आपकी थाली से जुड़े 9 अहम नियम, जो तन-मन दोनों का रखते हैं ख्याल
आपकी थाली से जुड़े 9 अहम नियम, जो तन-मन दोनों का रखते हैं ख्याल

आपकी थाली से जुड़े 9 अहम नियम, जो तन-मन दोनों का रखते हैं ख्याल

Published on

नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। आयुर्वेद में भोजन को सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे तन और मन दोनों को संतुलित रखने का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। इसलिए आयुर्वेद में खाने से जुड़े कई ऐसे नियम बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर हम लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।

सबसे पहला नियम है कि अपने भोजन को पहचानें। यानी हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए वही भोजन करें जो आपके शरीर को सूट करता हो और खाने के बाद आपको हल्का और ऊर्जावान महसूस कराए।

दूसरा महत्वपूर्ण नियम है कि हमेशा प्रसन्न मन से भोजन करें। अगर आप गुस्से, तनाव या चिंता में हैं तो तुरंत खाना खाने से बचें। ऐसी मानसिक स्थिति में खाया गया भोजन ठीक से पच नहीं पाता और इससे अपच, गैस या अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं। इसी तरह आयुर्वेद कहता है कि बिना भूख के कभी खाना नहीं खाना चाहिए। जब शरीर को सच में भूख लगती है तभी पाचन तंत्र सक्रिय होता है और भोजन सही तरीके से पचता है।

तीसरा नियम है कि भोजन का स्वाद लेकर और आराम से खाना चाहिए। स्वादिष्ट और मनपसंद भोजन मन को खुश करता है, जिससे शरीर को भी ऊर्जा और संतुष्टि मिलती है।

चौथा नियम है कि हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही खाना चाहिए। कोशिश करें कि खाना बनने के एक घंटे के अंदर ही खा लिया जाए, क्योंकि ताजा भोजन जल्दी पचता है और शरीर को अधिक पोषण देता है। बार-बार खाना गरम करना भी सही नहीं माना गया है, क्योंकि इससे भोजन के पोषक तत्व कम हो जाते हैं।

आयुर्वेद में यह भी बताया गया है कि बार-बार या लगातार कुछ न कुछ खाते रहना सही नहीं है। इससे पाचन तंत्र को आराम नहीं मिलता और धीरे-धीरे पाचन कमजोर होने लगता है।

रात का भोजन हमेशा हल्का होना चाहिए और सोने से कम से कम तीन घंटे पहले कर लेना चाहिए। खाने के बाद थोड़ी देर टहलना भी फायदेमंद माना जाता है।

एक और अहम नियम है कि भोजन हमेशा मौसम और स्थान के अनुसार होना चाहिए, जैसे सर्दियों में गर्म और पौष्टिक भोजन, जबकि गर्मियों में हल्का और ठंडक देने वाला भोजन ज्यादा लाभकारी होता है।

आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि भोजन का चुनाव व्यक्ति की प्रकृति (प्रकृति यानी शरीर की बनावट) के अनुसार होना चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन लोगों को मोटापा या मधुमेह की समस्या है, उनके लिए जौ या मोटे अनाज जैसे सूखे गुण वाले खाद्य पदार्थ बेहतर माने जाते हैं।

कमजोर या बीमार व्यक्ति के लिए तरल और हल्का भोजन, जैसे दलिया, सूप या चावल का माड़ फायदेमंद माना जाता है। अगर किसी का पाचन कमजोर है तो उसे कम मात्रा में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए।

इसके अलावा, कुछ चीजों से बचने की सलाह भी दी गई है, जैसे दही को रात में नहीं खाना चाहिए और इसे हमेशा दिन में ही लेना बेहतर माना जाता है। भोजन से ठीक पहले या तुरंत बाद ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं माना जाता। अगर प्यास लगे तो भोजन के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी लिया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

logo
www.newsgram.in