

कर्नाटक सरकार के बाद, आन्ध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगाने की तैयारी कर रही है l
आंध्र प्रदेश सरकार के IT मंत्री नारा लोकेश ने बीते महीने दावोस में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम में अपने भाषण में कहा था कि वह अपने राज्य में एक ऐसा कानून पारित करने पर विचार कर रहे हैं जो छोटे बच्चों को डिजिटल लत से दूरी और मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस करे l
आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि फिलहाल उम्र 13 रखा जाए या 16 रखा जाए, अभी इस पर चर्चा चल रहा है। यह फैसला सिर्फ राज्य सरकार का ही नहीं बल्कि समाज से और बाकी कुछ और संस्थाओं से मिली प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा l सरकार का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के कानून से (सोशल मीडिया बैन) प्रेरित हो कर अपने राज्य में भी इस तरह के कानून लाने का विचार किया जा रहा है l
सरकार के इस फैसले पर कई लोगों ने खुल कर अपनी राय रखी है l सोशल मीडिया पर तरह-तरह के पोस्ट देखने को मिल रहे हैंl कुछ लोगों का कहना है, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि पूरी तरह बैन न लगाकर कुछ प्लेटफार्म पर एक सीमित अनुमति प्रदान करे। कुछ लोगों का मानना है, सरकार ने एक अच्छी पहल की है जिससे छोटे बच्चों को अनुचित कंटेंट से बचाया जा सकता है l कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर माता-पिता अपने बच्चों को एक सीमित समय के लिए फोन उपयोग करने दें तो इससे भी बच्चों को बुरी लत से बचाया जा सकता है l
सरकार यह भी कह रही है कि इतने छोटे उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है,
क्योंकि बच्चे कंटेंट को नहीं समझ पाते है और पूर्ण रूप से परिपक्व नहीं हुए है। उनका कहना है कि सरकार इस पर विचार कर रही है और आने वाले 90 दिनों में इस पर एक ठोस निर्णय लिया जाएगा l
कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश के अलावा बिहार, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी सोशल मीडिया के लत को दूर करने के लिए 16 वर्ष के कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबन्ध लगाने पर काम चल रहा है l भारत सरकार ने भी समय समय पर चेताया है कि अगर बच्चों को मोबाइल से दूर नहीं करेंगे तो इसका दुष्प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा l
यह जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि बच्चों के माता-पिता की भी है, माता-पिता को चाहिए की वह अपने बच्चों को मोबाइल ज्यादा समय के लिए ना दें अन्यथा नहीं, सरकार प्रतिबन्ध लगाने पर मजबूर होगी l वैसे भी कोई प्रतिबन्ध केवल कागजों पर दिखाई देता है, वास्तविकता कुछ और ही होता है और सब पहले की तरह ही चलते रहता है l
उदहारण के तौर पर देखा जाए तो बिहार में शराब बंदी है जहाँ पर सख्त चेतावनी दी गई है कि शराब किसी तरह से नहीं बेची जानी चाहिए, लेकिन बाजार में आसानी से मिल जाता है l
सबकुछ सार में यह कहना है कि सरकार कितनी भी कठोर कानून लागू करे, लेकिन जब तक आम जनता किसी चीज के प्रयोग से पड़ने वाले दुष्प्रभाव को नहीं समझेगी तो सरकार के कड़े कानून भी व्यर्थ हैंl
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