1934 में महात्मा गांधी और हेडगेवार के बीच क्या हुई थी बातचीत, 'आखिरी सवाल' में होगा खुलासा

धुरंधर: द रिवेंज' में असलम चौधरी के दमदार किरदार से दर्शकों को प्रभावित करने के बाद, संजय दत्त अब अपनी आगामी फिल्म 'आखिरी सवाल' के साथ पर्दे पर लौट रहे हैं।
1934 में महात्मा गांधी और हेडगेवार के बीच क्या हुई थी बातचीत,
1934 में महात्मा गांधी और हेडगेवार के बीच क्या हुई थी बातचीत,IANS
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धुरंधर: द रिवेंज' में असलम चौधरी के दमदार किरदार से दर्शकों को प्रभावित करने के बाद, संजय दत्त अब अपनी आगामी फिल्म 'आखिरी सवाल' के साथ पर्दे पर लौट रहे हैं। इस फिल्म में वह उन संवेदनशील और ज्वलंत प्रश्नों को उठाते नजर आएंगे, जिन पर चर्चा अक्सर देश में विवाद का कारण बन जाती है।

हाल ही में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का दूसरा प्रभावशाली टीजर रिलीज किया गया है। टीजर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच हुए ऐतिहासिक संवाद की एक गहरी झलक देखने को मिल रही है, जो दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा कर रही है।

15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्म 'आखिरी सवाल' का दूसरा टीजर सस्पेंस के साथ कई सवाल भी पूछता है। टीजर में 1934 में महात्मा गांधी और आरएसएस के डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच वर्धा में हुई बातचीत को दिखाने की कोशिश की गई है। टीजर में गांधी जी कहते हैं, "जातिवाद एक दिन भारत को पूरा बर्बाद कर देगा," जबकि बलिराम हेडगेवार कहते हैं कि आरएसएस में जातिवाद की कोई जगह नहीं है।

फिल्म के टीजर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के चरित्र को काफी आक्रामक और गंभीर मुद्रा में दर्शाया गया है। वर्ष 1934 में महात्मा गांधी और आरएसएस संस्थापक डॉ. हेडगेवार के बीच हुई वार्ता हमेशा से ही चर्चा और विमर्श का विषय रही है। एक मत के अनुसार, गांधी जी संघ की कार्यप्रणाली और वहां व्याप्त अनुशासन से प्रभावित थे, विशेषकर जातिगत भेदभाव की अनुपस्थिति ने उन्हें आकर्षित किया था। साथ ही, कार्यालयों में देवी-देवताओं के स्थान पर केवल 'भारत माता' के चित्र की उपस्थिति भी उल्लेखनीय थी। वहीं दूसरी ओर, गांधी जी संघ से वैचारिक असहमति भी रखते थे।

गौरतलब है कि वर्धा जिले में महात्मा गांधी का सेवाग्राम आश्रम और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रमुख केंद्र, दोनों ही स्थित हैं।

इससे पहले भी फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था, जिसमें संजय दत्त दमदार भूमिका में दिखे। टीजर में सवाल पूछा गया कि जब आरएसएस को बैन कर दिया गया था, तो उसे एंटी-नेशनल संगठन क्यों नहीं कह सकते हैं। इन सवालों का जवाब फिल्म में संजय दत्त देंगे। फिल्म में विवादित ढांचे को लेकर भी कई खुलासे और राजनीति प्रभाव को भी फिल्म में दिखाया जाएगा। टीजर के बाद फिल्म का ट्रेलर देखने की जिज्ञासा बढ़ चुकी है।

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1934 में महात्मा गांधी और हेडगेवार के बीच क्या हुई थी बातचीत,
जब महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का चेहरा भारतीय नोटों का हिस्सा नहीं था

(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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