पुलिस में तेज़ी से फैल रही करप्शन की हवा: रांची में तैनाती के 96 घंटे के भीतर ही थाना अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा गया

झारखंड के गुमला में “जनता की सेवा” का दावा करने वाले एक नए-नए थाना प्रभारी का मामला उल्टा पड़ गया। चैनपुर थाने में हाल ही में पोस्ट हुए थाना प्रभारी (दरोगा) शैलेश कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 30 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
इस इमेज में शैलेश कुमार को देखा जा सकता है।
रांची में तैनाती के 96 घंटे के भीतर ही थाना अधिकारी घूस लेते पकड़ा गया।X
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  • झारखंड के गुमला में चैनपुर थाने के नए थाना प्रभारी शैलेश कुमार को ACB ने ₹30,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

  • आरोप है कि एक ग्रामीण से ईंट पकाने की अनुमति दिलाने के बदले घूस मांगी गई थी, जिसके बाद पीड़ित ने ACB में शिकायत की।

  • शैलेश कुमार ने 18 जनवरी 2026 को प्रभार संभाला था और 21 जनवरी को पकड़े गए—यानी 96 घंटे में ही मामला उल्टा पड़ गया।

दिन बीतता जा रहा है और करप्शन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। रोज़ाना देश में कहीं न कहीं से सरकारी बाबुओं और अफसरों द्वारा रिश्वत लेने की बात सामने आती रहती है। कभी गुजरात कैडर के IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल से जुड़ा रिश्वत का मामला सामने आता है—जिन्हें 2 जनवरी 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED- Enforcement Directorate) ने रिश्वत और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया—तो कभी पूर्व PWD मुख्य अभियंता जी.पी. मेहरा द्वारा किए गए मनी लॉन्ड्रिंग की खबर सामने आती है। ऐसा ही एक मामला झारखंड से सामने आया है।

झारखंड में पुलिस द्वारा रिश्वत लेने की बात सामने आई है। भारत में पहले ही लोगों के मन में पुलिस को लेकर खास छवि नहीं है। लोग पुलिस की वर्दी देखकर ही यह धारणा बना लेते हैं कि किसी भी काम को कराने के लिए पुलिस को पैसा तो खिलाना ही पड़ेगा। ऐसे में पुलिस अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने के मामले इस धारणा को दिन-प्रतिदिन और मज़बूत करते हैं।

झारखंड के गुमला में “जनता की सेवा” का दावा करने वाले एक नए-नए थाना प्रभारी का मामला उल्टा पड़ गया। चैनपुर थाने में हाल ही में पोस्ट हुए थाना प्रभारी (दरोगा) शैलेश कुमार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 30 हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। हैरानी वाली बात ये है कि उन्होंने 18 जनवरी 2026 को ही थाने का प्रभार संभाला था और 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तारी हो गई—यानी नौकरी के करीब 96 घंटे के भीतर ही उनको अपने हाथों से अपनी नौकरी गवानी पड़ी। 

क्या आरोप है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बताया जा रहा है कि शैलेश कुमार और पूर्व थाना प्रभारी अशोक कुमार पर आरोप है कि उन्होंने जयपाल नायक नाम के एक ग्रामीण से ईंट पकाने की अनुमति (घर के लिए) दिलाने के बदले रिश्वत की मांग की। पीड़ित रिश्वत देने को तैयार नहीं था, लेकिन उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। आखिरकार पीड़ित ने परेशान होकर रांची स्थित ACB ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई। 

ACB  (Anti-Corruption Bureau) ने ऐसे बिछाया जाल

शिकायत के आधार पर ACB ने पूरी प्लानिंग बनाकर जाल बिछाया। तय समय पर जैसे ही आरोपी थाना प्रभारी ने जयपाल नायक से रिश्वत के ₹30,000 लिए, टीम ने मौके पर ही थाना प्रभारी को पकड़ लिया। इसके बाद ACB ने उनके घर पर भी करीब 15 मिनट तक सर्च ऑपरेशन चलाया और फिर आरोपी (थाना प्रभारी) को पूछताछ के लिए रांची ले जाया गया। 

पहले भी हुई है ऐसी कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पहली बार नहीं है जब रांची में किसी अफसर को पहली बार रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, इससे पहले भी ACB ने  2 जनवरी को रांची में सदर CO मुंशी राम को रिश्वत लेते पकड़ा था और बाद में छापेमारी में कैश बरामदगी की बात भी सामने आई थी। 

(PO)

इस इमेज में शैलेश कुमार को देखा जा सकता है।
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