

साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान नरेंद्र मोदी की पहल पर PM CARES Fund की शुरुआत एक Public Charitable Trust के रूप में की गई। महामारी से लड़ने और स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने के नाम पर देश-विदेश की जनता और PSUs ने इसमें हजारों करोड़ रुपये दान किए।
करीब 5 साल बाद जब जनता और सांसदों ने फंड के पैसों का हिसाब मांगा, तो प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि PM CARES एक प्राइवेट फंड है, इसलिए यह RTI और संसद के सवालों के दायरे में नहीं आता। इस फैसले के बाद पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए, जिन पर The Wire जैसे मीडिया संस्थानों ने भी चर्चा की।
2022 से 2024 के बीच हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के लगभग ₹2040 करोड़ खर्च होने के सरकारी आंकड़ों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि कहीं PM CARES Fund के पैसे का इस्तेमाल चुनावों में तो नहीं हुआ। अगर ऐसा हुआ, तो यह जनता के भरोसे के साथ बड़ा विश्वासघात होगा , इसी आशंका के कारण फंड की जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2020 के कोरोना महामारी के दौरान एक फंड की घोषणा की थी। इस फंड का नाम पीएम केयर फंड था। उस समय देश की जनता को लगा था कि देश मुश्किलों से जूझ रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर विश्वास जताते हुए देश की जनता ने पीएम केयर फंड मे पैसा जमा किया। लगभग 5 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री से जब पीएम केयर फंड का हिसाब मांग जा रहा है तो पीएमओ की तरफ से निर्देश मिल रहे हैं कि पीएम केयर फंड का हिसाब नहीं मांगा जा सकता है। लोकसभा सचिवालय को निर्देश मिले हैं कि पीएमकेयर फंड से जुड़े सवाल कोई भी सांसद नहीं पूछ सकता है।
साल 2020 में देश एक बड़ी विपदा से गुजर रहा था। कोविड (Covid-19) ने पूरे विश्व को कुछ समय के लिए रोक दिया था। जिस रफ्तार से दुनिया आगे बढ़ने में लगी थी, वह रफ्तार थम सा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय पीएम केयर फंड की घोषणा की। साल 2020 के मार्च महीने में कोरोना (COVID-19) आपदा के समय पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) की शुरुआत की गई थी। कोरोना महामारी के समय पूरा विश्व परेशान था। पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) शुरू करने के पीछे का उद्देश्य यह बताया गया कि कोरोना महामारी से लड़ने में देश को आर्थिक मदद की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने इस फंड को शुरू करने में अहम भूमिका निभाई। देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और गरीबों को कोरोना महामारी में आर्थिक मदद हेतु इस फंड की शुरुआत एक सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास (Public Charitable Trust) के रूप में की गई थी। यह ट्रस्ट 27 मार्च 2020 को ही नई दिल्ली (New Delhi) में पंजीकृत किया गया था।
अब पीएमओ कि तरफ से यह निर्देश मिला है कि पीएम केयर फंड से संबंधित कोई भी सवाल देश कि संसद में नहीं पूछा जाएगा। पीएमओ का यह सीधा निर्देश बहुत कुछ इशारा कर रहा है।
जब यह पीएम केयर फंड बना था तो मात्र तीन महीने के अंदर इसमे 3000 करोड़ रुपए बहुत सारे पीएसयू ने जमा किए थे । वहीं मात्र तीन साल के अंदर ही 13000 करोड़ रुपए इस फंड में इकट्ठे हुए थे। बाद में धीरे-धीरे बहुत सारे लोगों ने इस फंड पर विश्वास करके इसमें अपने पैसे दान किए। देश के अंदर से लेकर देश के बाहर तक, सभी लोगों ने इसमें अपने पैसे भेजे थे। जब लोगों ने फंड के पैसे का हिसाब सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के माध्यम से मांगने का प्रयास किया तो यह जवाब दिया गया कि यह एक प्राइवेट फंड है। लगभग 5 साल बीत जाने के बाद अब देश कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पैसे का हिसाब मांगना चाहती है। इतने समय बीत जाने पर इस फंड में कितना पैसा आया। जीतने पैसे इकट्ठे हुए, उन सारे पैसों का क्या हुआ? लेकिन अब तो इस फंड को आरटीआई(RTI) के दायरे से बाहर रखने की बात की जा रही है।
जब से पीएमओ ने यह निर्देश जारी किए हैं कि पीएम केयर फंड में जमा पैसे का हिसाब नहीं दिया जा सकता है, लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि इतने सारे पैसे कहाँ चले गए और देश के प्रधानमंत्री इस पैसे का हिसाब क्यों नहीं देना चाहते हैं ?
बता दें कि पीएम केयर फंड (PM CARES Fund) बनने के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में चुनाव हुए थे। जिसमें उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड सहित अलग-अलग राज्यों में भाजपा ने चुनाव लड़ा था। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन सारे चुनावों में भाजपा को चुनाव लड़ने के लिए पीएम केयर फंड से पैसा तो नहीं दिया गया ? भाजपा ने साल 2022 से लेकर 2024 तक विधानसभा सहित लोकसभा का जो चुनाव लड़ा था सारा पैसा जोड़ने पर लगभग 2040 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ये आँकड़े केवल सरकारी दस्तावेजों के आधार पर हैं। भारत में चुनाव की प्रक्रिया से सभी परिचित हैं कि चुनाव में राजनीतिक पार्टियां पैसा किस तरीके से खर्च करती हैं।
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लोगों का सवाल है कि पीएम केयर फंड का पैसा कहीं चुनाव लड़ने में तो प्रयोग नहीं किया गया? अगर ऐसा हुआ है, तो देश कि जनता के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात हुआ है। देश के प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से इस फंड के बारे में देश की जनता को बताया था। जब देश की जनता पैसे का हिसाब मांग रही है तो यह कहा जा रहा है कि यह एक प्राइवेट फंड है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैसा उसी तरीके से प्रयोग किए गए जैसे चुनावी बॉन्ड के पैसे प्रयोग किए गए थे। बता दें कि भाजपा सरकार जब से केंद्र में आयी है, लगातार यह आरोप लगते रहे हैं कि ED और सीबीआई (CBI) का डर दिखाकर भाजपा बहुत सारे पैसे चुनावी बॉन्ड के रूप में लेती रही। इसके बहुत सारे सांकेतिक प्रमाण भी मिले हैं। अब यह सवाल उठ रहा है कि कहीं पीएम केयर फंड, अब अवैध रूप से इकट्ठा पैसों का भंडार तो नहीं बन गया है जिसकी वजह से इसकी पारदर्शिता को खत्म की जा रही है। अगर यह अवैध पैसों का भंडार बन चुका है तो इसका इसका भंडाफोड़ कब होगा ?