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केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रचार चरम पर है। 4 मई 2026 को सभी राज्यों के चुनावी परिणाम की घोषणा होगी। सत्ताधारी दलों द्वारा पाँच साल के रिपोर्ट कार्ड पर दोबारा वोट मांगा जा रहा है। प्रायः सभी राज्यों के नेताओं के पढ़ाई पर चर्चा होती है। इन पाँच राज्यों में से केरल राज्य में साक्षरता दर सबसे अधिक है। इन सभी राज्यों में उच्च शिक्षा का हाल कुछ इस प्रकार है
ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पश्चिम बंगाल में शुरुआती दौर में शिक्षा की हालत में सुधार हुआ था। धीरे-धीरे ममता के शासन पर उच्च शिक्षा को लेकर सवाल खड़े किए जाने लगे क्योंकि उच्च शिक्षा के बहुत सारे मानकों को ममता सरकार पूरा करने में नाकामयाब रही है। राज्य के विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सरकार हमेशा सवालों के कटघरे में रहती है। एनआईआरएफ (National Institutional Ranking Framework-NIRF) के आंकड़ों के मुताबिक कोलकाता विश्वविद्यालय में नियमित प्रफेसरों की कमी है। शिक्षकों की कमी से विश्वविद्यालय में पठन-पाठन बाधित है। ज्यादातर शिक्षकों को एडहॉक (Adhoc) पर रखा गया है।
ये हालत देश के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक कोलकाता विश्वविद्यालय की है। इसी तरीके से अन्य विश्वविद्यालयों की हालत ठीक नहीं है जिसके कारण छात्र किसी न किसी वजह से आन्दोलनरत होते हैं। एनआईआरएफ (National Institutional Ranking Framework-NIRF) की 100 प्रभावशाली विश्वविद्यालय में पश्चिम बंगाल की कलकत्ता यूनिवर्सिटी को टॉप 5 में गिना जाता था लेकिन 2025 में इसके रैंकिंग में गिरावट देखने को मिला है। ममता बनर्जी ने कोलकाता में राज्य के विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर के नियुक्ति की प्रक्रिया को बदल दिया है वहाँ पर वाइस चांसलर की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
केरल में राज्य विश्वविद्यालयों की संख्या लगभग 16 है। एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है जिसका नाम केरल केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। इसके अलावा कुछ डीम्ड यूनिवर्सिटी भी हैं। केरल के बहुत सारे छात्र दिल्ली में पढ़ाई के लिए आते हैं क्योंकि केरल में उच्च शिक्षा की हालत सही नहीं है। राज्य सरकार के चार विश्वविद्यालय ऐसे हैं जो देश के शीर्ष 100 संस्थानों में गिने जाते हैं इसके बावजूद अगर केरल के बहुत सारे छात्र पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर जाने का फैसला करते हैं तो इसका मतलब है कि शिक्षा की गुणवत्ता ठीक नहीं है।
असम में हिमंत बिस्वा सरमा 10 साल से मुख्यमंत्री हैं। असम की शिक्षा गुणवत्ता को इसी हिसाब से समझा जा सकता है देश के 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में सिर्फ दो विश्वविद्यालय हैं जिनके नाम गुवाहटी यूनिवर्सिटी (रैंक 9) और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी हैं। असम में भी यूनिवर्सिटी के अंदर माहौल ठीक नहीं है। राज्य के छात्रों को दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए शरण लेना पड़ता है। एक तरफ असम में 2021 से 2026 के बीच 10 नए विश्वविद्यालयों की स्थापना हुई है लेकिन गुणवत्ता में अभी भी सही से सुधार नहीं हुआ है।
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तमिलनाडु में उच्च शिक्षा को लेकर छात्र बहुत सक्रिय रहते हैं। एनआईआरएफ (National Institutional Ranking Framework-NIRF) की रैंकिंग में 100 शीर्ष विश्वविद्यालयों में तमिलनाडु के 20 विश्वविद्यालय शामिल हैं। दिल्ली के बाद उच्च शिक्षा में दाखिला लेने वालों छात्रों की संख्या तमिलनाडु में सबसे अधिक है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT-Madras) देश NIRF रैंकिंग में पहले स्थान पर है। अन्ना विश्वविद्यालय, अमृता विश्व विद्यापीठम जैसे संस्थान बहुत अच्छे माने जाते हैं। इसके बावजूद बहुत सारे संस्थानों में नियमित शिक्षकों का अभाव है जिससे छात्रों का पठन-पाठन बाधित होता है।
पुडुचेरी में पांडिचेरी यूनिवर्सिटी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है। पुडुचेरी के विश्वविद्यालयों में भी नियमित शिक्षकों की कमी है जिसके कारण विश्वविद्यालयों में शिक्षा के स्तर में गिरावट नजर आती है। इन सभी राज्यों में 2026 के चुनाव पर उच्च शिक्षा की बदहाली एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
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