफी परेशान थे।
मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) की हरकतों से उनकी पत्नी आभा काफी परेशान हो गई थीं। 2007 से ही वो न्याय के लिए कोर्ट के चक्कर लगाती रहीं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कोर्ट-कचहरी का मामला उन्हें समझ नहीं आ रहा था। इसके लिए उन्होंने 53 साल की उम्र में कानून की पढ़ाई की। आभा का कहना है कि लॉ ग्रेजुएट होने के बाद वो अपने मामले को बेहतर तरीके से समझ पाईं।
17 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी को यह आदेश दिया कि वो अपने वेतन का एक तिहाई हिस्सा अपनी पत्नी आभा चौधरी को गुज़ारा भत्ता के रूप में देंगे। करीब 12 साल लड़ाई लड़ने के बाद आभा चौधरी को इन्साफ मिला। इन्साफ मिलने के बाद मटुकनाथ की पत्नी ने कहा था कि उन्हें जो भी पैसे मिलेंगे, वो इसका इस्तेमाल वैसी औरतों के लिए करेंगी, जो अपने पति से परेशान हैं।
आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) और जूली का ब्रेकअप हो चुका है। दोनों अब अलग रहते हैं। हिंदी के प्रोफेसर तन्हाइयों में ज़िन्दगी काट रहे हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि उन्हें जूली की बहुत याद आती है लेकिन प्रेम सिर्फ स्त्री से हो ये जरूरी नहीं है। अब वो प्रकृति से प्यार करते हैं। उन्हें अकेले रहने की अब आदत भी हो चुकी है।
जूली को याद करते हुए मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) ने यह भी बताया था कि उसे मेरी ईमानदारी और विचार भा गए थे लेकिन उसे उच्चतर (High Level) सुख चाहिए था, उसे लगता था कि ससे भी ऊपर उठकर प्यार हो सकता है, इसलिए वो मुझे छोड़कर 2014 में वेस्टइंडीज चली गई। 2020 में जब जूली बीमार पड़ी थी, तब वो वेस्टइंडीज जूली से मिलने गए थे और उसे वापस लाना चाहते थे लेकिन उसने आने से इनकार कर दिया।
मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) की यह इच्छा है कि वो जूली को वापस भारत लाएं। प्रोफेसर के मुताबिक दोनों का प्यार अभी भी चल रहा है, बस आपसी सहमति से उन्होंने अलग रहने का निर्णय किया है। प्रेम की प्यास तो जीवनभर उनके भीतर रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जूली की बहुत याद आती है। मटुकनाथ चौधरी (Matuknath Chaudhary) का मानना है कि आप जीवन में शादी करें या ना करें, लेकिन प्रेम जरूर करें क्योंकि शादी एक बंधन है जबकि प्रेम आज़ादी की निशानी है।