

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) सीरीज लॉन्च की, साथ ही मंत्रालय ने बताया कि मई में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई।
नई डब्ल्यूपीआई सीरीज ने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी सीरीज की जगह ले ली है। यह देश में उत्पादक मूल्य माप प्रणाली (प्रोड्यूसर प्राइस मेजरमेंट) में किए जा रहे व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
संशोधित डब्ल्यूपीआई के साथ सरकार ने आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) और सात सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) की नई सीरीज भी जारी की है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की ओर यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की सिफारिशों और वैश्विक मानकों के अनुरूप है। उपयोगकर्ताओं को नई प्रणाली अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने के उद्देश्य से डब्ल्यूपीआई सीरीज को अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाएगा।
मंत्रालय के मुताबिक, मई में अखिल भारतीय डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 9.68 प्रतिशत रही, जबकि सभी वस्तुओं का सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया।
प्रमुख श्रेणियों में प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर मई में बढ़कर 4.99 प्रतिशत हो गई।
वहीं, ईंधन और बिजली (फ्यूल एंड पावर) श्रेणी में महंगाई लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि विनिर्मित उत्पादों (मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स) की महंगाई दर इसी अवधि में बढ़कर 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई।
मंत्रालय ने बताया कि खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।
इसके अलावा, मई में डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई।
संशोधित सीरीज के तहत डब्ल्यूपीआई बास्केट में शामिल वस्तुओं की कुल संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है।
नई सीरीज में बिजली श्रेणी के तहत सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा, पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को भी इस बास्केट में जगह दी गई है।
सरकार ने ऊर्जा बास्केट में भी बदलाव करते हुए कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में शामिल कर दिया है।
संशोधित पद्धति में वस्तुओं के वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (जीवीओ) का उपयोग किया गया है। साथ ही इंडेक्स तैयार करने और कीमतों के अनुपलब्ध होने की स्थिति से निपटने के लिए नई तकनीकों को अपनाया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि मई में सभी वस्तुओं के लिए नया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (ओपीपीआई) 109.6 रहा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र के लिए ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (आईपीपीआई) 104.9 दर्ज किया गया। (MK)
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)