मानसून ने खोली मोदी सरकार के खोखले विकास की पोल, भ्रष्टाचार में बह गए करोड़ों के ये 3 एक्सप्रेसवे

हजारों करोड़ की लागत, कुछ ही महीनों में धंसती सड़कें: दिल्ली-देहरादून, बुंदेलखंड और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे ने राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता, भ्रष्टाचार और चुनावी जल्दबाजी पर नए सवाल खड़े किए
मोदी और सड़क
भारत में सड़कों का जाल है लेकिन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर कई बार गंभीर सवाल खड़े होते हैं। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों से दिल्ली-देहरादून एक्स्प्रेसवे का उद्घाटन किया था। लेकिन यह सड़क महज कुछ ही दिनों की मेहमान साबित हुई और एक ही बारिश में इसने दम तोड़ दिया।X
Published on
Updated on
3 min read

भारत में सड़कों का जाल है लेकिन सड़कों की गुणवत्ता को लेकर कई बार गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विगत कई सालों से लगातार देखा जा रहा है कि भारत में सड़क निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उसकी हालत खराब हो जाती है। आज हम ऐसे ही तीन सड़कों की बात करेंगे जो बहुत चर्चे में रहे हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्स्प्रेसवे

भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में बना दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi–Dehradun Expressway) कुछ ही दिनों में दम तोड़ने लगा है। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने हाथों से इस एक्स्प्रेसवे का उद्घाटन किया था। लेकिन यह सड़क महज कुछ ही दिनों की मेहमान साबित हुई और एक ही बारिश में इसने दम तोड़ दिया।

सड़क के खराब होने की खबर चारों तरफ फैलने पर सवाल खड़े होने लगे कि चार-पाँच साल में कौन-सी मेहनत हुई कि एक ही बारिश में सब कुछ पानी में बह गया। दरअसल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस एक्स्प्रेसवे को बनाने की घोषणा साल 2020 में की थी। 26 फरवरी 2021 को नितिन गडकरी ने इस सड़क को बनाने की आधारशिला रखी। इसके बाद 4 दिसंबर 2021 को उत्तराखंड में चुनाव से एक साल पहले इस सड़क को बनाने के लिए 12 हजार करोड़ रुपये देने की घोषणा की गई।

लगभग 210 किलोमीटर लंबी इस सड़क को बनाने हेतु इसे चार चरणों में बाँटा गया था। नए एक्सप्रेसवे की हालत 1 जुलाई 2026 को उस समय उजागर हुई, जब बारिश की बूंदों ने सड़क पर दस्तक दी। सड़क की खराब गुणवत्ता ने भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है। लगभग पाँच साल में बनी यह सड़क बारिश के समय अचानक नीचे धंस गई। हालांकि, प्रशासन अपनी तरफ से प्रयास कर रहा है कि कोई सड़क दुर्घटना न हो। इसके बावजूद सड़क को लेकर सरकार के प्रति जनता के मन में नाराजगी और कई सवाल बने हुए हैं।

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को बनाने में लगभग 14,850 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश के जालौन में किया था। उद्घाटन के महज पाँच दिन बाद ही बारिश ने दस्तक दी और सड़क का एक हिस्सा जमीन के नीचे धंस गया। AI

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी ज्यादा नहीं चल सका

भाजपा सरकार में 29 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway) को बनाने में लगभग 14,850 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 16 जुलाई 2022 को उत्तर प्रदेश के जालौन में किया था।

लेकिन इस सड़क ने ज्यादा लंबा जीवन नहीं जिया और एक बारिश में सारी सच्चाई बाहर निकलकर आ गई। बता दें कि उद्घाटन के महज पाँच दिन बाद ही बारिश ने दस्तक दी और सड़क का एक हिस्सा जमीन के नीचे धंस गया। सड़क की इतनी खराब गुणवत्ता ने सरकार के कामकाज को सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया।

यह भी पढ़ें : चंपत राय से लेकर बड़े अफसरों तक... राम मंदिर विवाद में घिरी BJP, क्या बच जाएंगी 'बड़ी मछलियां'?

मोदी और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। महज 11 महीने के भीतर, 6 अक्टूबर 2022 को मूसलाधार बारिश में अचानक धंस गई। इसके बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठे।AI

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (उत्तर प्रदेश)

समाजवादी पार्टी की सरकार ने उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे' बनाने की घोषणा साल 2015 में की थी। साल 2017 में सत्ता से बाहर जाने के बाद भाजपा ने इस कार्यभार को संभाला और इसका नाम बदलकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) रखा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले, 16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एक्सप्रेसवे (Purvanchal Expressway) का उद्घाटन किया। लगभग 22,494.66 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क महज 11 महीने के भीतर, 6 अक्टूबर 2022 को मूसलाधार बारिश में अचानक धंस गई। लगभग 15 फीट का हिस्सा अचानक नीचे धंस गया, जिसके बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठे।

यह भी पढ़ें :

मोदी और सड़क
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में कथित ₹600 करोड़ खरीद घोटाला: ORS से एक्स-रे मशीन तक 500% तक बढ़ी कीमतें, टैक्सपेयर्स के भरोसे पर गहरा प्रहार
logo
www.newsgram.in