वडोदरा: 17 वर्षीय जैनिल ने डिफेंस टेक्नोलॉजी में रचा इतिहास, फाइटर जेट कैनोपी के लिए अनोखी तकनीक विकसित की
वडोदरा: 17 वर्षीय जैनिल ने डिफेंस टेक्नोलॉजी में रचा इतिहास, फाइटर जेट कैनोपी के लिए अनोखी तकनीक विकसित की

वडोदरा: 17 वर्षीय जैनिल ने डिफेंस टेक्नोलॉजी में रचा इतिहास, फाइटर जेट कैनोपी के लिए अनोखी तकनीक विकसित की

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वडोदरा, 7 मार्च (आईएएनएस)। गुजरात के वडोदरा के 17 वर्षीय जैनिल चापानेरिया ने कम उम्र में डिफेंस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कमाल कर दिखाया है। उन्होंने फाइटर जेट के पायलटों की सुरक्षा के लिए एक अनोखी तकनीक विकसित की है, जिसके लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। यह उपलब्धि इतनी कम उम्र में सीमित संसाधनों के साथ हासिल करना वाकई सराहनीय है।

जैनिल चापानेरिया वडोदरा के पास रनोली गांव में पले-बढ़े और फिलहाल कारेलीबाग इलाके में रहते हैं। उन्होंने पिछले 15 सालों में हुई घटनाओं का अध्ययन किया, जिसमें तकनीकी खराबी या मानवीय गलती से फाइटर जेट की कैनोपी (कॉकपिट का शीशा ढक्कन) अचानक खुल जाने से करीब 400 हादसे हुए हैं। इन हादसों में कई पायलटों की जान गई या वे गंभीर रूप से घायल हुए।

यह तकनीक इनर्शियल फोर्स (जड़त्व बल) के आधार पर काम करती है। जब विमान में अचानक तेज गति, उछाल या कोई असामान्य स्थिति आती है, तो यह सिस्टम खुद-ब-खुद कैनोपी को लॉक कर देता है, जिससे वह खुलने से बच जाती है। इस तरह पायलट की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और हादसों का खतरा काफी कम हो जाता है। जैनिल ने अक्टूबर 2025 में इस तकनीक के लिए पेटेंट फाइल किया था, जिसे दिसंबर 2025 में मंजूरी मिल गई।

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इस नवाचार को मान्यता दी है और जैनिल का नाम अब देश के सबसे कम उम्र के इनोवेटर्स में शामिल हो गया है। जैनिल ने बताया कि उनका सपना डीआरडीओ से जुड़ना और भविष्य में भारतीय वायुसेना में पायलट बनकर देश की सेवा करना है। वे डीआरडीओ से स्कॉलरशिप की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि अपनी पढ़ाई और रिसर्च को आगे बढ़ा सकें।

स्थानीय लोग और शिक्षक जैनिल की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों में भी जैनिल ने जो कुछ किया है, वह युवाओं के लिए प्रेरणा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक फाइटर जेट्स की सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है और भारतीय रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है। जैनिल की यह सफलता साबित करती है कि उम्र कोई बाधा नहीं होती, अगर जुनून और मेहनत हो।

--आईएएनएस

एमएस/

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