सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई चेयरमैन से मारपीट मामले में सीबीआई जांच से किया इनकार, कहा-हाईकोर्ट जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई चेयरमैन से मारपीट मामले में सीबीआई जांच से किया इनकार, कहा- हाईकोर्ट जाएं
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई चेयरमैन से मारपीट मामले में सीबीआई जांच से किया इनकार, कहा- हाईकोर्ट जाएंIANS
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सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दे दी है।

यह मामला वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष तत्काल सूचीबद्ध किए जाने के लिए मौखिक रूप से रखा था। प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि कुछ वकील बीसीआई के समक्ष प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी वकीलों ने इससे पहले बीसीआई में सुधारों को लेकर एक प्रतिनिधित्व सौंपा था।

आरोप है कि इसके बाद कुछ ऐसे लोगों ने प्रदर्शन कर रहे वकीलों के साथ मारपीट की, जिन्होंने खुद को वकील बताया। प्रशांत भूषण के अनुसार, कथित घटना बीसीआई परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई है। प्रशांत भूषण ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद बीसीआई चेयरमैन ने एक प्रेस बयान में प्रदर्शन करने वाले वकीलों को कथित तौर पर 'लीगल कॉकरोच' कहा और उनके साथ मारपीट किए जाने पर गर्व जताया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है क्योंकि बीसीआई परिसर की सीसीटीवी फुटेज के नष्ट या गायब होने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि वकीलों को अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका नहीं जाना चाहिए।

हालांकि, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने वकीलों के प्रदर्शन के तरीके पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग हैं और शिकायतों के लिए संस्थागत तंत्र का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि सार्वजनिक प्रदर्शन का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत के अधिकारी के रूप में वकीलों से न्याय प्रशासन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही बीसीआई से जुड़े सुधारों के संबंध में कई मुद्दों पर विचार कर रहा है। इस पर प्रशांत भूषण ने माना कि वकीलों के पास संस्थागत उपाय उपलब्ध हैं लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शन करने वाले वकीलों के साथ मारपीट नहीं की जा सकती। इस पर जस्टिस बागची ने पूछा कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं कर सकते।

प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी लेकिन चूंकि सुप्रीम कोर्ट पहले से बीसीआई सुधारों से संबंधित मामलों पर सुनवाई कर रहा है, इसलिए उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख करना उचित समझा।

इसके बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, "उन्हें हाईकोर्ट जाने दीजिए। अन्यथा कभी-कभी लोगों को लगता है कि हम संस्थागत पक्षपात कर रहे हैं।" पीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने और उचित राहत के लिए हाईकोर्ट जाने की अनुमति दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को पेपरबुक वापस करने का निर्देश दिया, ताकि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष उचित कार्यवाही शुरू कर सकें।(VR)

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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