राज्यसभा में अधिकरण सुधार विधेयक 2026 पारित

राज्यसभा ने मंगलवार को (ट्रिब्यूनल) अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों, पारदर्शिता, दक्षता और न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है।
राज्यसभा में अधिकरण सुधार विधेयक 2026 पारित
राज्यसभा में अधिकरण सुधार विधेयक 2026 पारितIANS
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राज्यसभा ने मंगलवार को (ट्रिब्यूनल) अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों, पारदर्शिता, दक्षता और न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है।

अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह आयोग अधिकरण व्यवस्था के लिए एक स्वतंत्र, पारदर्शी और संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा, “अधिकरण सदस्यों का कार्यकाल और स्पष्ट सेवा शर्तें न्यायिक स्वतंत्रता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए विधेयक में 5 वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान रखा गया है, जो निर्धारित ऊपरी आयु सीमा के अधीन होगा।”

मंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्रता के लिए अलग से कोई न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते तथा अन्य सेवा शर्तों को नियमों के माध्यम से विनियमित करने का प्रस्ताव है। मेघवाल ने कहा कि अधिकरण सुधार का उद्देश्य न्याय तक पहुंच आसान बनाना, कारोबार सुगमता बढ़ाना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाना है। इससे भारत के कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूती मिलेगी और समयबद्ध तथा प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि अधिकरणों के कामकाज में प्रक्रियागत और प्रशासनिक विविधताओं जैसी चुनौतियां सामने आती रही हैं। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 2015 में अधिकरणों के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने कहा कि 2021 में सरकार अधिकरण सुधार अध्यादेश और बाद में अधिकरण सुधार अधिनियम लेकर आई। इसके बाद अधिकरणों की संख्या 19 से घटाकर 16 की गई। 2021 के कानून के कुछ प्रावधानों को भी उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई और न्यायिक स्वतंत्रता तथा शक्तियों के पृथक्करण से जुड़े महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए।

मेघवाल ने कहा कि 19 नवंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय के फैसले में अधिकरण सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय अधिकरण आयोग जैसी संस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि इसी न्यायिक मार्गदर्शन और संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आधुनिक, स्वतंत्र और एकरूप अधिकरण व्यवस्था तैयार करने के लिए अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 लाया गया है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक अधिकरणों के मूल अधिकार क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं करता। प्रत्येक अधिकरण का अधिकार क्षेत्र वही रहेगा, जो संबंधित मूल कानून में निर्धारित है।

उन्होंने कहा, “यह अधिकार क्षेत्र बदलने वाला विधेयक नहीं है। यह नियुक्तियों, संस्थागत स्वतंत्रता, पारदर्शिता और दक्षता को मजबूत करने वाला विधेयक है।” मेघवाल ने बताया कि विधेयक में प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अथवा किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा किए जाने का प्रावधान है। आयोग में दो न्यायिक सदस्य और दो तकनीकी सदस्य होंगे। इसका उद्देश्य अधिकरण व्यवस्था के संचालन में न्यायिक विशेषज्ञता और तकनीकी विशेषज्ञता का उचित समन्वय सुनिश्चित करना है।

एक सांसद द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े मुद्दे उठाए जाने का उल्लेख करते हुए मेघवाल ने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश कॉलिज्यम प्रणाली के माध्यम से होती है, लेकिन सरकार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों से नाम भेजने का आग्रह करती है। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ सरकार का मूल मंत्र है और इसी प्राथमिकता के कारण विभिन्न उच्च न्यायालयों में इन वर्गों से आने वाले न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी है।(VR)

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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