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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से भारी उठापटक का दौर चालू है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के स्पष्ट सुर दिखाई दे रहे हैं। पार्टी के भीतर चल रहे अंदरूनी कलह के बीच ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी का नेता मानने से विधायकों का एक बड़ा गुट पूरी तरह इनकार कर रहा है। बागी रुख अपना चुके कुछ विधायकों ने बाकायदा एक प्रेस वार्ता का आयोजन करके मीडिया को बताया कि उनके सर्वोच्च नेता केवल ममता बनर्जी हैं और अभिषेक बनर्जी का नेतृत्व उनको किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, हाल ही में संपन्न हुए साल 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पार्टी के चुनाव हारते ही संगठन में आंतरिक असंतोष और बगावत के सुर शुरू हो गए।
इस संकट के बीच, 31 मई 2026 को ममता बनर्जी ने स्थिति की समीक्षा के लिए पार्टी विधायकों की एक महत्वपूर्ण मीटिंग बुलाई थी। इस मीटिंग में पार्टी के आधे से अधिक विधायक नदारद रहे और उन अनुपस्थित विधायकों ने एक अलग गुट बनाकर ममता बनर्जी को अपना कड़ा संदेश भेज दिया है।
सदन के आंकड़ों के अनुसार, कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने आधिकारिक रूप से अलग होकर TMC से निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग विधायक दल बना लिया है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए यह राजनीतिक घटनाक्रम एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस ने बागी गुट के इस दावे को स्वीकार करते हुए ऋतब्रता बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपनी आधिकारिक मान्यता दे दी है।
विपक्ष के नए नेता बने ऋतब्रता बनर्जी ने कहा है, “हम विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हम इस समय 60 विधायकों का एक मजबूत गुट हैं। हम पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे हमारी मार्गदर्शक और सलाहकार बनें और भविष्य में हमारा मार्गदर्शन करें। हम सभी सदन के भीतर एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।”
बता दें कि इस टूट से पहले टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस को एक आधिकारिक पत्र लिखकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा द्वारा इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया। उन्होंने चट्टोपाध्याय की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले दस्तावेज़ पर कई विधायकों के हस्ताक्षरों के जाली होने का गंभीर आरोप लगाया, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने अभिषेक बनर्जी के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
इस बड़े बदलाव के बाद, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस विधायी दल के इस नए गुट की पहली आधिकारिक बैठक 4 जून 2026 को सुनिश्चित की गई। सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह बागी गुट अब राज्य में पूरी तरह मान्यता प्राप्त समूह और आधिकारिक मुख्य विपक्षी दल बन चुका है।
विधानसभा परिसर में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वयं ऋतब्रत बनर्जी करेंगे, जो कोलकाता से सटे हावड़ा जिले की उलुबेरिया (पूर्व) सीट से तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक हैं।
इस बड़े राजनीतिक संकट को देखते हुए 3 जून, 2026 को ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए वर्तमान पार्टी की सभी कार्यकारी समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का बड़ा ऐलान कर दिया।
बता दें कि ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में मिली इस हार के तुरंत बाद यह सार्वजनिक घोषणा की थी कि राज्य की राजनीति के साथ-साथ अब वह राष्ट्रीय स्तर पर बने INDIA ब्लॉक को और अधिक मजबूत करेंगी।
इसी कूटनीतिक क्रम में आगामी 8 जून को ममता बनर्जी दिल्ली आएंगी और वहाँ आयोजित होने वाली INDIA ब्लॉक की उच्च स्तरीय मीटिंग में शामिल होंगी। राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में होने वाली इस बैठक में 15 से अधिक प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की पूरी संभावना है।
इन तमाम घटनाक्रमों को देखकर राजनैतिक विश्लेषकों द्वारा यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ममता बनर्जी भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति में काफी सक्रिय नजर आ सकती हैं।
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