मणिपुर में फिर जली हिंसा की आग ! चरमपंथियों ने दो नागा पुरुषों को बनाया निशाना, पूर्व सैनिक की चली गई जान

मणिपुर (Manipur News) में पिछले काफी समय से अशान्ति को खत्म करने की कोशिश हो रही थी इसी बीच एक बार फिर मणिपुर में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया गया है। 18 अप्रैल 2026 को उखरुल जिले में नेशनल हाईवे 202 पर चरमपंथियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की।
आंदोलन करते लोग
18 अप्रैल 2026 को उखरुल जिले में नेशनल हाईवे 202 पर चरमपंथियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की जिसमें दो तांगखुल नागा पुरुषों की हत्या कर दी गई। इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है। AI Generated
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मणिपुर (Manipur News) में पिछले काफी समय से अशान्ति को खत्म करने की कोशिश हो रही थी इसी बीच एक बार फिर मणिपुर में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया गया है। मणिपुर में अफरा-तफरी मची हुई है। सरकार ने आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा घटना को अंजाम दिया गया है। उग्रवादियों ने साजिश के तहत वाहन पर सवार लोगों को अपना निशाना बनाया और दो तांगखुल नागा पुरुषों की हत्या कर डाले। इसमें एक शख्स की पहचान सेवानिवृत्त सैनिक के रूप में हुई है।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, मणिपुर (Manipur News) के उखरुल ज़िले में नेशनल हाईवे 202 पर कुछ अराजक तत्वों ने जघन्य अपराध वाली घटना को अंजाम दिया है। 18 अप्रैल, 2026 को हाई वे पर वाहन सवार लोगों को निशाना बनाते हुए गोली चलाई गई। इस घटना में दो लोगों की जान चली गई। एक शख्स का नाम चिनाओशांग शोकवुंगनाओ है जिनकी उम्र लगभग 45 वर्ष बताई गई है। चिनाओशांग शोकवुंगनाओ सेना के रिटायर्ड सैनिक हैं। वहीं दूसरे शख्स की पहचान 42 वर्षीय यारिंगम वाशुम के रूप में हुई है। ये दोनों लोग मणिपुर के उखरुल ज़िले के रहने वाले बताए गए हैं। 

प्रशासन ने क्या बोला ?

प्रशासन ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा और घटना के बारे में विस्तार से बताया है। जिले की पुलिस ने बताया है कि इम्फाल से उखरुल की तरफ जा रहे वाहनों पर कुछ चरमपंथियों ने हमला किया। इस हमले में 6 वाहनों पर गोलियां लगी हैं। इस गोलीबारी में दो लोगों की जान चली गई। ये दोनों ही नागा समुदाय ने संबंध रखते थे। इस मामले की खोजबीन जारी है। प्रशासन के मुताबिक महादेव और लिटान इलाके में आम नागरिकों को सुरक्षा एस्कॉर्ट दिया जा रहा है जिससे कि उनको किसी भी प्रकार के खतरे का सामना न करना पड़े। प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक इस घटना को अंजाम देने के लिए लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली राइफल का प्रयोग किया गया है। क्योंकि इस घटना को सुरक्षा एस्कॉर्ट से काफी दूरी पर अंजाम दिया गया है। 

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नागा-कुकी समुदाय के संगठनों ने क्या कहा ?

इस पूरे प्रकरण पर नागा समुदाय में काफी नाराजगी देखने को मिल रहा है। नागा समुदाय की सामाजिक संस्था तांगखुल नागा लोंग (TNL) ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कुकी समुदाय के ऊपर आरोप लगाया है। तांगखुल नागा लोंग (TNL) का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में कुकी समुदाय के लोग शामिल थे। तांगखुल नागा लोंग (TNL) ने कहा है कि फरवरी में शुरू हुआ विवाद अभी तक थमने का नाम नहीं लिया है। लिटान, लाहो, सिनाकेइथेई, सिकिबुंग और थवाई इलाकों में कुकी समुदाय से जुड़े चरमपंथी संगठनों ने नागा समुदाय के आमजन पर बहुत बार हमले किए हैं। संगठन ने मांग किया है कि याओलेन और आसपास के इलाकों में छानबीन की जानी चाहिए। 

वहीं कुकी समुदाय से जुड़े संगठनों का कहना है कि बिना किसी जांच के कुकी समुदाय पर आरोप लगाना गलत है। कुकी जो कौंसिल ने इस पूरे प्रकरण में किसी भी तरीके से कुकी समुदाय के शामिल होने से इनकार किया है। 

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने इस मामले पर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि इस पूरे मामले के जांच की जिम्मेवारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया है। 

बता दें कि मणिपुर (Manipur News) में हाल ही में 8 फरवरी 2026 को एक तांगखुल नागा व्यक्ति पर कथित हमला हुआ था। प्रशासन के मुताबिक, लिटन गांव में सात-आठ लोगों द्वारा तांगखुल नागा समुदाय के एक व्यक्ति के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। इस पूरे घटना के बाद तनाव इतना बढ़ गया था कि सरकार को 5 दिनों के लिए इंटरनेट बंद करना पड़ा था। इस तनाव को कम करने की कोशिश जारी थी लेकिन इसी बीच इस नए घटना ने फिर से तनाव को जन्म दे दिया है। 

मणिपुर में संघर्ष क्यों ?

मणिपुर (Manipur News) में नागा–कुकी संघर्ष (Naga and Kuki conflict) की जड़ें काफी पुरानी हैं। दरअसल, मणिपुर (Manipur News) के पहाड़ी क्षेत्रों में सामुदायिक भूमि को लेकर दोनों के बीच काफी लम्बे समय से संघर्ष होता चला आ रहा है। नागा (Naga) समुदाय के लोगों का कहना है कि कूकी लोग ब्रिटिश काल में उनकी परंपरागत जमीन पर बसाए गए हैं। उनका कहना है कि कुकी समुदाय के लोग बाहरी लोग हैं। पहाड़ी क्षेत्र पर नागा समुदाय ‘ग्रेटर नगालिम’ के नाम से अपना परंपरागत अधिकार बताते हैं।

दूसरी तरफ कुकी (Kuki) समुदाय का कहना है कि कुकी लोग बाहर से नहीं बल्कि परंपरागत रूप से यहीं के हैं। उनका कहना है कि इस इलाके में ऐसी कई सारी बस्तियां हैं जो बहुत सालों से बनी हुईं हैं। इसी आधार बनाकर कुकी लोग खुद को यहाँ का वैध पैतृक निवासी मानते हैं। यह संघर्ष उनके बीच मतभेद को बढ़ाता चला गया और यह मतभेद इन समुदायों के बीच समय-समय पर अलग-अलग कारणों से हिंसात्मक संघर्ष का रूप धारण करते हुए दिखाई पड़ता है। इन समुदायों के आपसी संघर्ष में इनके बहुत सारे संगठनों का योगदान होता है।

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