

रामपुर जिले के शाहबाद तहसील के अमीन प्रेम शंकर तिवारी को मुरादाबाद से आई आईटी टीम (IT Team) ने 15 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया l टीम के अधिकारीयों का कहना है कि अमीन ने किसी छोटे काम करवाने के लिए ग्रामीणों से मोटे रकम की मांग की, लेकिन वह पैसे नहीं दे सका और तुरंत एंटी करप्शन टीम को सूचित किया l मौके पर पहुँच कर टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर रामपुर कोतवाली ले आई और पूछ-ताछ कर रही है l
इस कार्रवाई से कार्यालय और बाकी अफसरों में हड़कंप मच गया l अमीन के परिजनों का आरोप है कि कोतवाली में उनके साथ मार-पीट हुई है, लेकिन आईटी टीम (IT Team) ने इसे सीधे नाकारा है l
अब जानते है क्या है Anti Corruption Organisation और शिकायत करने की प्रक्रिया:
प्रदेश का कोई भी नागरिक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध इस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकता है, जिसके पश्चात ऐसे भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध जांच की जाएगी और यदि वह दोषी पाए गए , तो उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी |
भ्रष्टाचार-विरोधी संगठन (Anti Corruption Organisation) का गठन दिनांक 18-04-197के अंतर्गत हुआ। इसका नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक करते हैं, जिन्हें पुलिस महानिरीक्षक और दो उप पुलिस महानिरीक्षकों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। इसकी 11 इकाइयों का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक करते हैं और इनका पर्यवेक्षण पुलिस अधीक्षक/अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों द्वारा किया जाता है।
कार्य:
1- जिला मजिस्ट्रेट या विभागाध्यक्षों के संदर्भ पर उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) रैंक तक के पुलिसकर्मियों और पुलिस निरीक्षक के समकक्ष रैंक के अन्य विभागों के अधिकारियों के विरुद्ध पूछताछ/जांच करना। सहायक जांच अधिकारी भ्रष्टाचार, जबरन वसूली, जानबूझकर उत्पीड़न, प्रतिशोधात्मक रवैया या दुर्भावनापूर्ण इरादे से विशेष आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग से संबंधित मामलों में पूछताछ और जांच कर सकता है।
2- भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के विरुद्ध खुफिया जानकारी एकत्र करना और नियमों के अनुसार जाल बिछाना।
3- सक्षम प्राधिकारी के संदर्भ पर राज्य के गैर-राजपत्रित लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच करना।
4- भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का गहन विश्लेषण करना और भ्रष्टाचार की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार को उचित उपाय सुझाना।
योगी सरकार में भ्रष्ट अधिकारीयों पर कार्रवाई:
योगी आदित्यनाथ की सरकार (2017 से अब तक) में भ्रस्टाचार के मामलों में अलग-अलग स्तर के अधिकारियों पर कई कार्रवाइयां हुई है l
कार्रवाई अलग-अलग विभागों और समय-समय पर होती रही है l रिपोर्ट्स के हिसाब से आंकड़े इस प्रकार है l
योगी सरकार में प्रमुख 5 भ्रष्टाचार मामले
1. Abhishek Prakash रिश्वत मामला (2025)
आरोप- सोलर प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए 5% कमीशन मांगने का आरोप।
कार्रवाई- योगी सरकार ने सस्पेंड किया और जांच शुरू हुई।
2. Sunil Kumar Verma भ्रष्टाचार मामला (2022)
आरोप- प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही।
कार्रवाई- DM पद से सस्पेंड और विजिलेंस जांच।
3. TK Shibu माइनिंग और प्रशासनिक भ्रष्टाचार (2022)
आरोप- माइनिंग और निर्माण कार्यों में अनियमितता।
कार्रवाई- तत्काल सस्पेंशन और विभागीय जांच।
4. Kumar Prashant गेहूं खरीद घोटाला (2018)
आरोप- सरकारी गेहूं खरीद में गड़बड़ी।
कार्रवाई- सस्पेंड और जांच।
5. Devendra Kumar Pandey शिक्षा विभाग खरीद घोटाला
आरोप- बेसिक शिक्षा विभाग की खरीद में वित्तीय अनियमितता।
कार्रवाई- सस्पेंड और जांच।
रिपोर्टों के अनुसार योगी सरकार में अब तक लगभग 11 IAS अधिकारियों को भ्रष्टाचार के मामलों में सस्पेंड किया गया है।
2017–2025 तक भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई (डेटा)
2017–2019
लगभग 600 भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई
इनमें 200 को जबरन VRS (Voluntary Retirement)
400 पर सख्त विभागीय कार्रवाई
2020–2022
कई जिलों के DM, विभागीय अधिकारी सस्पेंड
IAS और IPS स्तर पर भी कार्रवाई (जैसे Sonbhadra DM, Auraiya DM)।
2023–2025
कई विभागों में जांच और सस्पेंशन
Invest UP रिश्वत मामला समेत कई हाई-प्रोफाइल केस।
यानी 2017 से 2025 तक कुल मिलाकर लगभग 700+ अधिकारियों/कर्मचारियों पर किसी न किसी रूप में कार्रवाई हुई है (सस्पेंशन, VRS, विभागीय जांच आदि)।
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