महारानी की छतरियां: राजपूत वंश की महिलाओं को समर्पित, इतिहास और सुंदरता का अनूठा संगम

राजस्थान का जयपुर, यानी पिंक सिटी, अपने नाम की तरह ही अनोखा है। यह स्थल सिर्फ सुंदरता का ही संगम नहीं है, बल्कि जयपुर की राजपूताना इतिहास को खुद में समेटे हुए है।
महारानी की छतरियां: राजपूत वंश की महिलाओं को समर्पित, इतिहास और सुंदरता का अनूठा संगम
महारानी की छतरियां: राजपूत वंश की महिलाओं को समर्पित, इतिहास और सुंदरता का अनूठा संगमIANS
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राजस्थान का जयपुर, यानी पिंक सिटी, अपने नाम की तरह ही अनोखा है। यह स्थल सिर्फ सुंदरता का ही संगम नहीं है, बल्कि जयपुर की राजपूताना इतिहास को खुद में समेटे हुए है। आज हम आपके लिए ऐसे पर्यटक स्थल की जानकारी लेकर आए हैं, जो खास तौर पर राजपूत वंश से जुड़ी महिलाओं को समर्पित है।

जयपुर के शंकर नगर के पास महारानी की छतरियां नाम की जगह है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यहां पर्यटक कम ही संख्या में आते हैं, लेकिन यह इतिहास और सुंदरता का अनूठा संगम है। महारानी की छतरियां उस स्थान को कहते हैं, जहां उनके स्मारक स्थल बने हुए हैं। यह छतरियां कछुवाहा राजपूत वंश की महिलाओं को समर्पित है। यहां कई स्मारक स्थल बने हुए हैं।

जयपुर की बाकी छतरियों से अलग, महारानी की छतरियां बेहद अलग हैं। बाकी जगहों पर मिश्रित या सिर्फ पुरुषों की छतरियों का निर्माण किया गया। लेकिन, ये छतरियां राजपूत वंश से जुड़ी महिलाओं को समर्पित हैं। यहां पर्यटकों को महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय की तीनों पत्नियों, महारानी मरुधर कंवर, महारानी किशोर कंवर और तीसरी पत्नी महारानी गायत्री देवी की छतरियां देखने को मिल जाएंगी।

छतरियों का निर्माण भी महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय ने कराया था। इसके साथ ही इसी कुल की अन्य महिलाओं और रानियों की छतरियां भी यहीं बनाई गई हैं। यहां बारीक और शानदार नक्काशी के साथ कई गुबंद देखने को मिल जाएंगे। गुंबद चार स्तंभों पर टिका है, जिस पर कई वाद्य यंत्रों को बारीकी से उकेरा गया है। स्तभों पर सारंगी, ढोलक और मंजीरों के चित्र बने हैं, जो राजपूत वंश के संगीत प्रेम को दिखाते हैं।

गुंबद को ओहदे के अनुसार शुद्ध सफेद संगमरमर या फिर स्थानीय पत्थरों से बनाया गया है। वंश की महारानी की छतरियों का निर्माण संगमरमर से किया गया है, जबकि कुछ के स्मारक स्थल स्थानीय पत्थर से तैयार किए गए हैं।

स्थानीय मान्यता की मानें तो स्मारक का गुंबद तभी पूरा होता है, जब रानी की मौत राजा से पहले हो जाती है। जिनकी मौत राजा के बाद हुई, उनके गुंबद आज भी अधूरे हैं। महारानी की छतरियां देखने के लिए किसी भी समय जा सकते हैं। यह हर समय खुला रहता है और स्मारक स्थल की एंट्री फीस मात्र 30 रुपए है। यहां परिवार के साथ घूमने जाया जा सकता है। [SP]

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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