सूर्य नमस्कार से लेकर अर्ध मत्स्येन्द्रासन तक: किडनी को हेल्दी रखने के लिए रोजाना करें ये 9 योगासन

किडनी (गुर्दा) हमारे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये खून को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने और पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किडनी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है।
सूर्य नमस्कार से लेकर अर्ध मत्स्येन्द्रासन तक: किडनी को हेल्दी रखने के लिए रोजाना करें ये 9 योगासन
सूर्य नमस्कार से लेकर अर्ध मत्स्येन्द्रासन तक: किडनी को हेल्दी रखने के लिए रोजाना करें ये 9 योगासनIANS
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किडनी (गुर्दा) हमारे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये खून को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने और पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किडनी की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली के साथ कुछ योगाभ्यास भी शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर किडनी हेल्दी वाले 9 आसान योगासनों के बारे में बताया है।

सूर्य नमस्कार: सूर्यनमस्कार 12 आसनों का एक समूह है। इसका नियमित अभ्यास पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाता है। यह किडनी में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता में सुधार होता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकलते हैं।

उत्तानपादासन: इस आसन में पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाया जाता है। यह आसन पेट की मांसपेशियों और गुर्दे के आसपास के अंगों को सक्रिय करता है। इससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और किडनी पर जमा अतिरिक्त दबाव कम होता है।

त्रिकोणासन: इस आसन में शरीर को त्रिकोण के आकार में खींचा जाता है। यह किडनी और एड्रिनल ग्रंथि को उत्तेजित करता है। इससे किडनी के आसपास जमी चर्बी कम होती है और किडनी के कार्य में सुधार होता है।

सेतुबंधासन: पीठ के बल लेटकर कमर को ऊपर उठाने वाले इस आसन से किडनी पर हल्का दबाव और खिंचाव पड़ता है। यह किडनी में रक्त प्रवाह को नियंत्रित करता है और थकान व तनाव को कम करके किडनी पर तनाव के नकारात्मक प्रभाव को रोकता है। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी मददगार है, जो किडनी खराब होने का एक बड़ा कारण है।

कटिचक्रासन: खड़े होकर कमर को घुमाने वाला यह आसन किडनी के लिए बहुत लाभदायक है। यह पेट और पीठ के निचले हिस्से की मालिश करता है, जिससे किडनी सक्रिय होती है और पथरी बनने की संभावना कम होती है।

धनुरासन: पेट के बल लेटकर शरीर को धनुष के आकार में खींचने से गुर्दे सहित पेट के सभी अंगों की मालिश होती है। यह आसन किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और मूत्र प्रणाली से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है।

वक्रासन: बैठकर रीढ़ को मोड़ने वाले इस आसन से किडनी और लिवर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यह किडनी को डिटॉक्स करने और उसके प्राकृतिक कार्यों को बेहतर बनाने में मदद करता है।

भुजंगासन: इसे कोबरा पोज भी कहा जाता है। यह आसन पेट के अंगों में खिंचाव लाता है, जिससे किडनी में रक्त का संचार तेज होता है और किडनी स्वस्थ रहती है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन: रीढ़ को घुमाकर किया जाने वाला यह आसन किडनी के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। यह किडनी और एड्रिनल ग्रंथि को उत्तेजित कर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।(VR)

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(यह रिपोर्ट IANS न्यूज़ एजेंसी से स्वचालित रूप से ली गई है। न्यूज़ग्राम इस कंटेंट की कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेता।)

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