

बीपीएससी (BPSC- Bihar Public Service Commision) चयन प्रक्रिया में EWS प्रमाणपत्र को लेकर उजाला सिंह के मामले ने एक बार फिर आरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के चलते EWS पात्रता और निवास प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने लोक सेवा परीक्षाओं में पारदर्शिता और सख़्त सत्यापन की आवश्यकता को उजागर किया है।
संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग भारत देश में होने वाली सबसे प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं में गिने जाते हैं। यही वे परीक्षाएँ हैं, जिनमें सफल होने के बाद अभ्यर्थियों की नियुक्ति ऐसे पदों पर होती है, जिनके पास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की वास्तविक शक्ति होती है।
ऐसे में जब इन परीक्षाओं से जुड़े चयन को लेकर फर्जी प्रमाणपत्रों के उपयोग की खबरें सामने आती हैं, तो यह आम लोगों और ईमानदार अभ्यर्थियों के मन में गहरी निराशा पैदा करती हैं।
UPSC में पहले भी उठ चुके हैं सवाल
हाल ही में ऐसी ही खबरें UPSC की परीक्षा उत्तीर्ण कर IAS बने अधिकारियों- पूजा खेड़कर और रवि सिहाग को लेकर सामने आई थीं, जहाँ उन पर PwD और EWS श्रेणी के फर्जी अथवा संदिग्ध प्रमाणपत्रों के उपयोग के आरोप लगाए गए। हालांकि, इन मामलों में अब तक किसी भी प्रकार का अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है और जांच प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
अब बिहार से सामने आया नया मामला
इसी क्रम में एक बार फिर ऐसी खबर बिहार राज्य से सामने आई है। आरोपों के अनुसार बीपीएससी (BPSC- Bihar Public Service Commision) 2020 परीक्षा में सफल रहीं उजाला सिंह की नियुक्ति असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन अफसर (APO-Assistant Prosecution Officer APO) पद पर की गई। सोशल मीडिया और कुछ स्वतंत्र एक्स (Twitter) पेजों, जैसे खुरपेंच, पर यह दावा किया जा रहा है कि उजाला सिंह द्वारा EWS प्रमाणपत्र के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर क्या दावे किए जा रहे हैं?
सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के अनुसार, उजाला सिंह उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की निवासी बताई जा रही हैं। उनके पिता का नाम बलराम शर्मा बताया गया है और वह उनकी अविवाहित पुत्री हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है तथा उत्तर प्रदेश में उनका लगभग 2700 वर्ग फुट में बना आवास है।
इन दावों के आधार पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि उजाला सिंह उत्तर प्रदेश की निवासी हैं और वहाँ के मानकों के अनुसार EWS श्रेणी के लिए पात्र नहीं हैं, तो फिर बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में उन्होंने EWS प्रमाणपत्र का उपयोग कैसे किया ?
निवास और प्रमाणपत्र को लेकर उठते सवाल
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि परिवार द्वारा बिहार में कथित रूप से एक छोटे भू-खंड का दावा दिखाकर EWS प्रमाणपत्र बनवाया गया और उसी प्रमाणपत्र का उपयोग बीपीएससी (BPSC- Bihar Public Service Commision) परीक्षा में किया गया। हालांकि, इन सभी बातों की अब तक किसी आधिकारिक जांच या सरकारी दस्तावेज़ से पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी बताया जा रहा है कि उजाला सिंह के ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेज़ उत्तर प्रदेश के वाराणसी पते से जुड़े हुए हैं, जिससे उनके बिहार निवास और प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर सवाल और गहरे हो जाते हैं।
लोक सेवा आयोग की भूमिका पर उठते प्रश्न
इन तमाम आरोपों और सोशल मीडिया चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि, संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT- Departement of Personnel & Training)) इन मामलों पर क्या रुख अपनाते हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी खबरें चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रमाणपत्र सत्यापन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर रही हैं।
(PO)