

रंजन गोगोई ने पूरे कार्यकाल में एक भी सवाल नहीं पूछा, सिर्फ 1 बहस में हिस्सा लिया और 53% हाजिरी रही।
उन्होंने कहा था कि जरूरत होने पर ही सदन जाते हैं, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए।
राज्यसभा सांसद का काम मुद्दे उठाना होता है, लेकिन गोगोई की सक्रियता काफी कम रही।
16 मार्च 2026 को राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीट पर चुनाव होने थे, जिसमें से 26 सीटों पर कैंडिडेड पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे। बाकि 11 सीटों के लिए वोटिंग हुई जिसमें से 9 सीट NDA ने जीती जबकि 2 सीट विपक्षी दलों ने जीती। इस चुनाव के बाद एक ऐसे भी सांसद की चर्चा हुई, जिनका कार्यकाल खत्म हुआ और अब वो राज्यसभा में नज़र नहीं आएँगे। उनका नाम है रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi Rajya Sabha Attendance), जिनकी उपस्तिथि काफी चर्चा में रही। क्या है पूरा मामला, आइये जानते हैं।
रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) का कार्यकाल राज्यसभा से समाप्त हो चुका है। पूरे 6 साल तक वो इस सदन के सदस्य रहे। साल 2020 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पूर्व मुख्य न्यायाधीश (Former CJI) को मनोनीत किया गया था लेकिन उनका कार्यकाल अब विवादों में है। राज्यसभा में रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi Rajya Sabha Attendance) की उपस्तिथि विवादों से घिर चुकी है क्योंकि उन्होंने अपने 6 साल के कार्यकाल के दौरान सदन में एक भी सवाल (Zero Questions) नहीं किया। सिर्फ एक बहस में हिस्सा लिया। संसद में उनकी कुल उपस्थिति (Attendance) महज 53 प्रतिशत ही दर्ज हुई।
इसके साथ ही इस 6 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने सिर्फ दिल्ली सेवा बिल (Delhi Services Bill) के मुद्दे पर अपना भाषण (Speech) दिया था। अगस्त 2023 में दिए गए भाषण में उन्होंने कहा था कि अपने भाषण में उन्होंने 'मूल संरचना के सिद्धांत' पर कमेंट किया था। साथ ही 6 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोई प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया और कृषि कानून, महिला आरक्षण और नए आपराधिक कानून जैसी चर्चाओं में भी हिस्सा नहीं लिया।
रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi Rajya Sabha Attendance) ने एक बार राज्यसभा में अपनी उपस्तिथि पर बयान दिया था, जिसपर काफी विवाद भी हुआ था। दिसंबर 2021 में एक इंटरव्यू के दौरान उनसे इसपर सवाल हुआ था, तब उन्होंने कहा था कि वो अपनी मर्जी से सदन जाते हैं। जब उन्हें लगता है कि किसी अहम मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए, तभी वो राज्यसभा जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वो किसी पार्टी से नहीं बंधे हुए हैं।
विपक्ष द्वारा उनकी उपस्तिथि अक्सर सवाल उठाए जाते रहे हैं लेकिन सत्ता पक्ष ने हमेशा उनका बचाव ही किया। हालांकि, गोगोई किसी पार्टी द्वारा चुनकर राज्यसभा नहीं भेजेंगे बल्कि राष्ट्रपति ने उनके कार्यक्षेत्र को देखते सदन में मनोनीत किया था। बता दें कि गोगोई भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) थे। उनका कार्यकाल 3 अक्टूबर 2018 से 17 नवंबर 2019 तक रहा।
आपको बता दें कि एक राज्यसभा सांसद को रिटायमेंट के बाद कई प्रकार की सुविधाएं भी मिलती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व सांसद को ₹31,000 की पेंशन मिलती है। उन्हें और उनके परिवार को CGHS स्कीम के तहत सरकारी और पैनलबद्ध निजी अस्पतालों में मुफ्त या रियायती इलाज की सुविधा मिलती है।
इसके साथ ही वो देश भर में किसी भी ट्रेन के AC फर्स्ट क्लास में अकेले या AC 2-टियर में एक साथी के साथ मुफ्त सफर कर सकते हैं। वहीं, पूर्व सांसद की अगर मृत्यु हो जाए, तो उनके जीवनसाथी को आजीवन 50% पारिवारिक पेंशन भी मिलता है।
इस बात से बहुत कम लोग वाकिफ होते हैं कि राज्यसभा सांसद का काम क्या होता है? दरअसल, एक राज्यसभा सांसद संसद के ऊपरी सदन (Upper House) में बैठकर देश के लिए कानून बनाना और महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills) पर चर्चा करता है। उसका काम अपने राज्य के लोगों की आवाज बनकर वहां की समस्याओं को संसद के पटल पर रखना होता है। एक राज्यसभा सांसद की यह जवाबदेही होती है कि वो शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे सार्वजनिक मुद्दों पर सरकार से सवाल पूछे।
बता दें कि इस सदन के सांसद के पास राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी मतदान करने अधिकार होता है लेकिन ये नियम मनोनीत सांसदों पर लागू नहीं होता है। सिर्फ निर्वाचित सांसद ही इस प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।