मोदी सरकार ने देश की जनता से बोला सबसे बड़ा झूठ! इस वजह से 2027 में भी भारत नहीं बनेगा 5 ट्रिलियन वाली इकोनॉमी

IMF की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत चौथे स्थान से खिसककर छठे स्थान पर आ गया है। ब्रिटेन और जापान ने भारत को पीछे छोड़ दिया है, जिसका मुख्य कारण ब्रिटिश पाउंड की मजबूती और डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है।
मोदी और अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 में 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा था। उस समय भारत 2.7 ट्रिलियन डॉलर पर था। आज 2026 में, भारत इस लक्ष्य से पीछे है और समय सीमा को बढ़ाकर 2027 कर दिया गया है।AI Generated
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India 5 Trillion Economy 2027 : नरेंद्र मोदी साल 2014 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। मोदी ने देश की जनता से यह वादा किया था कि भारत को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाया जाएगा। इसके बाद देश के भीतर जितने राज्यों में चुनाव हुए हर चुनाव में भाजपा को इस नारे का फायदा मिला। प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से 5 ट्रिलियन इकोनॉमी वाली बात बोली थी। परंतु देश की हालत कुछ और ही बयां कर रही है।

2024 का लक्ष्य नहीं हासिल हुआ !

साल 2019 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में दोबारा सरकार बनी। नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर साल 2019 में यह लक्ष्य रखा गया कि 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन वाली इकोनॉमी बनाया जाएगा। जिस समय यह लक्ष्य निर्धारित किया गया, उस समय भारत 2.7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी था। लक्ष्य को पूर्ण करने लिए बड़े स्तर के वास्तविक विकास दर की जरूरत थी।

मात्र 6 साल में 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उस स्तर के निवेश की जरूरत थी। लेकिन 2024 का साल बीत चुका है और 2026 चल रहा है, पर अभी भी लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है। सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार समय को टालते जा रही है। अब सरकार इस लक्ष्य (India 5 trillion economy 2027) को हासिल करने के लिए 2027 तक का समय निर्धारित कर चुकी है। 

सरकार लक्ष्य क्यों हासिल नहीं कर सकी ?

2019 में लक्ष्य निर्धारित करने के बाद कोरोना महामारी ने देश के भीतर दस्तक दी। इसकी वजह से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा। इसकी चपेट में भारत भी आया और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा। भारत के GDP ग्रोथ को सही तरीके से देखने पर यही नजर आता है कि सरकार ने अभी तक लक्ष्य (India 5 trillion economy 2027) को हासिल करने वाली GDP ग्रोथ को हासिल नहीं किया है। भारत की विदेश नीति में भी मोदी के नेतृत्व में बदलाव देखने को मिला।

परंपरागत विदेश नीति से हटकर मोदी की फास्ट ट्रैक डिप्लोमेसी कुछ हद तक सफल तो रही परंतु 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लक्ष्य (India 5 trillion economy 2027) को हासिल करने में मोदी की नीतियां सफल नहीं हो सकी हैं। कोरोना महामारी के समय आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने देश की अर्थव्यवस्था के संकट की तरफ इशारा करते हुए सरकार को चेताया था, परंतु सरकार ने उनकी बातों को गंभीरता से लिया या नहीं लेकिन रघुराम राजन की भविष्यवाणी बहुत हद तक सटीक साबित हुई।

रघुराम राजन ने इस बात की ओर इशारा किया था कि 5-6 प्रतिशत की GDP ग्रोथ के साथ भारत अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता है। साल 2023 में रघुराम राजन ने कहा था कि भारत को 5 ट्रिलियन वाली इकोनॉमी बनने के लिए 12-15 प्रतिशत वास्तविक विकास दर की आवश्यकता है। जिस समय रघुराम राजन ने यह बात कही थी, उस समय भारत लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था थी। लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत आज तक 12-15 प्रतिशत वास्तविक विकास दर हासिल नहीं कर सका है।

यही वजह है कि भारत सरकार ने लक्ष्य हासिल करने के समय में बदलाव कर दिया है। अब 2027 तक यह लक्ष्य (India 5 trillion economy 2027) हासिल करने की बात दोहराई गई। सवाल यह है कि जब सरकार के पास आँकड़े हैं तो इस तरीके से काल्पनिक लक्ष्यों को जनता के समक्ष क्यों रखा जाता है। क्या ये एक चुनावी मुद्दा बनकर रह गया है ?

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रुपए के मूल्य में गिरावट !

भारत की मुद्रा रुपया है। डॉलर की तुलना में रुपए के मूल्य में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। बता दें कि 2014 में रुपए और डॉलर का अनुपात 62:1 था। अर्थात 1 डॉलर 62 रुपए के बराबर था। 2024 में 1 डॉलर 83 रुपए के बराबर हुआ और 2026 में 1 डॉलर 93 रुपए के बराबर हो गया। भारतीय मुद्रा के मूल्य में लगातार गिरावट 5 ट्रिलियन डॉलर वाली इकोनॉमी के लक्ष्य (India 5 trillion economy 2027) में बहुत बड़ी बाधा साबित हो रही है।

आईएमएफ़ की रिपोर्ट के अनुसार भारत, जापान और ब्रिटेन से एक बार फिर पिछड़ गया है। भारत का नाम अब विश्व की पाँच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाली सूची में नहीं है। भारत दो पायदान नीचे फिसल गया है और छठे स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, चीन, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन के बाद भारत छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके पहले भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मानी जा रही थी।

भारत के नीचे खिसकने का कारण यह है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है। दूसरी तरफ ब्रिटिश पौंड पहले की तुलना में मजबूत हुआ है। यही कारण है कि ब्रिटेन भारत से आगे निकल गया। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत सरकार लक्ष्य को हासिल करने से अभी मीलों दूर है। हालांकि आईएमएफ़ में यह भी अनुमान लगाया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2027 (India 5 trillion economy 2027) के आसपास लंबी छलांग लगा सकता है। 


इसके बावजूद भारत एशिया में बड़ी क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभर चुका है। चीन एशिया में भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। यही कारण है कि अमेरिका एशिया में चीन को प्रतिसंतुलित करने के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और भारत के संबंध पहले की तुलना में मजबूत भी हुए हैं। हालांकि कुछ विवाद समय-समय पर सामने निकलकर आए हैं। इसके साथ ही भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने के लिए लुक ईस्ट पॉलिसी को एक्ट ईस्ट पॉलिसी में बदल दिया और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश की है ताकि अर्थव्यवस्था (India 5 trillion economy 2027) को नई दिशा मिल सके।

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