1,72,890 लोगों की मौत...खूनी सड़कों ने उजाड़े लाखों घर, गडकरी के मंत्रालय की रिपोर्ट ने खोली सिस्टम की पोल

साल 2014 से बीजेपी सत्ता में लगातार बने हुए है और सड़क परिवहन मंत्रालय की कमान तब से लेकर अब तक नितिन गडकरी के हाथों में ही है।
बाईं ओर नितिन गडकरी नीला कुर्ता पहने हुए और माइक के सामने भाषण देते हुए जबकि दाईं ओर एक सफ़ेद कर जिसका एक्सीडेंट हुआ है
नितिन गडकरी के मंत्रालय की 2023 के रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1,72,890 लोगों की मौत हुई है। Wikimedia
Reviewed By :
Published on
Updated on
4 min read
Summary
  • सड़क हादसों और खुले गड्ढों/मैनहोल जैसी लापरवाही से लोगों की मौतें बढ़ रही हैं, जिससे सड़कों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 2023 में देशभर में 4.8 लाख से अधिक दुर्घटनाएँ हुईं और 1.7 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई, जिनमें अधिकांश युवा शामिल हैं।

  • खराब सड़क इंजीनियरिंग, प्रशासनिक लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी, तीनों मिलकर हादसों को बढ़ा रहे हैं, इसलिए सरकार और जनता दोनों की जिम्मेदारी जरूरी है।

राहत इंदौरी का एक प्रसिद्ध शेर है, ''बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा, जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा।" अगर आप सड़क पर चलते हैं, तो समझ लीजिये आपकी जान बहुत सस्ती है, कभी भी आपसे छीनी जा सकती है। वजह है सड़क दुर्घटना, जिसमें मौतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

16 जनवरी 2026 का ही मामला ले लीजिये जहाँ युवराज मेहता की मौत 20 फुट गहरे गड्ढे में गिर कर हो गई थी। युवराज के बाद कमल ध्यानी नामक व्यक्ति की 6 फ़रवरी 2026 को जनकपुरी में 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हुई थी जबकि 10 फरवरी 2026 को रोहिणी में बिरजू कुमार खुले मैनहोल में गिर गए, जिससे उनकी मृत्यु हो हो गई।

गौर करें तो यहाँ सिस्टम की लापरवाही के चलते कई मासूम लोग अपना जीवन गंवा रहे हैं। पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों, बाइक सवारों, वाहन चालकों तक के लिए सड़कें दिन-प्रतिदिन खतरनाक होती जा रही हैं। हालांकि, इस बात को खुद भारत सरकार भी स्वीकार कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मौत की आंकड़ों ने सबको चौंका कर रख दिया है। आइये इसपर एक नज़र डालते हैं।

सड़क दुर्घटना में मरने वाले लोगों के आंकड़ों में इज़ाफा

साल 2014 से बीजेपी सत्ता में लगातार बने हुए है और सड़क परिवहन मंत्रालय की कमान तब से लेकर अब तक नितिन गडकरी के हाथों में ही है। बतौर परिवहन मंत्री गडकरी अक्सर सड़क हादसों पर चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं लेकिन बावजूद इसके दुर्घटनाओं में कमी नहीं आई है।

सड़क परिवहन मंत्रालय 2023 के रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में कुल 4,80,583 सड़क दुर्घटनाएँ देखने को मिली हैं और इसमें से 1,72,890 लोगों की जान गई और 4,62,825 लोग घायल हुए हैं। मृत्यु दर 36% है। पिछले कुछ सालों में सड़क हादसों के मृत्यु दर में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

हादसों में युवाओं के आंकड़े ज्यादा

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सड़क हादसे में मृत्यु का शिकार जो लोग हो रहे हैं, उनमें ज्यादातर युवा हैं और ये चिंताजनक बात है। रिपोर्ट के अनुसार 66% में वैसे युवा हैं जिनकी उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच है। अगर 18 से 60 साल तक के बीच देखें, तो यह आंकड़ा बढ़कर 83.4% तक पहुंच जाता है। इसमें वैसे लोग भी शामिल हैं, जो रोजाना घर से काम के लिए निकलते हैं। मतलब इसका असर परिवार की रोजी रोटी पर भी पर रहा है।

2023 की रिपोर्ट के मुताबिक कुल सड़क हादसों में से 31.2% राष्ट्रीय राजमार्गों पर, 22% राज्य राजमार्गों पर और बाकी 46.8% अन्य सड़कों पर दर्ज किए गए। इसमें दोपहिया वाहन दुर्घटना में अधिकांश मौतें हुई हैं। राज्यों के आधार पर आंकड़ों का आकलन करें, तो तमिलनाडु में 11,490 मौतें और उत्तरप्रदेश में 8,370 मौतें हुई हैं।

यूपी में एसयूवी/कार/जीप से 19.2% दुर्घटनाएं हुई हैं जबकि ट्रक से 29.9% दुर्घटनाएं सुनने को मिली हैं। इसके साथ ही झारखंड, पंजाब, बिहार और अंडमान और निकोबार जैसे राज्यों में दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या घायलों से अधिक देखी गईं। एक्सप्रेसवे पर 3,630 दुर्घटनाएँ हुईं, जिनमें 2,372 मौतें होने के आंकड़े हैं।

सड़क हादसों पर गडकरी का रिएक्शन

सड़क परिवहन मंत्रालय की कमान नितिन गडकरी के हाथों में हैं और कई मौकों पर वो यह कह चुके हैं कि उन्होंने यह मंत्रालय नरेंद्र मोदी से छीनकर ली है लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ इसी बात का दुःख रहा है कि वो सड़क हादसों को रोकने में विफल हो रहे हैं। कई मौकों पर वो इसे स्वीकार भी करते दिखे हैं। उन्होंने इसे अपना 'सबसे बड़ा फेल्योर' (Failure) बताया है।

साथ ही सड़कों की खराब बनावट को लेकर उन्होंने इंजीनियरों को भी फटकार लगाई है। उन्होंने एक बार कड़े लहजे में कहा था कि "सड़क हादसों के लिए खराब इंजीनियरिंग जिम्मेदार है और इसके लिए इंजीनियरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।" एक कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने 2030 तक भारत में हो रही सड़क हादसों से मौतों को 50% कम करने का लक्ष्य भी रखा है। लोगों को जागरूक करने के लिए वो अमिताभ बच्चन के साथ मिलकर विज्ञापन के जरिये काम भी कर रहे हैं।

बता दें कि टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की 4 सितंबर 2022 को सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद गडकरी ने बहुत कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने पिछली सीट पर भी सीट बेल्ट अनिवार्य करने और सभी कार में 6 एयरबैग्स की वकालत की थी।

लोगों की भी है जिम्मेदारी

सारी जिम्मेदारी सरकार की है, ये कह देना भी नाइंसाफी होगी। आम लोगों को भी यातायात के नियमों का पालन करना चाहिए। जो दोपहिया वाहन चलाते हैं, उन्हें हेलमेट का उपयोग करना चाहिए और जो चार पहिया वाहन चला रहे हैं, सीट बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2023 में 1,007,656 लोगों को बिना हेलमेट के पकड़े जाने पर जुर्माना लगाया गया था जबकि 2024 में यह संख्या और बढ़कर 17 लाख से अधिक हो गई।

इसके साथ ही 10 में से 7 लोग सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते हैं। इसके साथ ही गलत लेन में चलना, फुटपाथ पर बाइक, स्कूटर चलाने के जुर्म में 2023 में 157,310 से अधिक चालान काटे गए थे। ऐसे में आम जनता को भी अपनी तरफ से सरकार का सहयोग करना चाहिए।

बाईं ओर नितिन गडकरी नीला कुर्ता पहने हुए और माइक के सामने भाषण देते हुए जबकि दाईं ओर एक सफ़ेद कर जिसका एक्सीडेंट हुआ है
पूरे बिहार में खुशी की लहर : नितिन नबीन के भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनने पर नेताओं में खुशी

Related Stories

No stories found.
logo
www.newsgram.in