आखिर क्यों 23 साल के इस लड़के से डर गए थे पूर्व प्रधानमंत्री? जानें डीके शिवकुमार के 5 अनुसने किस्से

कर्नाटक में सत्ता का हस्तांतरण हो चुका है और डी के शिवकुमार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। डी के शिवकुमार वर्तमान में कांग्रेस के संकटमोचक माने जाते हैं। डीके शिवकुमार के ऐसे ही कई अनसुने किस्से हैं, जिन्हें जानकर काफी हैरानी होती है। साल 1985 में उनके ऊपर कांग्रेस हाईकमान ने भरोसा कर लिया और सतनूर (Sathanur) विधानसभा सीट से टिकट दे दिया। यह सीट कोई आम सीट नहीं थी क्योंकि इस सीट से एच डी देवगौड़ा चुनाव लड़ रहे थे।
डीके शिवकुमार
कर्नाटक की राजनीति में बड़े उलटफेर के बाद डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाल ली है। डी के शिवकुमार वर्तमान में कांग्रेस के संकटमोचक माने जाते हैं। शिवकुमार आज से नहीं बल्कि शुरू से ही राजनीति में अपनी निर्भीकता का परिचय देते रहे हैं। साल 2002 की बात है, जब महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे थे और सरकार लगभग गिरने वाली थी। कांग्रेस हाईकमान ने ऐसे बुरे वक्त में डीके शिवकुमार को याद किया। डीके शिवकुमार ने अपनी सांगठनिक ताकत का परिचय देते हुए सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई। x
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कर्नाटक में सत्ता का हस्तांतरण हो चुका है और डी के शिवकुमार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। डी के शिवकुमार वर्तमान में कांग्रेस के संकटमोचक माने जाते हैं। शिवकुमार आज से नहीं बल्कि शुरू से ही राजनीति में अपनी निर्भीकता का परिचय देते रहे हैं। डीके जब मात्र 23 साल के थे, उस समय उन्होंने देश के उस बड़े नेता से टक्कर ले ली थी जो आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने। डीके शिवकुमार के ऐसे ही कई अनसुने किस्से हैं, जिन्हें जानकर काफी हैरानी होती है।

महज 23 साल की उम्र में देश के होने वाले पीएम से टकरा गए

डीके शिवकुमार छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक सफर को शुरू करने वाले डीके युवावस्था में काफी सक्रिय नेता माने जाते थे। यही कारण रहा कि साल 1985 में उनके ऊपर कांग्रेस हाईकमान ने भरोसा कर लिया और सतनूर (Sathanur) विधानसभा सीट से टिकट दे दिया। यह सीट कोई आम सीट नहीं थी क्योंकि इस सीट से एच डी देवगौड़ा चुनाव लड़ रहे थे।

मात्र 23 साल के डी के शिवकुमार के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक चुनाव था। देवगौड़ा के सामने उन्होंने मजबूती से चुनाव लड़ा, लेकिन शिवकुमार यह चुनाव 15 हजार वोटों से हार गए। हालांकि, इस युवा नेता के सामने देवगौड़ा को भी डर लगने लगा था कि कहीं चुनाव हाथ से निकल न जाए। डीके जनाधार वाले युवा नेता थे और कर्नाटक की राजनीति को नई दिशा देते हुए दिखाई दे रहे थे।

सनातन धर्म में आस्था !

कांग्रेस पार्टी को प्रायः सेक्युलर पार्टी के तौर पर देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि बीजेपी की तुलना में कांग्रेस के नेता हिंदुत्व की राजनीति से परहेज करते हैं। लेकिन डीके शिवकुमार इस पुरानी परंपरा से हटकर सनातन धर्म में आस्थावान नजर आते हैं। यही कारण रहा कि जब डीके ने सीएम पद की शपथ ली, तो वह साधु-संतों की शरण में गए। इसके बाद उन्होंने प्रशासन की कमान संभाल ली।

ज्योतिष में विश्वास !

डीके शिवकुमार का ज्योतिष में विश्वास हमेशा से रहता है। अपने राजनीतिक जीवन को शुरू करने से पहले उन्होंने एक ज्योतिषी से अपनी कुंडली के बारे में पूछा था। जानकारी के मुताबिक, ज्योतिषी ने उसी समय यह बात बता दी थी कि उनके जीवन में राजयोग लिखा है। इसके अलावा ज्योतिषी ने यह भी बताया था कि उनके राजनीतिक जीवन में कानूनी अड़चनें आने वाली हैं और उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। लेकिन इसके बाद उनके जीवन का भाग्योदय होगा। इसलिए जब भी डीके को जेल जाना पड़ा, वह कभी भी घबराए नहीं और अपना मनोबल बढ़ाने के लिए ईश्वर का ध्यान करते रहते थे।

कांग्रेस के संकटमोचक कैसे बने डीके ?

डीके शिवकुमार छात्र जीवन से ही कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे हैं। एनएसयूआई (NSUI) में काम करते हुए उन्होंने हाईकमान को अपने कामों से बेहद प्रभावित कर दिया था। यही वजह थी कि हाईकमान को जल्द ही इस युवा पर भरोसा होता चला गया।

साल 2002 की बात है, जब महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे थे और सरकार लगभग गिरने वाली थी। कांग्रेस हाईकमान ने ऐसे बुरे वक्त में डीके शिवकुमार को याद किया। डीके शिवकुमार ने अपनी सांगठनिक ताकत का परिचय देते हुए सभी विधायकों को बेंगलुरु के पास एक रिसॉर्ट में सुरक्षित लाकर बैठाया। इसके बाद विपक्षी दलों की तमाम कोशिशों पर पानी फिर गया और विलासराव देशमुख की सरकार गिरने से बच गई।

साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जो पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था, उसमें भी डीके शिवकुमार का बहुत बड़ा हाथ था। इस चुनाव में कांग्रेस को 224 में से 136 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल हुआ था। चुनाव के बाद शिवकुमार को सीएम बनाने की बात कही जा रही थी लेकिन सिद्धारमैया को सीएम बनाया गया। अब इसके लगभग दो साल छह महीने बाद डीके शिवकुमार को कर्नाटक की सत्ता की मुख्य कमान मिली है।

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