

दरभंगा में कथावाचक पर नाबालिग के यौन शोषण और गर्भपात की दवा देने जैसे गंभीर आरोपों के बाद गिरफ्तारी हुई।
राम रहीम, आसाराम, नारायण साईं जैसे मामलों ने दिखाया कि ‘गुरु’ की छवि के पीछे अपराध भी छुप सकता है; वहीं अनिरुद्धाचार्य जैसे बयानों पर स्त्री-विरोधी रूढ़ियाँ फैलाने का आरोप है।
सतपाल महाराज के स्टाफ से जुड़ा जालसाजी-डिजिटल सिग्नेचर केस और राधे माँ पर 2015 की FIR जैसे प्रकरण बताते हैं कि “धर्म” की ढाल अक्सर जवाबदेही को कमजोर कर देती है।
भारत में भगवान को सर्वोपरि माना जाता है, और भगवान से जोड़ने वाले पंडित, बाबा, मौलाना को भी कई बार श्रद्धालु “ईश्वर" का ही सम्मान देते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहाँ धार्मिक पहचान और ‘आस्था’ की आड़ में अश्लील हरकतों, शोषण और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों का पर्दाफाश हुआ।
दरभंगा केस: कथावाचक पर नाबालिग से बलात्कार और गर्भपात की दवा देने का आरोप
हाल ही में बिहार के दरभंगा ज़िले से एक मामल सामने आया है। खबर के मुताबिक मिथिलांचल क्षेत्र में चर्चित कथावाचक “श्रवण दास जी महाराज” को पुलिस ने नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप हैं कि बाबा ने न सिर्फ नाबालिग के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि दो बार गर्भपात कराने के लिए दवाइयाँ भी खिलाईं। पीड़िता के बयान के अनुसार परिवार से बाबा की मुलाकात 3 जून 2023 को एक धार्मिक सम्मेलन में हुई थी। वहीं से संपर्क बढ़ा, मां का नंबर लिया गया, फिर बाबा घर में ही पूजा/कर्मकांड के नाम पर रहने लगा और धीरे-धीरे लड़की को मानसिक दबाव में लेकर शोषण किया गया। पीड़िता का कहना है कि उसे निवस्त्र होने के लिए मजबूर किया गया, और “बालिग होते ही शादी कर लूंगा” जैसे झूठे वादे दिए गए।
बताया जा रहा है कि आरोपी की उम्र करीब 31 वर्ष है और वह श्री राम-जानकी मंदिर के महंत के शिष्य बताए जा रहे हैं। पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी कर कार्रवाई की।
यह पहली बार नहीं है जब किसी बाबा या धर्म गुरु द्वारा किये गए अश्लील खबरों का मामला सामने आया हैं। ऐसे कई मामले हैं जहाँ श्रद्धालुओं ने बाबा या धर्म गुरु को भगवान का दर्जा दिया और बाद में उन्हीं धर्म गुरुओं द्वारा यौन शोषण और हत्या करने जैसी खबरें सामने आयीं।
1) गुरमीत राम रहीम सिंह
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम (जन्म : 15 अगस्त 1967) का नाम देश के सबसे चर्चित मामलों में रहा है। उन पर यौन शोषण के आरोपों में दोषसिद्धि हुई और वे जेल सज़ा काट रहे हैं (बीच-बीच में पैरोल/फर्लो जैसे मुद्दे भी खबरों में रहे हैं)। राम रहीम (Ram Rahim) हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल (Sunaria Jail) में बंद है। उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। राम रहीम पर साध्वियों से रेप और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के चलते उम्र कैद मिली है।
2) आसाराम — जेल/बेल स्टेटस
आसाराम (असल नाम असूमल हरपालानी) का जन्म 17 अप्रैल 1941 बताया जाता है। वे नाबालिग से बलात्कार मामले में दोषी (convicted) हैं। हाल के समय में उनकी मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत और उस पर विवाद भी खबरों में रहा है—यानी वे “कन्विक्ट” हैं, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से कोर्ट-आदेशों के तहत कुछ अवधि के लिए बाहर रहने की स्थिति बनी है। “आसाराम पर अपने ही अनुयायी की नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार का आरोप लगा और वे दोषी ठहराए गए। कई बार स्वास्थ्य कारणों से उन्हें अंतरिम राहत/बेल मिली, जिस पर पीड़िता पक्ष ने आपत्ति भी जताई।”
3) नारायण साईं
नारायण साईं (जन्म: 29 जनवरी 1972) आसाराम के बेटे है और अपने पिता की तरह इन पर भी यौन शोषण का आरोप लगा है, वे 2019 में बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गयी। नारायण साई पर सूरत की दो बहनो द्वारा यह आरोप लगाया गया कि 2002 -2005 के बीच उनके साथ आश्रम में बार-बार बलात्कार किया गया। इतना ही नहीं नारायण साई ने कितने ही लड़कियों के साथ जबरन शारीरिक संम्बंध बनाये।
4 ) अनिरुद्धाचार्य: “25 साल की लड़कियाँ… कई जगह किस्मत आजमा चुकी होती हैं” जैसे बयान और विरोध
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य (जन्म: 27 सितम्बर 1989) को लेकर आलोचना इसलिए तेज हुई क्योंकि उनके हवाले से ऐसे बयान सामने आए जिनमें 25 साल की उम्र में शादी करने वाली महिलाओं को “विवाह के योग्य नहीं” बताने जैसी बात कही गई। उनके कथन का अर्थ यही निकाला गया कि 25 की उम्र तक महिलाएँ “कई रिश्तों” में रह चुकी होती हैं—और देर से शादी करने पर “जवानी फिसल जाती है” जैसे शब्दों के साथ बेवफाई की संभावना जोड़ दी गई। यह भाषा सीधे-सीधे महिलाओं को चरित्र के पैमाने पर तौलती है और एक हानिकारक रूढ़िवादिता को सामान्य बनाती है।
यह कोई पहला विवाद नहीं रहा। 2022 में भी उन्हें इस टिप्पणी पर आलोचना झेलनी पड़ी थी कि सीता और द्रौपदी जैसी पौराणिक स्त्रियों की पीड़ा का कारण उनका “ज़रूरत से ज़्यादा सुंदर” होना था—यानी स्त्री की सुंदरता को ही दोष जैसा बताने वाला तर्क।
5) सतपाल महाराज: मंत्री पद, और “मंत्री के कार्यालय” से जुड़ा जालसाजी-डिजिटल हस्ताक्षर वाला केस
सतपाल महाराज (जन्म: 21 सितम्बर 1951) उत्तराखंड सरकार में पर्यटन, संस्कृति और सिंचाई जैसे विभागों में मंत्री हैं। दिसंबर 2022 में एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई: रिपोर्ट के मुताबिक उनके निजी सचिव (आई.पी. सिंह) और पीडब्ल्यूडी के एक मुख्य अभियंता के खिलाफ दस्तावेजों की कथित जालसाजी और पदोन्नति के लिए डिजिटल सिग्नेचर के दुरुपयोग को लेकर केस दर्ज किया गया। यानी मामला “मंत्री के कार्यालय/स्टाफ” से जुड़ा दिखा, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए। और पौड़ी (2020) वाले संदर्भ में—जैसा आपने लिखा—यह भी ज़रूरी है कि लेख में भाषा साफ रहे: वहाँ चर्चा “शिकायत/जांच” के स्तर पर दिखती है, और उपलब्ध विवरण सतपाल महाराज को स्वयं अपराधी के रूप में सीधे नहीं जोड़ते—बल्कि प्रशासन/कार्रवाई के निर्देश वाले संदर्भ में उनका उल्लेख आता है।
6) राधे माँ: 2015 की एफआईआर, आरोप और कोर्ट/पुलिस की स्थिति
राधे माँ (असल नाम: सुखविंदर कौर, जन्म: 4 अप्रैल 1965) पर सितंबर 2015 में अभिनेत्री डॉली बिंद्रा की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट आई थी, जिसमें आपराधिक धमकी, यौन उत्पीड़न, अश्लीलता-वॉयरिज़्म जैसे आरोप बताए गए। इसी समय अन्य शिकायतों का भी जिक्र आया जिनमें धर्म की आड़ में गलत गतिविधियों और अनुचित स्पर्श जैसे आरोप लगाए गए। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया में अलग-अलग याचिकाएँ की बातें भी सामने आती रहीं।
धर्म के नाम पर लोगों के बीच बन रहे ये पाखंडी बाबा को लेकर आज कल सोशल मीडिया पर एक तंज कसा जाता है कि भारत में बिना पढ़े लिखे अगर कोई सबसे ज्यादा पैसे का काम चाहिए तो बाबा बन जाओ और लोगों को भगवान के नाम पर बेवक़ूफ़ बनाओ।
(PO)