

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में GEN Z वोटर निर्णायक भूमिका में हैं, इसलिए TMC और BJP दोनों युवा वर्ग को साधने में जुटी हैं।
ममता बनर्जी की TMC युवा उम्मीदवारों, ‘युवा साथी’ योजना और रोजगार जैसे वादों के जरिए युवाओं को आकर्षित कर रही है, जबकि भाजपा ज्यादा युवा टिकट, बेरोजगारी भत्ता और ‘सोनार बांग्ला’ विजन पर फोकस कर रही है।
दोनों पार्टियों में GEN Z को लेकर स्पष्ट दबाव और प्रतिस्पर्धा दिख रही है, जिससे साफ है कि 23 और 29 अप्रैल को युवा मतदाता ही चुनाव का रुख तय कर सकते हैं।
अप्रैल के महीने में 5 राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। इसमें बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुड्डुचेरी और असम राज्य शामिल हैं। बंगाल (west bengal election 2026) बीजेपी के लिहाज से काफी अहम है क्योंकि भाजपा 15 सालों से इस राज्य में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है लेकिन ममता बनर्जी के कारण उसे बंगाल की जनता घास तक नहीं डाल रही है। हालांकि, हैरानी की बात यह भी है कि भाजपा आज तक बंगाल में सरकार नहीं बना पाई है।
TMC से पहले कम्युनिस्ट पार्टी और उससे पहले कांग्रेस बंगाल फतह कर चुकी है लेकिन बीजेपी के लिए ये अभी एक सपने की तरह है। अप्रैल में बंगाल (west bengal election 2026) में 2 चरणों में चुनाव होने है। पहला चरण 23 अप्रैल को होगा जबकि दूसरा चरण 29 अप्रैल को होने वाला है। हालांकि, इसी बीच यह कयास चलने लगे हैं कि क्या GEN Z जो युवा वर्ग के लोग हैं, वो बंगाल में खेल पलट देंगे? यहाँ सवाल यह भी है कि इसका फायदा किसे मिलेगा, BJP या TMC को? आइये इसे समझते हैं।
इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव (west bengal election 2026) काफी रोचक होने जा रहा है। आमतौर पर बंगाल का मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम के आसपास नज़र आता है लेकिन इसपर मामला कुछ और ही है। इस बार के बंगाल चुनाव में GEN Z मुद्दा भी देखने को मिल रहा है और इसका बिगुल TMC की ओर से फूंक भी दिया गया है।
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने दो पीढ़ियों के बीच तालमेल बिठाना शुरू भी कर दिया है और इसकी झलक नेताओं को देने वाले टिकट में देखने को मिला है। पार्टी ने 74 मौजूदा विधायकों का पत्ता काटा है, जिसमे दुलाल चंद्र दास, पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी, सुप्ति पांडे और बाबुल सुप्रियो जैसे नेताओं का नाम शामिल है।
इनकी जगह TMC ने GEN Z, जो युवा वर्ग के लोग हैं, उनके ऊपर अपना दांव खेला है। राज्य में करीब 7 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो युवा वर्ग के हैं, इसलिए TMC कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है। TMC ने अपना वोट बैंक साधने के लिए लोक लुभावन वादें और और संगठनात्मक बदलावों का सहारा ले रही हैं।
20 मार्च 2026 को ही पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी किया, जिसमे इस बात का जिक्र है कि 'युवा साथी' योजना के तहत जो लोग 21 से 40 वर्ष के बीच के हैं और बेरोजगार हैं, उन युवाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपये और सालाना 18,000 रुपये देने का वादा किया है। पार्टी अभिषेक बनर्जी जैसे नेताओं को युवा छवि के तौर पर भी पेश करने का काम कर रही है। इसके साथ ही TMC रोजगार और उद्योग जैसे मुद्दों पर भी बात कर रही है, ताकि राज्य से होने वाले पलायन के मुद्दे पर घिरी सरकार को बचाया जा सके।
एक तरफ जहाँ बंगाल चुनाव (west bengal election 2026) से पहले TMC लोक लुभावन वादों से GEN Z को अपने खेमे में करना चाहती है, वहीं, बीजेपी भी इस मामले में खुद को पीछे नहीं छोड़ना चाहती है। भाजपा ने बंगाल चुनाव से पहले 25 प्रतिशत से अधिक टिकट GEN Z को देकर नहले पर दहला फेंकने का काम किया है। भाजपा ने जो सूचि जारी की है, इसमें 25% से अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं, जिनकी उम्र 40 साल से कम है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का इस बात पर जोर है कि राज्य के युवाओं को भय और भ्रष्टाचार के महौल से बाहर निकाला जाए। चुनाव से पहले भाजपा ‘कट मनी’ और ‘सिंडिकेट राज’ जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए यह बताने की कोशिश में है कि राज्य के युवाओं का भविष्य अंधकार में है। बीजेपी बंगाल के युवाओं को ‘सोनार बांग्ला’ का सपना दिखाकर अपने खेमे में करना चाहती है। उनके मुताबिक केवल उद्योग और केंद्रीय योजनाओं से ही राज्य का भला हो सकता है।
बीजेपी के घोषणापत्र के मुताबिक बेरोजगार युवाओं को 3000 रूपए प्रतिमाह मिलेंगे। सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सभी रिक्त सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही पिछले साल जो युवा भर्ती ना होने के चलते प्रभावित हुए हैं, उन्हें 5 वर्ष की आयु छूट मिलेगी। साथ ही MSMEs को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है, ताकि पलायन रुके।
TMC और BJP के घोषणापत्र से यह तो साफ़ होता है कि दोनों पार्टियों के बीच कहीं ना कहीं खौफ का माहौल है। GEN Z फैक्टर चुनाव (west bengal election 2026) का परिणाम तय कर सकता है और यही कारण है कि दोनों पार्टियां युवा वर्ग को लपेटने के चक्कर में हैं।
इस बार ममता बनर्जी की पार्टी ने 25 प्रतिशत ही ऐसे लोगों को टिकट दिया है, जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है। वहीं, बीजेपी ने 76 % ऐसे लोगों को टिकट दिया है, जिनकी उम्र 55 साल से कम है। इस बार भाजपा ने 11 वकील, 43 शिक्षक और 8 डॉक्टर वर्ग से लोगों को चुनावी मैदान में उतारा है।
ऐसे में दोनों पार्टियों ने अपना ब्लू प्रिंट तो तैयार कर लिया है लेकिन अब देखना होगा कि 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को GEN Z क्या फैसला लेते हैं। 4 मई को जब परिणाम आएगा, तब साफ़ हो जाएगा कि चुनाव में GEN Z फैक्टर किसके साथ गया है।