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दिल्ली के शालीमार बाग में रोड चौड़ीकरण के कारण कई परिवारों को बेघर होना पड़ा है। कई सालों से शालीमार बाग में रह रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके घरों को 31 मई 2026 को तोड़कर गिरा दिया गया और उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है। शालीमार बाग के रोड न 320 के किनारे रहने वाले लोगों से 22 अगस्त 2026 को न्यूज़ग्राम की टीम ने बातचीत किया
दरअसल, दिल्ली के शालीमार बाग (Shalimar Bagh) में रोड नंबर 320 का चौड़ीकरण हो रहा है। इसके लिए सरकार ने उन घरों को निशाना बनाया जो सड़क के किनारे बने हुए थे। न्यूज़ग्राम की तरफ से मामले की जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि 30 से 40 साल लगातार मेहनत करके सड़क के किनारे दो-दो, तीन-तीन मंजिला मकान बनाया गया। जिनके घरों को तोड़ा गया है, उनका कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) से कई बार मिलनी की कोशिश की, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
न्यूज़ग्राम से बातचीत के दरमियान कान्ति देवी ने बताया,"हम यहाँ 35 सालों से रह रहे हैं। 31 मई 2026 को मेरा घर तोड़ दिया गया। मेरे परिवार में मैं, मेरी दो बेटियाँ और मेरे पति हैं। सरकार से हमारी मांग है कि हमारे साथ न्याय हो। हमें सही समय पर उचित मुआवजा मिले या फिर हमे कहीं और जमीन दी जाए।"
स्थानीय लोगों का कहना है कि वोट मांगने के लिए रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) शालीमार बाग (Shalimar Bagh) के इन्हीं गलियों में चक्कर लगाती रहती थीं, चुनाव जीतने के बाद उन्होंने एक बार भी शालीमार बाग के पीड़ित लोगों से मिलना मुनासिब नहीं समझा।
रोड नंबर 320 पर सड़क चौड़ीकरण के दरमियान जो नया नाला बना है, उस बड़े नाले में 20 अगस्त 2026 को 5 साल का बच्चा गिर पड़ा लेकिन बच्चे को सही सलामत निकाल लिया गया। बच्चे के दादा अजय मंडल का कहना है कि ये नाला स्थानीय लोगों के लिए एक खतरा बना हुआ है। सरकार इस नाले के खतरे को संज्ञान में ले और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिनिश्चित करे।
वहीं, अंदर गलियों में जाने पर पूछताछ करने पर लोगों ने बयान दिए कि सीवर का पानी पास होने के लिए बनाए गए छोटे-छोटे नाले से पानी जल्दी पास नहीं होता है। छोटी नालियां पूरी तरीके से जाम हैं, जिसकी वजह से 15 से 20 मिनट की बारिश अगर हो जाए तो घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि सड़क पर पानी जमा हो जाता है।
न्यूज़ग्राम से बातचीत के दरमियान दुकानदार सौरभ मिश्रा ने कहा, "इस इलाके में नाली साफ़ करने के लिए यदा-कदा ही कोई आता है। जब नाली की समस्या बहुत बढ़ जाती है, तो फोन करने पर ही सफाईकर्मी आते हैं, लेकिन नाले की सफाई नियमित तौर पर नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से मच्छरों का जमावड़ा बना रहता है। यही वजह है कि इस इलाके में रहने वाले लोगों को तमाम तरीके की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। रोड बनने के बाद से नाले की समस्या लगातार बनी हुई है। नालियों की चौड़ाई बहुत कम है इसकी वजह से पानी निकलने में समस्या होती है। छोटी नलियां पूरी तरीके से जाम हैं जिसकी वजह से पानी नहीं निकल रहा है। एक बार बारिश होने पर सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है।"
आगे बढ़ने पर कोचिंग संचालक विनीता ने बताया, "रोड का पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिसकी वजह से बच्चों का आना जाना, बहुत कठिन हो जाता है।"
करिश्मा नामक महिला बताती हैं " मेरा जन्म यहीं हुआ है और मैं इन्हीं तंग गलियों में बड़ी हुई हूँ। नाले की समस्या मैं बचपन से देख रही हूँ। पीने का पानी साफ़ नहीं आता है। यह समस्या कई सालों से लगातार बनी हुई है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों में बीमारियों का भय बना रहता है, और बहुत सारे लोग बीमार भी पड़ते हैं।"
ई रिक्शा चालक सोनू बताते हैं, " मैं कई सालों से नाले की समस्या, पानी की समस्या को देख रहा हूँ। बारिश होने पर सड़क पर कभी-कभी घुटने तक पानी जमा हो जाता है।"
साल 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में रेखा गुप्ता शालीमार बाग विधानसभा से विधायक चुनी गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद अभी तक रोड न 320 के पास बस्ती की गलियों में रेखा गुप्ता ने एक बार भी हाजिरी नहीं लगाई है, जिन गलियों में घूम-घूमकर वोट मांगती थी। बता दें कि रेखा गुप्ता से पहले बंदना कुमारी (AAP) इस क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सालों से यहाँ समस्या बनी हुई है।
दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विधानसभा क्षेत्र का खस्ता हाल बता रहा है कि पूरे दिल्ली में किस तरीके से काम हो रहा है। दिल्ली के अन्य जगहों पर भी इस तरीके की समस्याएं बनी हुई हैं जैसे-सदर बाजार, भलस्वा, नेहरू विहार जैसे इलाकों में साफ-सफाई और नालों का बुरा हाल है।
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