

Assam Assembly Elections 2026: असम के 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को चुनाव होना है l राज्य में चुनावी कार्यक्रम की गति तेज हो गई है l इस राज्य में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है जिसके मुखिया हेमंत बिस्वा सरमा हैं, दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस है और इसकी कमान गौरव गोगोई के हाथ में है, और तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (All India United Democratic Front) जिसके संस्थापक और प्रमुख बदरुद्दीन अजमल हैं l इस राज्य में लगभग सभी धर्म के लोग हैं जैसे कि हिन्दू,मुस्लिम, कुछ हिस्सों में ईसाई भी बसे हुए हैं l असम को देखा जाए तो वह 3 हिस्सों में बंटा है l ऊपरी, मध्य (बोडोलैंड क्षेत्र ) और निचली असम l हर क्षेत्र की अपनी-अपनी खासियत (धर्म, संस्कृति, आदि) है l तीनों क्षेत्र में अलग-अलग पार्टियों का दबदबा है l कहीं पर बीजेपी सत्ता में है तो कहीं पर कांग्रेस की ठीक-ठाक पकड़ है और बाकी सीटों पर राज्य की क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव है l असम की राजनीति को बारीकी से समझने के लिए पहले उसके भौगोलिक क्षेत्र को समझना जरूरी है l इस राज्य के चुनावी और जाती समीकरण ये क्षेत्र ही तय करते हैं l
ऊपरी असम:
अगर राज्य के पिछले चुनाव की बात करें तो NDA (National Democratic Alliance) को सत्ता में लाने और हेमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) को मुख्यमंत्री बनाने में ऊपरी असम का अहम योगदान रहा है l इस हिस्से में डिब्रूगढ़, जोरहाट और शिवसागर जैसे इलाके आते हैं और इन जिलों में BJP काफी मजबूत दिखाई देती है, इसका सबूत यह है कि पिछले चुनाव में भाजपा को 35 सीटों में से 30 सीटों पर विजय प्राप्त हुआ और बाकी 5 सीट कांग्रेस की झोली में चले गए l परिसीमन के बाद इस क्षेत्र में जनजाति की आबादी में बढ़ोत्तरी हुई है जो की भाजपा के लिए शुभ संकेत है l ऐसे में भारतीय जनता पार्टी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त है और पार्टी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार भी जनमत हमारे पक्ष में ही आएगा l इस क्षेत्र में अवैध प्रवासियों, बाढ़ और चाय बागान के मुद्ददे सबसे अहम् है l
मध्य असम (बोडोलैंड क्षेत्र):
मध्य असम में बोडोलैंड क्षेत्र (Bodoland) है, और यहाँ क्षेत्रीय पार्टी का प्रभाव ज्यादा है। इस इलाके में कुल 41 विधानसभा सीटें हैं। बीजेपी+ को 2021 विधानसभा चुनाव में 22 सीटों पर जीत मिली थी और कांग्रेस+ को 16 । इसके अलावा क्षेत्रीय पार्टियों को भी 3 सीटों पर जीत मिली। मध्य असम में सांस्कृतिक पहचान का खतरा, ब्रह्मपुत्र नदी के कारण बाढ़, और क्षेत्रीय विकास, भूमि अतिक्रमण, प्रमुख मुद्दे हैं। स्थानीय पार्टी के नेताओं द्वारा क्षेत्रीय लोगों में हमेशा डर का माहौल बनाया जाता है ताकि उन्हें लगता रहे यही लोग उनके पालनहार हैं l
निचला असम:
ऊपरी असम को बीजेपी की चुनावी रीढ़ कहा जाता है तो निचले असम को कांग्रेस की नाक कटने से बचाने वाला यही क्षेत्र है l यह क्षेत्र बांग्लादेश सीमा से सटा हुआ है और मुख्य इलाके बारपेटा, गोलपाड़ा, धुबरी मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं l कांग्रेस और एआईयूडीएफ (आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) का इस इलाके में दबदबा रहता है l एआईयूडीएफ को असम में 16 सीटें मिली थीं, जिनमें से ज्यादातर सीटें इसी इलाके से आई थी। इस इलाके की कुल 50 सीटों में से 23 सीटें एनडीए के खाते में गई, बाकी 27 सीटों पर कांग्रेस गठबंधन की जीत हुई।
इस क्षेत्र में ध्रुवीकरण (polarization) की राजनीति चरम सीमा पर है । बांग्लादेश की सीमा से सटे होने के कारण इस इलाके में आसानी से बंगलादेशी भी आकर अवैध रूप से बस जाते हैं l बीजेपी इसे मुद्दा बनाती है तो कांग्रेस कहती है कि भाजपा क्षेत्रीय मुस्लिमों को निशाना बना रही है l इस क्षेत्र में बजरुद्दीन अजमल और अन्य मुस्लिम नेताओं का बोलबाला है। इस बार AIMIM पार्टी ने भी असम की राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रही है l
असम में भले ही भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में लेकिन असली ताकत तो मध्य असम के क्षेत्र से ही आता है l राजनीतिज्ञ मानते हैं कि जो मध्य असम जीता वही सच्चा सिकंदर है l
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