

सीबीआई ने 550 करोड़ रुपए घोटाले के मामले में एक केस दर्ज किया है। सीबीआई ने इस मामले में हरियाणा में तैनात दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। यह मामला जब से प्रकाश में आया है शासन-प्रशासन सवालों के कटघरे में खड़ा है।
दरअसल, हरियाणा में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने लेनदेन में धोखाधड़ी और घोटाले के मामले में एक एफआईआर दर्ज की है। सीबीआई ने इस मामले में 9 अप्रैल 2026 को आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। शेल कंपनियों ने सरकारी खजाने से 550 करोड़ रुपए उड़ा दिए हैं। इन शेल कंपनियों का न तो कोई आधिकारिक कार्यालय था और न इनका कोई असली स्थाई पता था। अधिकारियों और बिचौलियों द्वारा इस तरीके से पैसा गबन करना प्रशासन के लिए एक चुनौती खड़ी कर गया है।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पैसे गबन मामले में सिर्फ एक विभाग नहीं बल्कि कई सारे विभागों से पैसा ट्रांसफर हुआ था। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB), विकास एवं पंचायत विभाग (Development and Panchayats Department), पंचकुला नगर निगम (Panchkula Municipal Corporation) का नाम इस मामले में प्रमुखता से आ रहा है। निलंबित आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह के ऊपर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार कंपनियों के माध्यम से लगभग 150 करोड़ रुपए इधर-उधर कर डाले। आईएएस प्रदीप कुमार के ऊपर आरोप है कि उन्होंने 2023 से 2024 के बीच हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के सचिव-सदस्य पद पर रहते हुए निजी बैंक कंपनियों को पैसा ट्रांसफर कर दिया। सरकारी फंड का उन्होंने गलत इस्तेमाल किया।
वहीं कार्रवाई के बाद कुछ बैंकों ने सरकार को पैसा वापस करने बात कही है। कुछ बैंकों ने पैसा वापस भी किया है। IDFC फर्स्ट बैंक ने हरियाणा राज्य सरकार को कुल 583.56 करोड़ लौटा दिया है।
भ्रष्टाचार ने देश के अंदर बड़ी मजबूती से पैर जमा लिया है। नीचे से लेकर ऊपर तक हर तरीके के अधिकारियों में भ्रष्टाचार नाम का भूत समाहित है। पंचायती राज व्यवस्था आज के समय भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। ऊपर से जितने पैसे काम करने के लिए ट्रांसफर किये जाते हैं उसका सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए एक बार कहा था 'जब केंद्र सरकार दिल्ली से 1 रुपया भेजती है, तो गरीब तक पहुँचते-पहुँचते वह सिर्फ 15 पैसे रह जाता है।' शायद यह बात आज भी प्रासंगिक है। अगर भ्रष्ट अधिकारी सरकारी पैसों का गबन इसी तरीके से करेंगे तो जनता के पास भेजने के लिए शायद ही कुछ बच पाएगा।
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