

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एक कार्यक्रम को लेकर विवाद सामने आया है, जहां छात्र संगठन एआईएसए ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रस्तावित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम का विरोध किया। इस विरोध में जामिया के अन्य प्रगतिशील छात्र संगठनों ने भी एआईएसए का साथ दिया।
छात्र संगठनों का कहना है कि आरएसएस देशभर की यूनिवर्सिटी में ‘युवा कुंभ’ जैसे कार्यक्रम आयोजित कर अपनी विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन खुद को राष्ट्र-निर्माण की पुरानी विरासत से जोड़कर पेश करता है जबकि उनके अनुसार स्वतंत्रता संग्राम में उसकी कोई भूमिका नहीं रही।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए संघर्ष किया था। उनका मानना है कि आज उसी विचारधारा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हो रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। जामिया परिसर में छात्रों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता और हिंसा से जुड़े किसी भी एजेंडे के लिए विश्वविद्यालय में जगह नहीं होनी चाहिए।
इस दौरान एआईएसए ने जामिया प्रशासन की भी आलोचना की। संगठन का आरोप है कि प्रशासन आरएसएस को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दे रहा है, जबकि अन्य प्रगतिशील छात्र संगठनों को इसी तरह के कार्यक्रमों के लिए अनुमति नहीं दी जाती। छात्रों ने इसे पक्षपातपूर्ण रवैया बताया और कहा कि विश्वविद्यालय को सभी संगठनों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए।
विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालयों का माहौल शिक्षा, विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जामिया जैसे शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी ऐसे कार्यक्रम की अनुमति न दी जाए, जिससे समाज में विभाजन पैदा हो।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर परिसर में बहस जारी है और छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने विरोध को आगे भी जारी रखेंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। [SP]
(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)